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घरौंदे और बच्चों की शिक्षा के लिए भी बैंक से ऋण लेने से परहेज नहीं करते हैं उपभोक्ता

Sat, 05 Sep 2020 12:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2020 12:12 AM IST
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The people of the district have taken a loan of ten thousand crores
दस हजार करोड़ का कर्ज ले रखा है जिले के लोगों ने
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बिजनौर। जिलेवासियों के लिए खेती के काम के अलावा मकान बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके लिए सवा तीन हजार करोड़ से अधिक का ऋण बैंकों से जिलेवासियों ने ले रखा है। इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई पर भी 65 करोड़ से अधिक का ऋण बैंकों से लिया गया है। सपनों का घरौंदा बनाने में बैंक भी किसानों की मदद कर रहे हैं।
बैंकों में हर वर्ग और कार्य के लिए ऋण से जुड़ी योजना हैं। कृषि प्रधान जिले में खेती के लिए ही सबसे अधिक ऋण लिया जाता है। इसके लिए बैंकों में किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बने हैं। इसके अलावा पशुपालन के लिए भी ऋण लिया जाता है। एक अदद घरौंदा हर परिवार का सपना होता है। इसके लिए केंद्र सरकार भी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आर्थिक मदद मुहैया करा रही है। काफी लोग घर बनाने के लिए ऋण भी लेते हैं।
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जिले में इस समय किसानों पर करीब पांच हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके बाद लोगों ने सबसे अधिक ऋण मकान बनाने के लिए ही ले रखा है। यह राशि तीन हजार 324 करोड़ के आसपास है। बच्चों की पढ़ाई के लिए भी ऋण लेने में जिलेवासी पीछे नहीं हट रहे हैं। इस मद में 65 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया है। कई लोगों के बच्चे तो पढ़ाई के लिए विदेश तक गए हैं। उद्योगों व व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भी एक हजार करोड़ से अधिक का ऋण लिया गया है।
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आयरकरदाताओं को आसनी से मिलता है ऋण
एजूकेशन व होम लोन आमतौर पर ऐसे उपभोक्ताओं को दिया जाता है जो आयकरदाता होते हैं। आयकर दाताओं को इस तरह का ऋण देने में बैंक बिलकुल भी देर नहीं लगाते हैं। इस तरह के ऋण पर किस्त बंध जाती हैं जो हर महीने उपभोक्ता चुकाते रहते हैं।
घर बनाने के लिए ऋण का भी होता है बीमा
कई बैंकों में होम लोन का बीमा भी किया जाता है। उपभोक्ता हर महीने मकान की ऋण की किस्त अदा करते हैं। अगर उन्होंने बैंक के ऋण का बीमा कराया होता है और ऋण जमा करने से पहले ही ऋण जमा करने वाली की मौत हो जाती है तो उसकी बाकी किस्तें माफ हो जाती हैं।
मकान का कागजी हक दिलाएगी घरौनी
मकान को गिरवी रखकर भी बैंक ऋण देते हैं। ऋण देने के लिए जमीन के मालिकाना हक के पेपर देने होते हैं। कई बार उपभोक्ताओं के पास दाद दिलाही मकान के पेपर नहीं होते हैं। इसके लिए सरकार अब घरौनी बनवा रही है। खेती की जमीन के लिए जैसे खतौनी बनती है, उसी आधार पर घरौनी बनती है। इसमे मकान व जमीन का मालिकाना हक मिलने पर मकान बनाने व अन्य काम के लिए बैंक से ऋण लिया जा सकता है।
देना होता है आय का सबूत
एसबीआई की मुख्य शाखा प्रबंधक नौबहार सिंह के अनुसार आय कर न देने वाले को भी घर बनाने के लिए ऋण दिया जा सकता है। लेकिन उसे अपनी आय का सुबूत देना होता है।

किसानों को दिया ऋण सबसे सुरक्षित
अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) जोगिंदर कुमार ग्रोवर का कहना है कि पात्रों को बैंक ऋण उपलब्ध कराते हैं। किसानों को दिया जाने वाला ऋण सबसे अधिक सुरक्षित होता है। घर बनाने व शिक्षा के लिए भी जिले में लगातार ऋण दिया जा रहा है।
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