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Bijnor News: सोचने समझने की शक्ति हो रही क्षीण, कैलकुलेटर से लगा रहे हिसाब

Sun, 07 Dec 2025 01:15 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Sun, 07 Dec 2025 01:15 AM IST
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The power of thinking and understanding is diminishing, calculations are being done with the help of a calculator.
बिजनौर। बदलते दौर के साथ ही जीवनशैली भी बदल गई है। अब फोन और सोशल मीडिया हावी हो गई है। इसके ज्यादा प्रयोग से कम उम्र में ही सोचने समझने की शक्ति क्षीण हो रही है। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि अब युवा छोटा सा हिसाब भी कैलकुलेटर से लगा रहे हैं। इस समस्या के मेडिकल अस्पताल में भी रोजाना करीब 20 मरीज पहुंच रहे हैं।
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अक्सर देखने में आता है कि फोन पर लगातार नोटिफिकेशन आता रहता है। ऐसे में व्यक्ति का ध्यान भटकता है, उसे लगता है कि कोई जरूरी मैसेज न आया हो। लगातार स्क्रॉलिंग से दिमाग बार-बार रिवॉर्ड की तलाश करता है। इससे लत की संभावना बढ़ती है। मेडिकल अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार वीडियो और तेज कंटेंट दिमाग की ध्यान देने की क्षमता कम कर देता है। यही वजह है कि आज के युवा बिना फोन के छोटा सा हिसाब भी नहीं जोड़ पा रहे हैं। फोन का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। वहीं, इसके नुकसान भी सामने आ रहे हैं। देर रात फोन इस्तेमाल करने से ब्लू लाइट मेलाटोनिन को दबा रही है। इससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
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फोन के ज्यादा इस्तेमाल का दिमाग और जीवन पर प्रभाव
-दूसरों के उत्तम जीवन को देखकर खुद को कमजोर महसूस कर रहा व्यक्ति
-ऑनलाइन दुनिया में समय बढ़ता है और वास्तविक रिश्तों में आ रही दूरी
-धीरे-धीरे कम हो रही कार्यशील स्मृति और प्रोसेसिंग गति
-फोन पर निर्भरता बढ़ने से कम हो रहा है आत्म विश्वास
-फोन के लगातार इस्तेमाल से भंग हो रहा है युवाओं का ध्यान
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फोन से ऐसे करें बचाव
-फोन से दूर रहने का विशिष्ट समय निर्धारित करें
-फोन पर आने वाली अनावश्यक सूचनाएं बंद करें
-स्क्रीन टाइम की जगह ऑफलाइन गतिविधियां करें
-कैलकुलेटर की जगह भौतिक रूप से गणित जोड़ें
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केस नंबर एक
बिजनौर निवासी 22 वर्षीय कॉलेज छात्र है। वह रोजमर्रा के बेहद आसान गणित जैसे 10+7, 25×2, या 1 घंटे में कितने मिनट होते हैं, पूरे नहीं कर पाता है। ये सब वह अपने मोबाइल या कैलकुलेटर पर करता है।
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केस नंबर दो
चांदपुर के गांव निवासी 17 वर्षीय युवक इस बार कक्षा 12वीं का छात्र है। वह हल्के जोड़, गुणा के सवाल भी फोन पर कैलकुलेटर से करता है। पिछले कई सालों से वह कैलकुलेटर का प्रयोग कर रहा है।

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वर्जन::
जब आसान से आसान कैलकुलेशन भी फोन से हो, तो दिमाग खुद कोई मेहनत नहीं करता है। इसका प्रभाव युवाओं पर पड़ रहा है। उनकी सोचने,समझने की शक्ति क्षीण हो रही है। काफी संख्या में युवा इस समस्या के पहुंच रहे हैं। परीक्षा में फोन नहीं ले जा सकते हैं। ऐसे में युवाओं की समस्या बढ़ गई है।
....डॉ. प्रीति चौहान, मानसिक रोग विशेषज्ञ, मेडिकल अस्पताल, बिजनौर
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