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जिले में नहीं रुक रहा बुखार से मौतों का सिलसिला
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जिले में नहीं रुक रहा बुखार से मौतों का सिलसिला
बिजनौर। लाख कोशिशों के बावजूद भी जिले में बुखार से होने वाली मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के चलते बुखार से होने वाली मौतों का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है। अकेले अक्तूबर में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत इसकी गवाही दे रही है। शनिवार को भी मंडावर क्षेत्र में एक वृद्ध की डेंगू से भी मौत हो चुकी है। बुखार स्वास्थ्य विभाग के इंतजाम की पोल खोल रहा है। जिला अस्पताल में रोजाना बुखार के मरीजों के भर्ती होने वाली संख्या में इजाफा हो रहा है। रविवार को भी जिला अस्पताल में बुखार से पीड़ित करीब 20 मरीज भर्ती हुए।
जिले में बुखार लोगों पर कहर बनकर टूट रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग बुखार के कहर पर रोक लगाने में नाकाम साबित हुआ है। अकेले अक्तूबर में ही दर्जन से अधिक लोग बुखार की भेंट चढ़े हैं। इसका कारण जागरूकता और साफ सफाई का अभाव है। देहात क्षेत्रों में तो साफ सफाई की स्थिति बेहद ही दयनीय है। कहीं पर पानी का ठहराव है तो कहीं पर गंदगी के अंबार लगे हैं। शासन के निर्देश पर दो से 30 सितंबर पर संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया गया। देहात क्षेत्रों में इसका असर नहीं दिखाई दिया। गांवों में छिड़काव कराने के नाम पर महज खाना पूर्ति की गई। कहने को जिले की सभी 1128 ग्राम पंचायतों में कीटनाशक का छिड़काव कराया गया, लेकिन यह धरातल पर कहीं नजर नहीं आया। लोगों का आरोप है कि कुल ग्राम पंचायतों की अपेक्षा इसकी चौथाई संख्या में भी छिड़काव नहीं कराया गया। सीएमओ डाक्टर विजय कुमार यादव ने बताया कि किसी भी प्रकार के बुखार से त्वरित मौत नहीं हो सकती। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए जिले के हर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों तथा दवाओं की उपलब्धता है। बुखार आने पर घबराएं नहीं अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर जांच कराकर उपचार कराएं।
रविवार को ये लोग हुए अस्पताल में भर्ती
बिजनौर। चिकित्सकों के अनुसार रविवार को जिला अस्पताल में नवनीत कुमार, मो. असलम, शबनूर खातून, रजिया, हेमलता, शकुंतला देवी, शिवानी चौधरी, आकाश कुमार, नीरज वर्मा, आशुतोष चौधरी, यशपाल सिंह, अनिमेष सक्सेना, जुबैदा, वीरेश कुमार आदि समेत करीब 20 लोग बुखार से पीड़ित मरीज जिला अस्पताल में भर्ती हुए। जिला अस्पताल में रोजाना भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
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अक्तूबर में बुखार से इन लोगों की हुई मौत
बिजनौर। केवल अक्तूबर में नांगल सोती निवासी आयशा, राजा का ताजपुर के अरशद, शहनाज, महेशपुर खेड़ी की पवित्रा, किरतपुर के मोहल्ला भुड्डी निवासी गुलनाज, मंडावर क्षेत्र के गांव काजीवाला निवासी विकास, हरफूल, मंडावर के असगर, यूसुफ की बुखार से मौत हो चुकी है। जबकि शनिवार को गांव डैबलगढ़ निवासी वृद्ध लायकराम की डेंगू से मौत होने की पुष्टि हुई।
33 में हो चुकी है डेंगू की पुष्टि
बिजनौर। जिला अस्पताल की लैब में 31 मरीजों के डेंगू पॉजिटिव होने की पहले ही पुष्टि हो चुकी थी। डेंगू पॉजिटिव दो मरीज कल ही भर्ती हुए थे। सरकारी आंकड़ों के हिसाब से कुल मिलाकर डेंगू के मरीजों की संख्या 33 है, जबकि प्राइवेट लैब की रिपोर्ट पर नजर डाली जाए तो यह आंकड़ा सैकड़ों के भी पार निकलेगा। शनिवार को डेंगू से पीड़ित एक मरीज की मौत भी हो चुकी है।
51 मिल चुके हैं मलेरिया के मरीज
बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बया करते हैं कि जिले में कुल 51 लोगों को मलेरिया पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई, जबकि निजी लैबों से मलेरिया पॉजिटिव रोगियों की संख्या इससे कहीं अधिक निकलेगी। नाम न छापने की शर्त पर कुछ लैब संचालकों ने बताया कि डेंगू और मलेरिया पॉजिटिव बताने पर उच्च अधिकारियों की ओर सख्त मनाही है।
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बिजनौर। लाख कोशिशों के बावजूद भी जिले में बुखार से होने वाली मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के चलते बुखार से होने वाली मौतों का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है। अकेले अक्तूबर में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत इसकी गवाही दे रही है। शनिवार को भी मंडावर क्षेत्र में एक वृद्ध की डेंगू से भी मौत हो चुकी है। बुखार स्वास्थ्य विभाग के इंतजाम की पोल खोल रहा है। जिला अस्पताल में रोजाना बुखार के मरीजों के भर्ती होने वाली संख्या में इजाफा हो रहा है। रविवार को भी जिला अस्पताल में बुखार से पीड़ित करीब 20 मरीज भर्ती हुए।
जिले में बुखार लोगों पर कहर बनकर टूट रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग बुखार के कहर पर रोक लगाने में नाकाम साबित हुआ है। अकेले अक्तूबर में ही दर्जन से अधिक लोग बुखार की भेंट चढ़े हैं। इसका कारण जागरूकता और साफ सफाई का अभाव है। देहात क्षेत्रों में तो साफ सफाई की स्थिति बेहद ही दयनीय है। कहीं पर पानी का ठहराव है तो कहीं पर गंदगी के अंबार लगे हैं। शासन के निर्देश पर दो से 30 सितंबर पर संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया गया। देहात क्षेत्रों में इसका असर नहीं दिखाई दिया। गांवों में छिड़काव कराने के नाम पर महज खाना पूर्ति की गई। कहने को जिले की सभी 1128 ग्राम पंचायतों में कीटनाशक का छिड़काव कराया गया, लेकिन यह धरातल पर कहीं नजर नहीं आया। लोगों का आरोप है कि कुल ग्राम पंचायतों की अपेक्षा इसकी चौथाई संख्या में भी छिड़काव नहीं कराया गया। सीएमओ डाक्टर विजय कुमार यादव ने बताया कि किसी भी प्रकार के बुखार से त्वरित मौत नहीं हो सकती। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए जिले के हर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों तथा दवाओं की उपलब्धता है। बुखार आने पर घबराएं नहीं अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर जांच कराकर उपचार कराएं।
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रविवार को ये लोग हुए अस्पताल में भर्ती
बिजनौर। चिकित्सकों के अनुसार रविवार को जिला अस्पताल में नवनीत कुमार, मो. असलम, शबनूर खातून, रजिया, हेमलता, शकुंतला देवी, शिवानी चौधरी, आकाश कुमार, नीरज वर्मा, आशुतोष चौधरी, यशपाल सिंह, अनिमेष सक्सेना, जुबैदा, वीरेश कुमार आदि समेत करीब 20 लोग बुखार से पीड़ित मरीज जिला अस्पताल में भर्ती हुए। जिला अस्पताल में रोजाना भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
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अक्तूबर में बुखार से इन लोगों की हुई मौत
बिजनौर। केवल अक्तूबर में नांगल सोती निवासी आयशा, राजा का ताजपुर के अरशद, शहनाज, महेशपुर खेड़ी की पवित्रा, किरतपुर के मोहल्ला भुड्डी निवासी गुलनाज, मंडावर क्षेत्र के गांव काजीवाला निवासी विकास, हरफूल, मंडावर के असगर, यूसुफ की बुखार से मौत हो चुकी है। जबकि शनिवार को गांव डैबलगढ़ निवासी वृद्ध लायकराम की डेंगू से मौत होने की पुष्टि हुई।
33 में हो चुकी है डेंगू की पुष्टि
बिजनौर। जिला अस्पताल की लैब में 31 मरीजों के डेंगू पॉजिटिव होने की पहले ही पुष्टि हो चुकी थी। डेंगू पॉजिटिव दो मरीज कल ही भर्ती हुए थे। सरकारी आंकड़ों के हिसाब से कुल मिलाकर डेंगू के मरीजों की संख्या 33 है, जबकि प्राइवेट लैब की रिपोर्ट पर नजर डाली जाए तो यह आंकड़ा सैकड़ों के भी पार निकलेगा। शनिवार को डेंगू से पीड़ित एक मरीज की मौत भी हो चुकी है।
51 मिल चुके हैं मलेरिया के मरीज
बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बया करते हैं कि जिले में कुल 51 लोगों को मलेरिया पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई, जबकि निजी लैबों से मलेरिया पॉजिटिव रोगियों की संख्या इससे कहीं अधिक निकलेगी। नाम न छापने की शर्त पर कुछ लैब संचालकों ने बताया कि डेंगू और मलेरिया पॉजिटिव बताने पर उच्च अधिकारियों की ओर सख्त मनाही है।