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पानी बर्बाद करने पर लगेगा जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Fri, 29 Apr 2016 12:49 AM IST
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पानी की बर्बादी
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में नगर पालिका प्रशासन ने सूखे की आहट और पानी की किल्लत के मद्देनजर प्रभावी कदम उठाने का फैसला किया है। पालिका प्रशासन ने कहा कि पानी बर्बाद करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। नगर पालिका कर्मचारी घर-घर जाकर टोटियों की चेकिंग करेंगे। टोटियों के खुला छोड़कर पानी बर्बादी करने वालों पर मौके पर ही जुर्माना लगाया जाएगा।
यूपी सहित देश के कई राज्यों में अकाल के कारण स्थिति विकट होती जा रही है। पानी को बचाने के लिए उपाय किए जा रहे हैं। नगर पालिका ने भी शिफ्ट में नलकूप चलाकर पानी आपूर्ति सुचारु रखने का निर्णय लिया है। नगर पालिका की ओर से क्षेत्र में करीब 11, 500 उपभोक्ताओं को कनेक्शन दिए गए हैं। कई घरों में पानी की टोटी लीक होने पर भी मकान मालिक उसको ठीक कराने में लापरवाही दिखाते हैं। लीक हो रही टोटी से निकला पानी नालियों में बर्बाद हो जाता है। पालिका की ओर से अब पानी की बर्बादी रोकने के लिए घर-घर चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। अभियान में पानी की टोटी की चेकिंग होगी। पानी की टोटी खुले होने और लीकेज होने की स्थिति पर मकान मालिकों को जुर्माना भरना होगा।
नगर पालिका के ईओ जेके आनंद के मुताबिक नागरिक पानी व्यर्थ न बहाएं। अगर कहीं पानी की टोटी लीक हो रही हो, तो उसे ठीक कराएं। अगर सार्वजनिक स्थल पर पानी की टंकी लीक हो रही हो तो इसकी सूचना तुरंत पालिका कार्यालय में दें। वहीं बरकातपुर शुगर मिल के वाइस प्रेजीडेंट नरपत सिंह के मुताबिक उनकी मिल में लगी कंडेशर टर्बाइन बिजली बनाने के बाद भी पूरी भांप को पानी में बदलती है। मिल में बनाई गई बिजली से शुगर मिल के कार्य के अलावा मिल की खेती की सिंचाई भी की जा रही है। मिल की पेराई क्षमता 70 हजार क्विंटल गन्ना प्रतिदिन है। मिल में भांप से प्रतिदिन एक लाख लीटर तक पानी बनाया गया है।
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विधायकों को मिलेंगे 100 हैंडपंप
शासन ने फिर से विधायकों को अपने कोटे से क्षेत्रों में हैंडपंपों के लगाए जाने की इजाजत दे दी है। प्रत्येक विधायक को अपने इलाके के लिए एक सौ हैंडपंप दिए जाएंगे। विधायक की मर्जी पर यह तय होगा कि वह हैंडपंप लगवाए या पुराने को रिबोर कराए। उधर, जल निगम के एक्सईएन अरुण कुमार त्यागी के मुताबिक शासन से हैंडपंप लगाने के बारे में आदेश मिल चुका है। विधायकों के प्रस्ताव का सभी को इंतजार है। विधायकों के कोटे से उनके इलाके में पहले से हैंडपंप लगते आए हैं। वर्ष 2015-16 में शासन से हैंडपंपों का विधायकों के लिए कोई कोटा निर्धारित नहीं किया गया। विधायकों ने बहुत शोर मचाया, पर शासन स्तर पर उनकी एक नहीं सुनी गई। शासन ने अब विधायकों के इलाके में फिर से हैंडपंप लगवाने का निर्णय लिया है। इस बारे में आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। कोई भी विधायक अपने इलाके में 100 हैंडपंप लगवा सकते है या रिबोर करा सकते हैं। दोनों में से एक काम विधायक करा सकेंगे। इसके लिए विधायकों को प्रस्ताव बनाकर जल निगम के अधिकारियों को भेजना होगा। हैंडपंप कहां लगनें है कहां रिबोर होने है यह सब विधायक को प्रस्ताव में देना होगा। शासन की ओर से इस बारे में जल निगम के अफसरों को आदेश दिए गए हैं। अफसर अब विधायकों की ओर से आने वाले प्रस्ताव का इंतजार कर रहे हैं। अभी तक किसी भी विधायक ने अपना प्रस्ताव नहीं दिया है। हैंडपंप लगवाने के लिए विधायकों के घरों पर परिक्रमा करनी शुरू कर दी है। जल निगम के एक्सईएन अरुण कुमार त्यागी के मुताबिक शासन से हैंडपंप लगाने के बारे में आदेश आ गया है। विधायकों के प्रस्ताव का सभी को इंतजार है।
बच सकता है लाखों लीटर पानी
चीनी मिलों की जागरूकता से लाखों लीटर शुद्ध पेयजल बचाया जा सकता है। यह पानी आरओ से निकले पानी के बराबर शुद्ध होता है। इस पानी को सिंचाई के प्रयोग में भी लाया जा सकता है। डीसीओ ओपी सिंह के मुताबिक पानी वैश्विक धरोहर है। इसका संचय जरूरी है। सभी शुगर मिलों को कंडेसर लगाकर भांप को पानी में बदलने के लिए पत्र लिखा गया है।
गन्ना उत्पादन में जिला सूबे में दूसरे स्थान पर है। जिले में नौ शुगर मिल संचालित है। पेराई सत्र में औसतन पांच लाख क्विंटल गन्ने की पेराई प्रतिदिन होती है। गन्ने का 70 प्रतिशत हिस्सा पानी होता है। गन्ने की पेराई होने पर जब रस को बॉयलर में उबाला जाता है, तो यह पानी भांप बनकर उड़ जाता है। मिलों में इस भांप से टरबाइन घूमाकर बिजली बनाई जाती है। हालांकि इसके बाद भी काफी 40 प्रतिशत तक भांप बच जाती है। हालांकि शुगर मिल टरबाइन मशीन के पास कंडेसर लगाए, तो इस भांप को ठंडा कर फिर से पानी में बदला जा सकता है। यह पानी आरओ की तरह शुद्ध होता है। शुगर मिलों का संचालन दिसंबर के पहले सप्ताह से शुरू होकर अप्रैल तक चलता है। बीते पेराई सत्र में जिले में बरकातपुर शुगर मिल ने कंडेसर लगाकर भांप को पानी बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। अगर सभी शुगर मिलें इस पद्धति को अपनाएं तो पानी की बहुत बचत होगी।
जिले में नौ शुगर मिल हैं। इनमें से चांदपुर व बिजनौर शुगर मिल द्वारा बिजली नहीं बनाई जाती है। बाकी शुगर मिलों धामपुर, बिलाई, स्योहारा, अफजलगढ़, नजीबाबाद, बूंदकी में बिजली बनाई जाती है। यहां पर कंडेंसर लगाकर लाखों लीटर पानी बनाया जा सकता है। डीसीओ ओपी सिंह के मुताबिक पानी वैश्विक धरोहर है और इसका संचय जरूरी है। सभी शुगर मिलों को कंडेसर लगाकर भांप को पानी में बदलने के लिए पत्र लिखा गया है।
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यूपी सहित देश के कई राज्यों में अकाल के कारण स्थिति विकट होती जा रही है। पानी को बचाने के लिए उपाय किए जा रहे हैं। नगर पालिका ने भी शिफ्ट में नलकूप चलाकर पानी आपूर्ति सुचारु रखने का निर्णय लिया है। नगर पालिका की ओर से क्षेत्र में करीब 11, 500 उपभोक्ताओं को कनेक्शन दिए गए हैं। कई घरों में पानी की टोटी लीक होने पर भी मकान मालिक उसको ठीक कराने में लापरवाही दिखाते हैं। लीक हो रही टोटी से निकला पानी नालियों में बर्बाद हो जाता है। पालिका की ओर से अब पानी की बर्बादी रोकने के लिए घर-घर चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। अभियान में पानी की टोटी की चेकिंग होगी। पानी की टोटी खुले होने और लीकेज होने की स्थिति पर मकान मालिकों को जुर्माना भरना होगा।
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नगर पालिका के ईओ जेके आनंद के मुताबिक नागरिक पानी व्यर्थ न बहाएं। अगर कहीं पानी की टोटी लीक हो रही हो, तो उसे ठीक कराएं। अगर सार्वजनिक स्थल पर पानी की टंकी लीक हो रही हो तो इसकी सूचना तुरंत पालिका कार्यालय में दें। वहीं बरकातपुर शुगर मिल के वाइस प्रेजीडेंट नरपत सिंह के मुताबिक उनकी मिल में लगी कंडेशर टर्बाइन बिजली बनाने के बाद भी पूरी भांप को पानी में बदलती है। मिल में बनाई गई बिजली से शुगर मिल के कार्य के अलावा मिल की खेती की सिंचाई भी की जा रही है। मिल की पेराई क्षमता 70 हजार क्विंटल गन्ना प्रतिदिन है। मिल में भांप से प्रतिदिन एक लाख लीटर तक पानी बनाया गया है।
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विधायकों को मिलेंगे 100 हैंडपंप
शासन ने फिर से विधायकों को अपने कोटे से क्षेत्रों में हैंडपंपों के लगाए जाने की इजाजत दे दी है। प्रत्येक विधायक को अपने इलाके के लिए एक सौ हैंडपंप दिए जाएंगे। विधायक की मर्जी पर यह तय होगा कि वह हैंडपंप लगवाए या पुराने को रिबोर कराए। उधर, जल निगम के एक्सईएन अरुण कुमार त्यागी के मुताबिक शासन से हैंडपंप लगाने के बारे में आदेश मिल चुका है। विधायकों के प्रस्ताव का सभी को इंतजार है। विधायकों के कोटे से उनके इलाके में पहले से हैंडपंप लगते आए हैं। वर्ष 2015-16 में शासन से हैंडपंपों का विधायकों के लिए कोई कोटा निर्धारित नहीं किया गया। विधायकों ने बहुत शोर मचाया, पर शासन स्तर पर उनकी एक नहीं सुनी गई। शासन ने अब विधायकों के इलाके में फिर से हैंडपंप लगवाने का निर्णय लिया है। इस बारे में आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। कोई भी विधायक अपने इलाके में 100 हैंडपंप लगवा सकते है या रिबोर करा सकते हैं। दोनों में से एक काम विधायक करा सकेंगे। इसके लिए विधायकों को प्रस्ताव बनाकर जल निगम के अधिकारियों को भेजना होगा। हैंडपंप कहां लगनें है कहां रिबोर होने है यह सब विधायक को प्रस्ताव में देना होगा। शासन की ओर से इस बारे में जल निगम के अफसरों को आदेश दिए गए हैं। अफसर अब विधायकों की ओर से आने वाले प्रस्ताव का इंतजार कर रहे हैं। अभी तक किसी भी विधायक ने अपना प्रस्ताव नहीं दिया है। हैंडपंप लगवाने के लिए विधायकों के घरों पर परिक्रमा करनी शुरू कर दी है। जल निगम के एक्सईएन अरुण कुमार त्यागी के मुताबिक शासन से हैंडपंप लगाने के बारे में आदेश आ गया है। विधायकों के प्रस्ताव का सभी को इंतजार है।
बच सकता है लाखों लीटर पानी
चीनी मिलों की जागरूकता से लाखों लीटर शुद्ध पेयजल बचाया जा सकता है। यह पानी आरओ से निकले पानी के बराबर शुद्ध होता है। इस पानी को सिंचाई के प्रयोग में भी लाया जा सकता है। डीसीओ ओपी सिंह के मुताबिक पानी वैश्विक धरोहर है। इसका संचय जरूरी है। सभी शुगर मिलों को कंडेसर लगाकर भांप को पानी में बदलने के लिए पत्र लिखा गया है।
गन्ना उत्पादन में जिला सूबे में दूसरे स्थान पर है। जिले में नौ शुगर मिल संचालित है। पेराई सत्र में औसतन पांच लाख क्विंटल गन्ने की पेराई प्रतिदिन होती है। गन्ने का 70 प्रतिशत हिस्सा पानी होता है। गन्ने की पेराई होने पर जब रस को बॉयलर में उबाला जाता है, तो यह पानी भांप बनकर उड़ जाता है। मिलों में इस भांप से टरबाइन घूमाकर बिजली बनाई जाती है। हालांकि इसके बाद भी काफी 40 प्रतिशत तक भांप बच जाती है। हालांकि शुगर मिल टरबाइन मशीन के पास कंडेसर लगाए, तो इस भांप को ठंडा कर फिर से पानी में बदला जा सकता है। यह पानी आरओ की तरह शुद्ध होता है। शुगर मिलों का संचालन दिसंबर के पहले सप्ताह से शुरू होकर अप्रैल तक चलता है। बीते पेराई सत्र में जिले में बरकातपुर शुगर मिल ने कंडेसर लगाकर भांप को पानी बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। अगर सभी शुगर मिलें इस पद्धति को अपनाएं तो पानी की बहुत बचत होगी।
जिले में नौ शुगर मिल हैं। इनमें से चांदपुर व बिजनौर शुगर मिल द्वारा बिजली नहीं बनाई जाती है। बाकी शुगर मिलों धामपुर, बिलाई, स्योहारा, अफजलगढ़, नजीबाबाद, बूंदकी में बिजली बनाई जाती है। यहां पर कंडेंसर लगाकर लाखों लीटर पानी बनाया जा सकता है। डीसीओ ओपी सिंह के मुताबिक पानी वैश्विक धरोहर है और इसका संचय जरूरी है। सभी शुगर मिलों को कंडेसर लगाकर भांप को पानी में बदलने के लिए पत्र लिखा गया है।