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संस्कृत विद्यालय के दिन बहुरेंगे
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चांदपुर के संस्कृत विद्यालय के दिन बहुरेंगे
बिजनौर। सूबे के बजट से संस्कृत विद्यालयों के दिन बहुरेंगे। बजट में संस्कृत विद्यालयों को गुरुकुल पद्धति की तर्ज पर चलाया जाना प्रस्तावित है। जिले में चांदपुर में मात्र एक संस्कृत विद्यालय संचालित हैं।
बजट में संस्कृत विद्यालयों को गुरुकुल पद्धति की तर्ज पर चलाने की बात कही गई है। कहा गया है कि संस्कृत विद्यालयों में अध्ययनरत निर्धन विद्यार्थियों को नि:शुल्क आवासीय व भोजन की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए बजट में 120 करोड़ धनराशि की व्यवस्था की गई है। जिले में एक मात्र श्री बिहारी संस्कृत विद्यालय चांदपुर में संचालित हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. सतीश बाबू पाठक ने बताया कि विद्यालय वर्ष 1932 से संचालित हैं। तभी से कक्षा नौ से बीए तक की पढ़ाई हो रही है। वर्ष 1991 में एमए की कक्षाओं की मान्यता मिली है। बताया कि वर्ष 2002 में यूपी माध्यमिक संस्कृत बोर्ड का गठन हुआ था। उसके बाद से कक्षा नौ से बारह तक की तथा बीए व एमए की कक्षाएं अलग-अलग संचालित हैं। दोनों के अलग परिसर हैं। विद्यालय बारहवीं तक शासकीय सहायता प्राप्त है। कक्षा नौ से बारह तक 65 छात्र पढ़ते हैं। बीए व एमए में 35 छात्र पढ़ रहे हैं। निर्धन छात्रों को नि:शुल्क आवासीय व भोजन की सुविधा उपलब्ध कराना प्रशंसनीय निर्णय है। इससे छात्र संस्कृत भाषा की शिक्षा ग्रहण करने में रुचि लेंगे। विद्यालय के प्रबंधक डॉ. कपिल शर्मा ने बताया कि इससे संस्कृत और आवासीय विद्यालयों की स्थिति में सुुधार आएगा।
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बिजनौर। सूबे के बजट से संस्कृत विद्यालयों के दिन बहुरेंगे। बजट में संस्कृत विद्यालयों को गुरुकुल पद्धति की तर्ज पर चलाया जाना प्रस्तावित है। जिले में चांदपुर में मात्र एक संस्कृत विद्यालय संचालित हैं।
बजट में संस्कृत विद्यालयों को गुरुकुल पद्धति की तर्ज पर चलाने की बात कही गई है। कहा गया है कि संस्कृत विद्यालयों में अध्ययनरत निर्धन विद्यार्थियों को नि:शुल्क आवासीय व भोजन की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए बजट में 120 करोड़ धनराशि की व्यवस्था की गई है। जिले में एक मात्र श्री बिहारी संस्कृत विद्यालय चांदपुर में संचालित हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. सतीश बाबू पाठक ने बताया कि विद्यालय वर्ष 1932 से संचालित हैं। तभी से कक्षा नौ से बीए तक की पढ़ाई हो रही है। वर्ष 1991 में एमए की कक्षाओं की मान्यता मिली है। बताया कि वर्ष 2002 में यूपी माध्यमिक संस्कृत बोर्ड का गठन हुआ था। उसके बाद से कक्षा नौ से बारह तक की तथा बीए व एमए की कक्षाएं अलग-अलग संचालित हैं। दोनों के अलग परिसर हैं। विद्यालय बारहवीं तक शासकीय सहायता प्राप्त है। कक्षा नौ से बारह तक 65 छात्र पढ़ते हैं। बीए व एमए में 35 छात्र पढ़ रहे हैं। निर्धन छात्रों को नि:शुल्क आवासीय व भोजन की सुविधा उपलब्ध कराना प्रशंसनीय निर्णय है। इससे छात्र संस्कृत भाषा की शिक्षा ग्रहण करने में रुचि लेंगे। विद्यालय के प्रबंधक डॉ. कपिल शर्मा ने बताया कि इससे संस्कृत और आवासीय विद्यालयों की स्थिति में सुुधार आएगा।
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