तीन दोस्तों की मौत : पूरे गांव में छाया मातम, घरों में नहीं जले चूल्हे, अर्थियां उठीं तो हर किसी की आंख हुई नम
Bijnor Accident News : बिजनौर में एक गांव के तीन दोस्तों की हादसे में मौत हो गई। तीनों के शव गांव में पहुंचे तो कोहराम मच गया। एक साथ तीन दोस्तों की मौत होने से परिवार और गांव में मातम छाया हुआ है। वहीं, गमगीन माहौल में तीनों का अंतिम संस्कार किया गया।
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बिजनौर के नगीना में तेज रफ्तार पिकअप गाड़ी ने एक बाइक में टक्कर मार दी। जिसमें बाइक पर सवार दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीसरे ने मेरठ में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। तीनों आपस में दोस्त थे, जो शादी समारोह से लौटते हुए हादसे का शिकार हो गए।
नहीं जले चूल्हे, तीन दोस्तों की अर्थियां उठने पर हर आंख हो गई नम
आपस में गहरी दोस्ती और एक दूसरे के पड़ोसी भी... इन तीन दोस्तों की नगीना बुंदकी मार्ग पर हुए सड़क हादसे में मौत हो गई। तीनों के शव घर पहुंचे तो आस पड़ोस ही नहीं बल्कि पूरे मोहल्ले में मातम छा गया। घरों में चूल्हे नहीं जले।
वहीं, एक-दूसरे के पड़ोसी तीनों दोस्तों की अर्थी उठी तो हर आंख नम हो गई। गमजदा माहौल में तीनों का अंतिम संस्कार किया गया। यह हादसा एक घर के चिराग को बुझा गया बाकी दो अन्य घरों को भी गम दे गया।
बिजनौर जनपद में बढ़ापुर के मोहल्ला नौमी निवासी प्रिंस पुत्र महेंद्र सिंह, गौरव पुत्र अमर सिंह व वंश कश्यप पुत्र नरपाल सिंह की बरात से लौटते हुए नगीना बुंदकी मार्ग पर सड़क हादसे में मौत हो गई। तीनों एक ही बाइक पर सवार थे, जोकि शुक्रवार की शाम खुशी-खुशी नगीना में रहने वाले दोस्त और पूर्व पड़ोसी की बरात में गए थे। ये बरात से नहीं लौटे बल्कि शनिवार की शाम इनके शव घर पहुंचे।
बता दें कि मृतक वंश और मृतक प्रिंस का घर आमने सामने हैं, जबकि गौरव का कुछ कदमों की दूरी पर। ऐसे में पूरे मोहल्ले में ही मातम छाया रहा। तीनों का अंतिम संस्कार गुलाह नदी के पास श्मशानघाट पर किया गया।
चार साल बाद दो घरों पर फिर टूटा गमों का पहाड़
करीब चार वर्ष पूर्व कोरोना काल में मृतक प्रिंस के पिता महेंद्र सिंह की मौत हो गई थी। प्रिंस क्षेत्र के एक काॅलेज में कक्षा 12 का छात्र था। काॅलेज से आने के बाद प्रिंस अपने परिवार की कपड़े की दुकान पर रहता था। प्रिंस दो भाई व एक बहन में सबसे बड़ा था। गौरव मजदूरी करता था और दो भाई व एक बहन में दूसरे नंबर पर था। गौरव के माता-पिता व भाई-बहन का रोते-रोते बुरा हाल है। कोरोना काल में ही वंश की मां की मौत हो गई थी।
नरपाल कश्यप की तो दुनिया ही उजड़ गई
बढ़ापुर नगर पंचायत में आउटसोर्सिंग पर कार्य करने वाले नरपाल सिंह कश्यप की पत्नी कविता की करीब चार वर्ष पूर्व कोरोना काल में मौत हो गई थी। पत्नी की मौत के बाद इस परिवार में नरपाल कश्यप और उसका इकलौता पुत्र वंश कश्यप ही थे। वंश कश्यप यहां के एसएस बाजवा स्कूल में हाईस्कूल का छात्र था। नरपाल कश्यप ने अपने इकलौते बेटे वंश को बाप के साथ साथ मां का भी प्यार दिया। इस दुर्घटना में इकलौते पुत्र वंश की मौत हो जाने पर नरपाल कश्यप टूट गया है। उसकी दुनिया ही उजड़ गई।