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71 साल पहले शुरू हुई थी रंग के जुलूस की पंरपरा
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71 साल पहले शुरू हुई थी जुलूस की पंरपरा
धामपुर। नगर में होली का इतिहास कई दशक पुराना है। लोगों का कहना है कि वैसे तो यहां पर करीब आठ दशक पहले से होली का जुलूस निकलता था। लेकिन धामपुर में गीले रंग के जुलूस की शुरूआत जग्गू महाराज ने अपने सहयोगियों के साथ साल 1950 में की थी। इससे पहले धामपुर के लोग कीचड़, काले तेल से होली खेलते थे।
शुरूआत में बैलगाड़ी पर ड्रम में रंग भरकर पिचकारियों से हुलियारे होली खेलते थे। रास्तों और घरों की छतों पर होली के जुलूस का तमाशा देखने वालों को सराबोर करते चलते थे। युवक नीली घोड़ी बन ढोल की थाप पर जमकर डांस करते थे। इस परंपरा को आगे बढ़ाने में स्व. गंगाराम पुजारी, पंडित फकीरचंद, पंडित कांता प्रसाद हलवाई, बाबूराम शर्मा ठेकेदार, छोटेलाल ठेकेदार, रमेश चंद सिंघल उस्ताद, बाबूराम सराफ, विष्णु स्वरूप, जय प्रकाश शर्मा जूते वाले, राजेश्वर प्रसाद शर्मा चक्कीवाले, रतनलाल, बाबूराम होटल वाले, बलराम, नन्हें मल, शांति प्रसाद माहेश्वरी का अविस्मरणीय योगदान रहा है।
अजय कुमार माहेश्वरी का कहना है कि होली पर प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया जाता है। व्यापारी ब्रज मोहन माहेश्वरी का कहना है कि अब जुलूस में ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर दर्जनों झांकियां शामिल रहती हैं। भामाशाह अग्रवाल कहना है कि होली का जुलूस सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है। व्यापारी अमरीश कुमार अग्रवाल ने कहा कि होली का त्योहार लोगों में प्रेम, आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने और आपसी मतभेदों को खत्म कर एक होने का संदेश देता है।
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धामपुर। नगर में होली का इतिहास कई दशक पुराना है। लोगों का कहना है कि वैसे तो यहां पर करीब आठ दशक पहले से होली का जुलूस निकलता था। लेकिन धामपुर में गीले रंग के जुलूस की शुरूआत जग्गू महाराज ने अपने सहयोगियों के साथ साल 1950 में की थी। इससे पहले धामपुर के लोग कीचड़, काले तेल से होली खेलते थे।
शुरूआत में बैलगाड़ी पर ड्रम में रंग भरकर पिचकारियों से हुलियारे होली खेलते थे। रास्तों और घरों की छतों पर होली के जुलूस का तमाशा देखने वालों को सराबोर करते चलते थे। युवक नीली घोड़ी बन ढोल की थाप पर जमकर डांस करते थे। इस परंपरा को आगे बढ़ाने में स्व. गंगाराम पुजारी, पंडित फकीरचंद, पंडित कांता प्रसाद हलवाई, बाबूराम शर्मा ठेकेदार, छोटेलाल ठेकेदार, रमेश चंद सिंघल उस्ताद, बाबूराम सराफ, विष्णु स्वरूप, जय प्रकाश शर्मा जूते वाले, राजेश्वर प्रसाद शर्मा चक्कीवाले, रतनलाल, बाबूराम होटल वाले, बलराम, नन्हें मल, शांति प्रसाद माहेश्वरी का अविस्मरणीय योगदान रहा है।
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अजय कुमार माहेश्वरी का कहना है कि होली पर प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया जाता है। व्यापारी ब्रज मोहन माहेश्वरी का कहना है कि अब जुलूस में ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर दर्जनों झांकियां शामिल रहती हैं। भामाशाह अग्रवाल कहना है कि होली का जुलूस सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है। व्यापारी अमरीश कुमार अग्रवाल ने कहा कि होली का त्योहार लोगों में प्रेम, आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने और आपसी मतभेदों को खत्म कर एक होने का संदेश देता है।
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