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बस से कुचलकर तीन भाइयों की मौत
अमर उजाला/बिजनौर
Updated Mon, 26 Nov 2018 12:23 AM IST
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गांव शाहपुर के पास सड़क दुर्घटना में तीन भाइयों की मौत के बाद जमा लगाती भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में रोडवेज बस की चपेट में आकर बाइक सवार तीन भाइयों की मौत हो गई। तीनों भाई एक फैक्ट्री में काम करने जा रहे थे। तीनों की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। घटना से आक्रोशित गांववालों ने शवों को उठने नहीं दिया और बिजनौर-चांदपुर मार्ग पर जाम लगा दिया। जाम के दौरान गांववालों व पुलिस की नोकझोंक भी हुई। सूचना मिलते ही अफसर मौके पर पहुंचे और चार घंटे की मशक्कत के बाद जाम खुलवाया। वहीं घटना के बाद आरोपी चालक मौके से फरार हो गया।
किरतपुर थाने के गांव गोविंदपुर निवासी चरण सिंह करीब एक साल पहले अपने परिवार सहित हीमपुर थाना क्षेत्र के गांव सिकंदरी में आकर बसे थे। उनके पांच बच्चों में तीन बेटे लोकेंद्र (23), जिवेंद्र (19) व रोहित (17) थे। तीनों बेटों में से किसी की भी शादी नहीं हुई थी। तीनों चांदपुर-बिजनौर रोड स्थित प्रकाश पाइप फैक्ट्री में मजदूरी करते थे। रोज की तरह तीनों रविवार की सुबह को भी एक ही बाइक से फैक्ट्री में काम पर जा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक करीब सवा आठ बजे गांव शाहपुर के पास सामने से आ रही धामपुर डिपो की रोडवेज बस उनकी बाइक से टकरा गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बाइक से टकराने के बाद भी बस चालक ने एकदम से ब्रेक नहीं लगाए और तीनों भाई बाइक के साथ बस के आगे काफी दूर तक घिसटते चले गए। लोकेंद्र, जिवेंद्र व राहुल तीनों भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक व परिचालक मौके पर बस छोड़कर भाग गए और यात्री भी चले गए। किसी ने परिजनों में सूचना दी। मौके पर कोहराम मच गया। वे शवों से लिपटकर बुरी तरह रोते रहे। तीनों भाइयों के शवों को देखकर वहां मौजूद लोगों के आंसू निकल आए। घटना से आक्रोशित गांववालों ने चांदपुर-बिजनौर मार्ग पर जाम लगा दिया। गांववालों का कहना था कि आए दिन सड़क पर हादसों में राहगीरों की जान जा रही है, लेकिन हादसों को रोकने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। गांववालों ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई व मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की। मौके पर पहुंची पुलिसकर्मी की जाम के दौरान गांववालों से नोकझोंक भी हुई। किसान यूनियन के डालचंद के नेतृत्व में किसान भी वहां पहुंच गए। गांववालों ने पोस्टमार्टम के लिए शवों को पुलिस को उठाने नहीं दिया।
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हादसे का पता चलते पर पूर्व राज्यमंत्री स्वामी ओमवेश, विधायक सुचि मौसम चौधरी के ससुर राजेंद्र सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व अवधेश मिश्रा, सीओ सिटी महेश कुमार, शहर कोतवाल बिजेंद्रपाल राणा भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने गांववालों को समझा बुझाकर करीब चार घंटे बाद किसी तरह जाम खुलवाया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजे। पिता चरण सिंह ने बताया कि बड़े पुत्र लोकेंद्र का रिश्ता तय हो चुका था। जल्दी ही उसकी शादी होनी थी।
हेलमेट लगाया होता तो बच जाती जान
तीनों भाई हेलमेट नहीं लगाते थे। हेलमेट लगाया होता तो शायद उनकी जान बच जाती। पुलिस के मुताबिक तीनों भाइयों के सिर में ही गंभीर चोट आई है। हेलमेट लगा होता तो सिर में चोट न लगती। पर तीनों में से किसी ने भी हेलमेट नहीं लगा रखा था। पुलिस की चेकिंग अभियान के बाद भी ट्रिपल राइडिंग नहीं रुक रही है। तीनों भाई सुबह-शाम एक ही बाइक पर सवार होकर जाते थे पर कभी किसी ने उन्हें नहीं रोका।
बुलेट से बचने में बिगड़ा संतुलन
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सामने से तेजी से आई बुलेट, बाइक से तीनों भायों की बाइक का संतुलन बिगड़ गया। उनकी बाइक सामने से आ रही रोडवेज बस में जा घुसी और तीनों भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई। बुलेट सामने से तेजी से न आती तो ये हादसा भी शायद न होता।
मकान बनाने का सपना टूटा
घर के पास पड़े के जमीन के टुकड़े में चरण सिंह मकान बनाने की तैयारी कर रहा था। इसलिए तीनों बेटे मेहनत मजदूरी करके पैसा कमाने में लगे थे। चरण सिंह का यह सपना तीनों बेटों की मौत के बाद अधूरा रह गया।
पलभर में बुझ गए परिवार के चिराग
बिजनौर में सिकंदरी गांव के चरण सिंह के परिवार का पलभर में ही चिराग बुझ गया। तीनों बेटे एक ही बाइक से रोजाना की तरह खुशी-खुशी फैक्ट्री जाने के लिए घर से निकले थे। तीनों भाइयों को क्या मालूम था कि घर से वे ऐसी मनहूस घड़ी पर निकल रहे हैं कि फिर लौटकर नहीं आएंगे। तीनों फैक्ट्री में मजदूरी करते थे। तीनों भाईयों की मौत से पूरा गांव गमजदा है। हर किसी को तीनों की मौत का बेहद दुख है।
किरतपुर थाने के गांव गोविंदपुर निवासी चरण सिंह करीब एक साल पहले अपने परिवार सहित हीमपुर थाना क्षेत्र के गांव सिकंदरी में आकर बसे थे। चरण सिंह का गांव में अभी मकान नहीं बना था। उसका परिवार उसके भाई तजेंद्र के घर में रह रहा था। चरण सिंह के तीनों बेटे लोकेंद्र, जिवेंदर व रोहित गांव में मकान बनाना चाहते थे। इसके लिए तीनों जीतोड़ मेहनत करते थे। तीनों रोज फैक्ट्री जाते थे। फैक्ट्री से एक दिन की भी छुट्टी नहीं करते थे। घर में मकान बनाने और बड़े भाई लोकेंद्र की शादी की ही बात होती थी। लोकेंद्र का रिश्ता दो माह पहले गांव हैवतपुर निवासी एक युवती से तय हो गया था।
कुछ दिनों बाद शादी की तारीख तय होनी थी। पूरा परिवार घर बनाने और शादी की तैयारी में लगा था। गांववालों के अनुसार यकीन नहीं हो रहा कि चरण सिंह के घर के तीनों चिराग एक साथ बुझ गए हैं। तीनों भाई एक साथ सुबह को घर से निकलते थे और शाम को घर आते थे। रविवार सुबह उन्हें क्या मालूम था कि रास्ते में मौत उनका इंतजार कर रही है।
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किरतपुर थाने के गांव गोविंदपुर निवासी चरण सिंह करीब एक साल पहले अपने परिवार सहित हीमपुर थाना क्षेत्र के गांव सिकंदरी में आकर बसे थे। उनके पांच बच्चों में तीन बेटे लोकेंद्र (23), जिवेंद्र (19) व रोहित (17) थे। तीनों बेटों में से किसी की भी शादी नहीं हुई थी। तीनों चांदपुर-बिजनौर रोड स्थित प्रकाश पाइप फैक्ट्री में मजदूरी करते थे। रोज की तरह तीनों रविवार की सुबह को भी एक ही बाइक से फैक्ट्री में काम पर जा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक करीब सवा आठ बजे गांव शाहपुर के पास सामने से आ रही धामपुर डिपो की रोडवेज बस उनकी बाइक से टकरा गई।
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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बाइक से टकराने के बाद भी बस चालक ने एकदम से ब्रेक नहीं लगाए और तीनों भाई बाइक के साथ बस के आगे काफी दूर तक घिसटते चले गए। लोकेंद्र, जिवेंद्र व राहुल तीनों भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक व परिचालक मौके पर बस छोड़कर भाग गए और यात्री भी चले गए। किसी ने परिजनों में सूचना दी। मौके पर कोहराम मच गया। वे शवों से लिपटकर बुरी तरह रोते रहे। तीनों भाइयों के शवों को देखकर वहां मौजूद लोगों के आंसू निकल आए। घटना से आक्रोशित गांववालों ने चांदपुर-बिजनौर मार्ग पर जाम लगा दिया। गांववालों का कहना था कि आए दिन सड़क पर हादसों में राहगीरों की जान जा रही है, लेकिन हादसों को रोकने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। गांववालों ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई व मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की। मौके पर पहुंची पुलिसकर्मी की जाम के दौरान गांववालों से नोकझोंक भी हुई। किसान यूनियन के डालचंद के नेतृत्व में किसान भी वहां पहुंच गए। गांववालों ने पोस्टमार्टम के लिए शवों को पुलिस को उठाने नहीं दिया।
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हादसे का पता चलते पर पूर्व राज्यमंत्री स्वामी ओमवेश, विधायक सुचि मौसम चौधरी के ससुर राजेंद्र सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व अवधेश मिश्रा, सीओ सिटी महेश कुमार, शहर कोतवाल बिजेंद्रपाल राणा भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने गांववालों को समझा बुझाकर करीब चार घंटे बाद किसी तरह जाम खुलवाया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजे। पिता चरण सिंह ने बताया कि बड़े पुत्र लोकेंद्र का रिश्ता तय हो चुका था। जल्दी ही उसकी शादी होनी थी।
हेलमेट लगाया होता तो बच जाती जान
तीनों भाई हेलमेट नहीं लगाते थे। हेलमेट लगाया होता तो शायद उनकी जान बच जाती। पुलिस के मुताबिक तीनों भाइयों के सिर में ही गंभीर चोट आई है। हेलमेट लगा होता तो सिर में चोट न लगती। पर तीनों में से किसी ने भी हेलमेट नहीं लगा रखा था। पुलिस की चेकिंग अभियान के बाद भी ट्रिपल राइडिंग नहीं रुक रही है। तीनों भाई सुबह-शाम एक ही बाइक पर सवार होकर जाते थे पर कभी किसी ने उन्हें नहीं रोका।
बुलेट से बचने में बिगड़ा संतुलन
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सामने से तेजी से आई बुलेट, बाइक से तीनों भायों की बाइक का संतुलन बिगड़ गया। उनकी बाइक सामने से आ रही रोडवेज बस में जा घुसी और तीनों भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई। बुलेट सामने से तेजी से न आती तो ये हादसा भी शायद न होता।
मकान बनाने का सपना टूटा
घर के पास पड़े के जमीन के टुकड़े में चरण सिंह मकान बनाने की तैयारी कर रहा था। इसलिए तीनों बेटे मेहनत मजदूरी करके पैसा कमाने में लगे थे। चरण सिंह का यह सपना तीनों बेटों की मौत के बाद अधूरा रह गया।
पलभर में बुझ गए परिवार के चिराग
बिजनौर में सिकंदरी गांव के चरण सिंह के परिवार का पलभर में ही चिराग बुझ गया। तीनों बेटे एक ही बाइक से रोजाना की तरह खुशी-खुशी फैक्ट्री जाने के लिए घर से निकले थे। तीनों भाइयों को क्या मालूम था कि घर से वे ऐसी मनहूस घड़ी पर निकल रहे हैं कि फिर लौटकर नहीं आएंगे। तीनों फैक्ट्री में मजदूरी करते थे। तीनों भाईयों की मौत से पूरा गांव गमजदा है। हर किसी को तीनों की मौत का बेहद दुख है।
किरतपुर थाने के गांव गोविंदपुर निवासी चरण सिंह करीब एक साल पहले अपने परिवार सहित हीमपुर थाना क्षेत्र के गांव सिकंदरी में आकर बसे थे। चरण सिंह का गांव में अभी मकान नहीं बना था। उसका परिवार उसके भाई तजेंद्र के घर में रह रहा था। चरण सिंह के तीनों बेटे लोकेंद्र, जिवेंदर व रोहित गांव में मकान बनाना चाहते थे। इसके लिए तीनों जीतोड़ मेहनत करते थे। तीनों रोज फैक्ट्री जाते थे। फैक्ट्री से एक दिन की भी छुट्टी नहीं करते थे। घर में मकान बनाने और बड़े भाई लोकेंद्र की शादी की ही बात होती थी। लोकेंद्र का रिश्ता दो माह पहले गांव हैवतपुर निवासी एक युवती से तय हो गया था।
कुछ दिनों बाद शादी की तारीख तय होनी थी। पूरा परिवार घर बनाने और शादी की तैयारी में लगा था। गांववालों के अनुसार यकीन नहीं हो रहा कि चरण सिंह के घर के तीनों चिराग एक साथ बुझ गए हैं। तीनों भाई एक साथ सुबह को घर से निकलते थे और शाम को घर आते थे। रविवार सुबह उन्हें क्या मालूम था कि रास्ते में मौत उनका इंतजार कर रही है।