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डीएपी के बाजार में हैं कई विकल्प
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डीएपी के बाजार में हैं कई विकल्प
बिजनौर। विदेशों से आवक रुकने की वजह से डीएपी की किल्लत बनी हुई है। बाजार में निजी दुकानों पर डीएपी का एक दाना भी नहीं है। लेकिन किसानों को डीएपी पर पूरी तरह आश्रित रहने की जरूरत नहीं है। बाजार में डीएपी के कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन किसानों को इसकी जानकारी नहीं है। कृषि विभाग किसानों को डीएपी के इन विकल्पों के बारे में जागरूक कर रहा है।
डीएपी फास्फेटिक उर्वरक होता है और इसमें मुख्य रूप से पोटाश होता है। यह पौधे के भोजन बनाने की प्रक्रिया में सहयोग करता है और पौधे का वजन बढ़ाने के साथ ही मजबूती प्रदान करता है। डीएपी मुख्य रूप से खाड़ी देशों से आता है। किन्हीं कारणों से खाड़ी देशों से डीएपी नहीं आ रहा है। डीएपी वैसे तो आलू वाले किसानों की प्रमुख मांग है, लेकिन काफी किसान गेहूं बोते समय भी खेतों में डीएपी डालते हैं। रबी सीजन की फसलों के लिए किसानों को मार्च 2022 तक 18 हजार 600 मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत है, जबकि इस समय सहकारी समितियों पर चार हजार मीट्रिक टन डीएपी भी उपलब्ध नहीं है।
डीएपी भले ही उपलब्ध न हो लेकिन डीएपी के काफी विकल्प बाजार में हैं। बाजार में प्रोम, एमओपी, एनपीके, एसएसपी खाद मौजूद हैं जिनमें पोटाश प्रचुर मात्रा में है। इनकी कीमत भी डीएपी से बहुत कम है। डीएपी की 50 किलोग्राम की बोरी की कीमत 1200 रुपये है, जबकि प्रोम की कीमत 800, एमओपी की कीमत 800, और एसएसपी की कीमत 750 रुपये प्रति बोरी है। प्रोम निजी दुकानों पर मिलता है जबकि एमओपी और एसएसपी सहकारी समितियों पर भी मिल जाते हैं। इनमें एनपीके ही सबसे महंगा है, इसकी कीमत 1200 से 1450 रुपये प्रति बोरी तक है।
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बाजार में इतना खाद है उपलब्ध
बाजार में वर्तमान समय में तीन हजार मीट्रिक टन डीएपी, दो हजार मीट्रिक टन प्रोम, 250 मीट्रिक टन एमओपी, करीब छह हजार मीट्रिक टन एनपीके और 700 मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है। इन खाद की रैक के लिए शासन से मांग भी की गई है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र के अनुसार बाजार में डीएपी के काफी विकल्प मौजूद हैं। किसानों को इनकी जानकारी नहीं है। इन फास्फेटिक उर्वरकों की मांग की जा रही है। किसानों को पोटाश की कमी नहीं होने दी जाएगी।
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बिजनौर। विदेशों से आवक रुकने की वजह से डीएपी की किल्लत बनी हुई है। बाजार में निजी दुकानों पर डीएपी का एक दाना भी नहीं है। लेकिन किसानों को डीएपी पर पूरी तरह आश्रित रहने की जरूरत नहीं है। बाजार में डीएपी के कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन किसानों को इसकी जानकारी नहीं है। कृषि विभाग किसानों को डीएपी के इन विकल्पों के बारे में जागरूक कर रहा है।
डीएपी फास्फेटिक उर्वरक होता है और इसमें मुख्य रूप से पोटाश होता है। यह पौधे के भोजन बनाने की प्रक्रिया में सहयोग करता है और पौधे का वजन बढ़ाने के साथ ही मजबूती प्रदान करता है। डीएपी मुख्य रूप से खाड़ी देशों से आता है। किन्हीं कारणों से खाड़ी देशों से डीएपी नहीं आ रहा है। डीएपी वैसे तो आलू वाले किसानों की प्रमुख मांग है, लेकिन काफी किसान गेहूं बोते समय भी खेतों में डीएपी डालते हैं। रबी सीजन की फसलों के लिए किसानों को मार्च 2022 तक 18 हजार 600 मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत है, जबकि इस समय सहकारी समितियों पर चार हजार मीट्रिक टन डीएपी भी उपलब्ध नहीं है।
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डीएपी भले ही उपलब्ध न हो लेकिन डीएपी के काफी विकल्प बाजार में हैं। बाजार में प्रोम, एमओपी, एनपीके, एसएसपी खाद मौजूद हैं जिनमें पोटाश प्रचुर मात्रा में है। इनकी कीमत भी डीएपी से बहुत कम है। डीएपी की 50 किलोग्राम की बोरी की कीमत 1200 रुपये है, जबकि प्रोम की कीमत 800, एमओपी की कीमत 800, और एसएसपी की कीमत 750 रुपये प्रति बोरी है। प्रोम निजी दुकानों पर मिलता है जबकि एमओपी और एसएसपी सहकारी समितियों पर भी मिल जाते हैं। इनमें एनपीके ही सबसे महंगा है, इसकी कीमत 1200 से 1450 रुपये प्रति बोरी तक है।
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बाजार में इतना खाद है उपलब्ध
बाजार में वर्तमान समय में तीन हजार मीट्रिक टन डीएपी, दो हजार मीट्रिक टन प्रोम, 250 मीट्रिक टन एमओपी, करीब छह हजार मीट्रिक टन एनपीके और 700 मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है। इन खाद की रैक के लिए शासन से मांग भी की गई है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र के अनुसार बाजार में डीएपी के काफी विकल्प मौजूद हैं। किसानों को इनकी जानकारी नहीं है। इन फास्फेटिक उर्वरकों की मांग की जा रही है। किसानों को पोटाश की कमी नहीं होने दी जाएगी।