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कोरोनाकाल में थम गया मिट्टी की जांच का काम
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बिजनौर। मिट्टी की सेहत की जांच के लिए चलाए जा रहे मृदा परीक्षण अभियान को कोरोना संक्रमण का ग्रहण लग गया है। लगातार दूसरे साल मिट्टी की जांच के लिए जिला प्रशासन को कोई लक्ष्य नहीं दिया गया है। मिट्टी की जांच का काम एकदम रुक गया है। अब केवल किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच ही हो रही है जो खुद अपने खेत से मिट्टी के नमूने ले जाते हैं।
केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री मृदा स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम भी इन योजनाओं में से एक है। इस योजना में ब्लॉक वार किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच होती है। देखा जाता है कि मिट्टी में किन-किन पोषक तत्वों की कमी है। किसान आमतौर पर एक ही तरह का खाद खेतों में डालते हैं, लेकिन खेत में किस पोषक तत्व की कमी है ये किसान को पता नहीं होता है। खेत में ज्यादा खाद डालने से किसान की लागत बढ़ती है इसके बाद भी किसान को पैदावार में अपेक्षित वृद्धि नहीं मिलती है। मिट्टी की जांच होने पर किसान को पोषक तत्वों की कमी के बारे में पता चल जाता है और वह इसी हिसाब से खेतों में फिर खाद डालता है। मिट्टी की जांच के लिए पुरानी तहसील में लैब बनाई गई है। जांच के लिए कृषि विभाग को हर साल शासन की ओर से लक्ष्य दिया जाता था लेकिन पिछले वित्तीय वर्ष में कोरोना की वजह से मिट्टी की जांच नहीं हो पाई। इस बार भी यही परिस्थिति बन गई है। मिट्टी की जांच के लिए शासन से कोई लक्ष्य नहीं दिया गया है। केवल गोष्ठियों के माध्यम से ही किसानों को जागरूक करने की बात कही जा रही है।
कोरोना से काम प्रभावित
जिला कृषि अधिकारी डा.अवधेश मिश्रा के अनुसार कारोना की वजह से काफी काम प्रभावित हुआ है। मृदा परीक्षण के लिए शासन से कोई लक्ष्य नहीं मिला है। लक्ष्य मिलने पर मिट्टी की जांच का काम फिर से शुरू किया जाएगा।
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केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री मृदा स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम भी इन योजनाओं में से एक है। इस योजना में ब्लॉक वार किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच होती है। देखा जाता है कि मिट्टी में किन-किन पोषक तत्वों की कमी है। किसान आमतौर पर एक ही तरह का खाद खेतों में डालते हैं, लेकिन खेत में किस पोषक तत्व की कमी है ये किसान को पता नहीं होता है। खेत में ज्यादा खाद डालने से किसान की लागत बढ़ती है इसके बाद भी किसान को पैदावार में अपेक्षित वृद्धि नहीं मिलती है। मिट्टी की जांच होने पर किसान को पोषक तत्वों की कमी के बारे में पता चल जाता है और वह इसी हिसाब से खेतों में फिर खाद डालता है। मिट्टी की जांच के लिए पुरानी तहसील में लैब बनाई गई है। जांच के लिए कृषि विभाग को हर साल शासन की ओर से लक्ष्य दिया जाता था लेकिन पिछले वित्तीय वर्ष में कोरोना की वजह से मिट्टी की जांच नहीं हो पाई। इस बार भी यही परिस्थिति बन गई है। मिट्टी की जांच के लिए शासन से कोई लक्ष्य नहीं दिया गया है। केवल गोष्ठियों के माध्यम से ही किसानों को जागरूक करने की बात कही जा रही है।
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कोरोना से काम प्रभावित
जिला कृषि अधिकारी डा.अवधेश मिश्रा के अनुसार कारोना की वजह से काफी काम प्रभावित हुआ है। मृदा परीक्षण के लिए शासन से कोई लक्ष्य नहीं मिला है। लक्ष्य मिलने पर मिट्टी की जांच का काम फिर से शुरू किया जाएगा।
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