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बदहाल है सड़क, 40 मिनट में तय हो रहा नौ किमी का सफर
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बदहाल है सड़क, 40 मिनट में तय हो रहा नौ किमी. का सफर
बिजनौर। बदहाल सड़क पर नौ किमी का सफर 40 मिनट में तय हो रहा है। सालों से टूटी पड़ी मौअज्जमपुर नारायण-मंडावली रोड की सुध नहीं ली गई है। लोगों की गुहार पर खुद डीएम ने इस सड़क की मरम्मत कराने के निर्देश दिए थे। सड़क में गड्ढे और डामर के टूट जाने की वजह से लोग सड़क के बीच में चलने के बजाए साइडों में कच्ची पटरी पर चलना बेहतर समझ रहे हैं।
मंडावली से नया गांव होते हुए मौअज्जमपुर नारायण रेलवे जंक्शन तक सीधी सड़क जाती है। इस सड़क की लंबाई नौ किमी है। जोकि रेलवे जंक्शन को मंडावली से ही नहीं बल्कि दर्जनभर गांव को भी सीधे जोड़ती है। इस सड़क से होते हुए राजपुर नवादा, रामनगर, हकीमपुर, लालपुर, बाकरपुर, दिनौड़ी सहित अन्य गांव के लोग जिला मुख्यालय या तहसील मुख्यालय आते जाते हैं। अब इस सड़क पर चलना दूभर है। बता दें कि सालों से यह सड़क टूटी पड़ी है। नौ किमी लंबी सड़क में कहीं भी पक्की डामर दिखाई नहीं देती। दिखाई देते हैं तो डामर के नीचे से निकले नुकीले पत्थर। जिस पर दुपहिया वाहन लहराते हुए चलते हैं। कार से भी चलना मुश्किल है। गड्ढों की वजह से वाहनों के उछलकर अनियंत्रित होने का खतरा बना रहता है।
कच्ची पटरी पर चलने को मजबूर हैं लोग
राजपुर नवादा के रहने वाले अनुज कुमार ने बताया कि सड़क पर चलना मुश्किल है। गड्ढों की वजह से लोग सड़क के बराबर में कच्ची पटरी पर चलते हैं। गड्ढों में बाइक चलाने से बेहतर है कच्ची पटरी पर चला जाए। शीशपाल राठी ने बताया कि अगर गांव से मौअज्जमपुर जाना पड़ जाए तो जो सफर दस से पंद्रह मिनट में हो सकता था, उसमें आधा घंटे से भी ज्यादा समय लगता है। रेलवे स्टेशन तक जाने में ही गड्ढों की वजह से लोग बेहाल हो जाते हैं। सुमित त्यागी ने बताया कि प्रसिद्ध कवि दुष्यंत कुमार त्यागी उनके गांव राजपुर नवादा के रहने वाले थे। देशभर में नाम कमाने वाले कवि के गांव तक जाने वाली सड़क ही टूटी पड़ी है। महावीर सिंह जिंघाला बताते हैं कि समय से गड्ढे नहीं भरे गए। जिसके कारण सड़क पूरी उखड़ गई। सड़क से गड्ढामुक्त अभियान की भी पोल खुल रही है।
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--------- कोट
चार साल पहले ही इस सड़क का निर्माण किया गया था। फिलहाल सड़क की मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही सड़क की मरम्मत करा दी जाएगी - सतीश चंद्र शर्मा, एई पीडब्लूडी नजीबाबाद
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बिजनौर। बदहाल सड़क पर नौ किमी का सफर 40 मिनट में तय हो रहा है। सालों से टूटी पड़ी मौअज्जमपुर नारायण-मंडावली रोड की सुध नहीं ली गई है। लोगों की गुहार पर खुद डीएम ने इस सड़क की मरम्मत कराने के निर्देश दिए थे। सड़क में गड्ढे और डामर के टूट जाने की वजह से लोग सड़क के बीच में चलने के बजाए साइडों में कच्ची पटरी पर चलना बेहतर समझ रहे हैं।
मंडावली से नया गांव होते हुए मौअज्जमपुर नारायण रेलवे जंक्शन तक सीधी सड़क जाती है। इस सड़क की लंबाई नौ किमी है। जोकि रेलवे जंक्शन को मंडावली से ही नहीं बल्कि दर्जनभर गांव को भी सीधे जोड़ती है। इस सड़क से होते हुए राजपुर नवादा, रामनगर, हकीमपुर, लालपुर, बाकरपुर, दिनौड़ी सहित अन्य गांव के लोग जिला मुख्यालय या तहसील मुख्यालय आते जाते हैं। अब इस सड़क पर चलना दूभर है। बता दें कि सालों से यह सड़क टूटी पड़ी है। नौ किमी लंबी सड़क में कहीं भी पक्की डामर दिखाई नहीं देती। दिखाई देते हैं तो डामर के नीचे से निकले नुकीले पत्थर। जिस पर दुपहिया वाहन लहराते हुए चलते हैं। कार से भी चलना मुश्किल है। गड्ढों की वजह से वाहनों के उछलकर अनियंत्रित होने का खतरा बना रहता है।
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कच्ची पटरी पर चलने को मजबूर हैं लोग
राजपुर नवादा के रहने वाले अनुज कुमार ने बताया कि सड़क पर चलना मुश्किल है। गड्ढों की वजह से लोग सड़क के बराबर में कच्ची पटरी पर चलते हैं। गड्ढों में बाइक चलाने से बेहतर है कच्ची पटरी पर चला जाए। शीशपाल राठी ने बताया कि अगर गांव से मौअज्जमपुर जाना पड़ जाए तो जो सफर दस से पंद्रह मिनट में हो सकता था, उसमें आधा घंटे से भी ज्यादा समय लगता है। रेलवे स्टेशन तक जाने में ही गड्ढों की वजह से लोग बेहाल हो जाते हैं। सुमित त्यागी ने बताया कि प्रसिद्ध कवि दुष्यंत कुमार त्यागी उनके गांव राजपुर नवादा के रहने वाले थे। देशभर में नाम कमाने वाले कवि के गांव तक जाने वाली सड़क ही टूटी पड़ी है। महावीर सिंह जिंघाला बताते हैं कि समय से गड्ढे नहीं भरे गए। जिसके कारण सड़क पूरी उखड़ गई। सड़क से गड्ढामुक्त अभियान की भी पोल खुल रही है।
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चार साल पहले ही इस सड़क का निर्माण किया गया था। फिलहाल सड़क की मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही सड़क की मरम्मत करा दी जाएगी - सतीश चंद्र शर्मा, एई पीडब्लूडी नजीबाबाद

शीशपाल राठी।- फोटो : BIJNOR

सुमित त्यागी।- फोटो : BIJNOR

महावीर सिंह जंघाला।- फोटो : BIJNOR