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पहाड़ों पर बारिश से बढ़ा गंगा का जलस्तर
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Sun, 12 Jun 2016 12:32 AM IST
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पहाड़ों की बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद भी जान हथेली पर रखकर गंगा पार करते डेबलगढ़ के किसान।
- फोटो : विपिन कुमार
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बिजनौर/मंडावर में पहाड़ों पर हो रही बारिश ने गंगा का जलस्तर बढ़ा दिया है। गंगा के तटीय गांवों में बसे किसान अपनी जान हथेली पर रखकर गंगा को पार कर रहे हैं। जलस्तर बढ़ने से पलेज की फसल भी बर्बाद हो गई है।
एक सप्ताह पहले तक गंगा की धारा सिमट कर रह गई थी। पलेजियों ने भी इस बार गंगा की धारा में दूर तक पलेज लगाई। हालांकि बीते सप्ताह पहाड़ों पर हुई बारिश ने गंगा के सूखे धारा क्षेत्र को फिर से पानी से लबालब कर दिया है। जलस्तर बढ़ते ही सीमली, बादशाहपुर, कुंदनपुर टीप, डैबलगढ़, राजारामपुर, रघुनाथपुर, चाहड़वाला आदि गांवों के किसानों की समस्या भी बढ़ गई है। इन गांवों के किसानों के खेत गंगा पार हैं और दूसरी ओर जाने के लिए कोई पुल तक नहीं है। ये पैदल ही गंगा पार करके या नाव के सहारे अपनी खेती कर परिवार का पेट पाल रहे हैं। नाव के सहारे ही ये अपने पशुओं के लिए चारा आदि लाते हैं।
कई बार इन किसानों और परिजनों के साथ जानलेवा हादसे भी होते हैं, लेकिन नियति के हाथों बंधे ये किसान जान हथेली पर रखकर गंगा पार खेती करने जाते हैं। प्रशासनिक अधिकारी और नेता बाढ़ आने पर ही गांवों का रुख करते हैं और मदद का आश्वासन देता है। हालांकि उनके वादे ओस की तरह हवा हो जाते हैं।
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एक सप्ताह पहले तक गंगा की धारा सिमट कर रह गई थी। पलेजियों ने भी इस बार गंगा की धारा में दूर तक पलेज लगाई। हालांकि बीते सप्ताह पहाड़ों पर हुई बारिश ने गंगा के सूखे धारा क्षेत्र को फिर से पानी से लबालब कर दिया है। जलस्तर बढ़ते ही सीमली, बादशाहपुर, कुंदनपुर टीप, डैबलगढ़, राजारामपुर, रघुनाथपुर, चाहड़वाला आदि गांवों के किसानों की समस्या भी बढ़ गई है। इन गांवों के किसानों के खेत गंगा पार हैं और दूसरी ओर जाने के लिए कोई पुल तक नहीं है। ये पैदल ही गंगा पार करके या नाव के सहारे अपनी खेती कर परिवार का पेट पाल रहे हैं। नाव के सहारे ही ये अपने पशुओं के लिए चारा आदि लाते हैं।
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कई बार इन किसानों और परिजनों के साथ जानलेवा हादसे भी होते हैं, लेकिन नियति के हाथों बंधे ये किसान जान हथेली पर रखकर गंगा पार खेती करने जाते हैं। प्रशासनिक अधिकारी और नेता बाढ़ आने पर ही गांवों का रुख करते हैं और मदद का आश्वासन देता है। हालांकि उनके वादे ओस की तरह हवा हो जाते हैं।
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