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नहीं हटेगा शादीपुर का धार्मिक स्थल, निकाला बीच का रास्ता

Fri, 12 Nov 2021 11:21 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Nov 2021 11:21 PM IST
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The religious place of Shadipur will not be removed
नहीं हटेगा शादीपुर का धार्मिक स्थल, निकाला बीच का रास्ता
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- लोगों ने किया था विरोध, निकाला गया बीच का रास्ता
- पानीपत-खटीमा राजमार्ग के निर्माण की जद में आ गया था
- करीब 400 वर्ष पुराने वट वृक्ष को भी अब नहीं काटा जाएगा
संवाद न्यूज एजेंसी
कोतवाली देहात। नगीना-बिजनौर मार्ग पर ग्राम शादीपुर के बिजलीघर के पास स्थित बड़िया का धार्मिक स्थल हाईवे निर्माण के दौरान अब नहीं हटाया जाएगा। साथ ही करीब 400 वर्ष पुराने वट वृक्ष को भी नहीं काटा जाएगा। पहले धार्मिक स्थल को हटाने की बात कही जा रही थी, लेकिन कई संगठनों द्वारा विरोध करने पर बीच का रास्ता निकाला गया है।
बिजनौर से कोतवाली देहात तक बन रहे पानीपत-खटीमा राजमार्ग के निर्माण की जद में ग्राम शादीपुर स्थित धार्मिक स्थल भी आ गया था। 27 अक्तूबर को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारी तथा कर्मचारी धार्मिक स्थल को हटाने के लिए जेसीबी मशीन लेकर पहुंचे थे, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया था। टीम को लौटना पड़ा था। इसके बाद ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र लिखकर मामले से अवगत कराया था। भाजपा पिछड़ा वर्ग जिला मंत्री शिवकुमार कश्यप, पुजारी बिहारीदास, ग्राम प्रधान सुनीता देवी, हिंदू जागरण मंच के जिला उपाध्यक्ष सौरभ काकरान, शुभम मौर्य, रामपाल चौधरी सहित कई लोग इस संबंध में जिलाधिकारी से भी मिले थे। इसके बाद शिवसेना, हिंदू जागरण मंच, हिंदू युवा वाहिनी, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद समेत दर्जनभर से अधिक संगठन मंदिर न हटाने के पक्ष में आ गए थे। प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए थे।
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शुक्रवार को भाजपा पिछड़ा मोर्चा के जिलाध्यक्ष तिलक राज सैनी तथा जिला मंत्री शिव कुमार कश्यप जिला अधिकारी उमेश मिश्रा से मिले। जिलाधिकारी के निर्देश पर एनएचएआई के अधिकारी धार्मिक स्थल पर पहुंचे तथा फिर से नाप की। एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर एनएचएआई सत्येंद्र पांडे ने बताया कि नाप कर ली गई है तथा धार्मिक स्थल के अगले हिस्से में स्थित पिलर को कटर से काटा जाएगा तथा धार्मिक स्थल पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, यथावत बना रहेगा, लेकिन धार्मिक स्थल का बरामदा थोड़ा छोटा हो जाएगा। वहीं करीब 400 वर्ष पुराने वट वृक्ष को भी कोई क्षति नहीं पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि मंदिर के सुंदरीकरण के लिए इस्टीमेट पीडब्ल्यूडी द्वारा एनएचएआई को भेजा जाएगा, जिससे धनराशि अवमुक्त कर धार्मिक स्थल का सुंदरीकरण कराया जाएगा।
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