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बिजनौर: बिजनौर - छह दिन बाद खुला पीपे के पुल पर जाने वाला रास्ता
Sun, 12 Feb 2023 11:18 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sun, 12 Feb 2023 11:18 PM IST
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मंडावर क्षेत्र के डैबलगढ़ में गंगा पर पीपे के पुल के पास छोटे पुल के खोले गए स्लैब।
- पीपे के पुल के पास एक छोटे पुल को कर दिया गया था बंद
- ठेकेदार पर क्षेत्रीय ग्रामीणों ने लगाया था अवैध वसूली का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
फोटो-32, 33
बिजनौर/चंदक। आखिरकार छह दिनों के बाद गंगा नदी पर पीपे की पुल की तरफ जाने वाला रास्ता खुल गया। दरअसल, पीपे के पुल के पास इस रास्ते में एक छोटे पुल के लकड़ी के स्लैब खोलकर रख दिए गए थे। ग्रामीणों ने ठेकेदार पर अवैध वसूली का आरोप लगाया था। जिसे लेकर उस वक्त ठेकेदार और ग्रामीणों के बीच हुआ विवाद थाने तक पहुंच गया था।
रविवार को पीपे की तरफ जाने वाले रास्ते से यातायात चालू हो गया। पिछले छह दिनों से इस रास्ते में एक छोटे पुल पर लकड़ी के स्लैब हटा दिए गए थे, जिससे 12 गांवों के लोग पीपे के पुल तक नहीं पहुंच पा रहे थे। केवल तीन गांव के लोग ही पीपे के पुल से आवाजाही कर पा रहे थे। लोगों का आरोप था कि ठेकेदार ने अवैध वसूली के फेर में इस छोटे पुल के स्लैब हटा दिए थे और बहाना बना दिया था नट बोल्ट खराब होने का। बता दें कि पीपे के पुल से दर्जनभर से अधिक गांव अपने खेतों पर जाने के लिए गंगा पार करते हैं। किसानों की मांग और गंगा पार करने के दौरान हादसों से बचाने के लिए पिछले कुछ वर्षों से मंडावर खादर क्षेत्र के ग्राम राजारामपुर के सामने सरकार की ओर से गंगा पर अस्थायी रूप से पीपे के पुल का निर्माण कराया था।
हालांकि बरसात के समय इस पुल हो हटा लिया जाता है। बरसात के बाद उक्त पुल को दोबारा किसानों के आवागमन के लिए लगा दिया जाता है। अब छह फरवरी को भी पुल की देखरेख में लगे कर्मियों का विवाद किसानों से हो गया था। चाहड़वाला के किसान कावेंद्र और शिवकुमार ने आरोप लगाया कि किसानों से अवैध वसूली की जाती है। उनका आरोप है कि पैसे को लेकर ही विवाद हुआ था। जिसके बाद किसानों ने थाना मंडावर में शिकायत दर्ज कराई। थाना पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाकर मामले का पटाक्षेप कर दिया था। थाने पहुंचे विवाद के बाद ही छोटे पुल के स्लैब हटाए गए थे। अब छह दिन बाद ठेकेदार द्वारा पुल की दूसरी पुलिया पर स्लैब रखकर पुल को दोबारा से खोल दिया है।
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वर्जन-- -
कुछ ग्रामीणों के साथ ठेकेदार का विवाद थाने पहुंचा था, उस वक्त मामले का निपटारा करा दिया था। पुल के नट टूटने की वजह से बंद कराने की जानकारी मिली थी - संजय कुमार, थानाध्यक्ष
पुल से गुजरने के लिए किसी से कोई पैसा नहीं लिया जाता है। मरम्मत आदि के लिए विभाग बजट जारी करता है। ओवरलोड को लेकर विवाद हो जाते हैं, क्योंकि सुरक्षित यातायात के लिए मापदंड तय हैं। केवल तीस क्विंटल ही वजन पुल से ले जाया जा सकता है। ओवर लोड से मना करने पर ही विवाद हुआ होगा - शादाब राव खान, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
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- ठेकेदार पर क्षेत्रीय ग्रामीणों ने लगाया था अवैध वसूली का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
फोटो-32, 33
बिजनौर/चंदक। आखिरकार छह दिनों के बाद गंगा नदी पर पीपे की पुल की तरफ जाने वाला रास्ता खुल गया। दरअसल, पीपे के पुल के पास इस रास्ते में एक छोटे पुल के लकड़ी के स्लैब खोलकर रख दिए गए थे। ग्रामीणों ने ठेकेदार पर अवैध वसूली का आरोप लगाया था। जिसे लेकर उस वक्त ठेकेदार और ग्रामीणों के बीच हुआ विवाद थाने तक पहुंच गया था।
रविवार को पीपे की तरफ जाने वाले रास्ते से यातायात चालू हो गया। पिछले छह दिनों से इस रास्ते में एक छोटे पुल पर लकड़ी के स्लैब हटा दिए गए थे, जिससे 12 गांवों के लोग पीपे के पुल तक नहीं पहुंच पा रहे थे। केवल तीन गांव के लोग ही पीपे के पुल से आवाजाही कर पा रहे थे। लोगों का आरोप था कि ठेकेदार ने अवैध वसूली के फेर में इस छोटे पुल के स्लैब हटा दिए थे और बहाना बना दिया था नट बोल्ट खराब होने का। बता दें कि पीपे के पुल से दर्जनभर से अधिक गांव अपने खेतों पर जाने के लिए गंगा पार करते हैं। किसानों की मांग और गंगा पार करने के दौरान हादसों से बचाने के लिए पिछले कुछ वर्षों से मंडावर खादर क्षेत्र के ग्राम राजारामपुर के सामने सरकार की ओर से गंगा पर अस्थायी रूप से पीपे के पुल का निर्माण कराया था।
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हालांकि बरसात के समय इस पुल हो हटा लिया जाता है। बरसात के बाद उक्त पुल को दोबारा किसानों के आवागमन के लिए लगा दिया जाता है। अब छह फरवरी को भी पुल की देखरेख में लगे कर्मियों का विवाद किसानों से हो गया था। चाहड़वाला के किसान कावेंद्र और शिवकुमार ने आरोप लगाया कि किसानों से अवैध वसूली की जाती है। उनका आरोप है कि पैसे को लेकर ही विवाद हुआ था। जिसके बाद किसानों ने थाना मंडावर में शिकायत दर्ज कराई। थाना पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाकर मामले का पटाक्षेप कर दिया था। थाने पहुंचे विवाद के बाद ही छोटे पुल के स्लैब हटाए गए थे। अब छह दिन बाद ठेकेदार द्वारा पुल की दूसरी पुलिया पर स्लैब रखकर पुल को दोबारा से खोल दिया है।
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कुछ ग्रामीणों के साथ ठेकेदार का विवाद थाने पहुंचा था, उस वक्त मामले का निपटारा करा दिया था। पुल के नट टूटने की वजह से बंद कराने की जानकारी मिली थी - संजय कुमार, थानाध्यक्ष
पुल से गुजरने के लिए किसी से कोई पैसा नहीं लिया जाता है। मरम्मत आदि के लिए विभाग बजट जारी करता है। ओवरलोड को लेकर विवाद हो जाते हैं, क्योंकि सुरक्षित यातायात के लिए मापदंड तय हैं। केवल तीस क्विंटल ही वजन पुल से ले जाया जा सकता है। ओवर लोड से मना करने पर ही विवाद हुआ होगा - शादाब राव खान, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग