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दहेज अभिशाप व विक्षिप्त मानसिकता का प्रतीक

Fri, 05 Mar 2021 11:10 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 05 Mar 2021 11:10 PM IST
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The symbol of dowry curse and deranged mentality
दहेज अभिशाप व विक्षिप्त मानसिकता का प्रतीक
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नींदडू़। शुक्रवार को जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती मुजम्मिल हुसैन ने जुमे की नमाज से पूर्व तकरीर में युवाओं का आह्वान करते हुए उनसे दहेज स्वीकार नहीं करने का आग्रह किया।
मुफ्ती ने गुजरात के अहमदाबाद में शादी के बाद दहेज की मांग के कारण आयशा नामक युवती द्वारा नदी में साबरमती नदी में कूद कर आत्महत्या करने पर अफसोस जताया। उन्होंने दहेज को अभिशाप और विक्षिप्त मानसिकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि अल्लाह और उसके रसूल को सादे तरीके पर किया गया निकाह पसंद है। निकाह के बाद लड़के वाले की ओर से देय वलीमे की दावत में रिश्तेदार व मोहल्ले वालों को शामिल करना सुन्नत है। इस्लाम में फिजूलखर्ची और झूठी शान दिखाने के नाम पर रुपये की बर्बादी को नापसंद किया गया है।
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उन्होंने नौजवानों से कहा कि वह अपने माता-पिता से सादा निकाह करने को कहें। लड़की वालों की ओर से सामान, नगदी या गिफ्ट भी कुबूल न करें। दहेज की लानत के चलते समाज में बड़ी तादाद में लड़कियां बिना निकाह के बैठी हुई हैं और गलत कदम उठाने पर बाध्य हैं। युवा समाज द्वारा दहेज न लेकर उन्हें आत्महत्या जैसा घातक कदम उठाने से रोका जा सकता है।
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