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विकास के नाम पर मिली तसलीम को जीत
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विकास के नाम पर मिली तसलीम को जीत
नजीबाबाद। तीसरी बार विधायक बने हाजी तसलीम अहमद ने अपनों की नाराजगी की विषम चुनौतियों के बीच चुनाव जीता। सपा-रालोद गठबंधन से चुनाव मैदान में उतरे तसलीम अहमद को काफी विलंब से टिकट मिला। समय कम होने के बावजूद उन्होंने क्षेत्र के बहुमुखी विकास के साथ खस्ताहाल संपर्क मार्ग, पुल आदि निर्माण को चुनावी मुद्दा बनाया। समाजवादी पार्टी के अधिकांश नेताओं ने तसलीम अहमद से चुनाव में किनारा रखा। चंद सपा नेताओं, रालोद, किसान नेताओं और समर्थकों के साथ तसलीम अहमद ने जनता के बीच रहकर उनकी आवाज बनने के प्रति आश्वस्त किया।
क्षेत्रीय किसानों के साथ रालोद के समर्थन को तसलीम अहमद की भारी जीत में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तसलीम अहमद जब बसपा से पहली बार वर्ष 2012 में विधायक बने थे तब बसपा सत्ता में नहीं आ सकी थी। वर्ष 2017 में तसलीम अहमद सपा से चुनाव जीते तब भाजपा की सरकार बनी। दोनों विधानसभा चुनाव जीतने के बाद तसलीम अहमद को विपक्ष में रहना पड़ा था।
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नजीबाबाद। तीसरी बार विधायक बने हाजी तसलीम अहमद ने अपनों की नाराजगी की विषम चुनौतियों के बीच चुनाव जीता। सपा-रालोद गठबंधन से चुनाव मैदान में उतरे तसलीम अहमद को काफी विलंब से टिकट मिला। समय कम होने के बावजूद उन्होंने क्षेत्र के बहुमुखी विकास के साथ खस्ताहाल संपर्क मार्ग, पुल आदि निर्माण को चुनावी मुद्दा बनाया। समाजवादी पार्टी के अधिकांश नेताओं ने तसलीम अहमद से चुनाव में किनारा रखा। चंद सपा नेताओं, रालोद, किसान नेताओं और समर्थकों के साथ तसलीम अहमद ने जनता के बीच रहकर उनकी आवाज बनने के प्रति आश्वस्त किया।
क्षेत्रीय किसानों के साथ रालोद के समर्थन को तसलीम अहमद की भारी जीत में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तसलीम अहमद जब बसपा से पहली बार वर्ष 2012 में विधायक बने थे तब बसपा सत्ता में नहीं आ सकी थी। वर्ष 2017 में तसलीम अहमद सपा से चुनाव जीते तब भाजपा की सरकार बनी। दोनों विधानसभा चुनाव जीतने के बाद तसलीम अहमद को विपक्ष में रहना पड़ा था।
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