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सीट का नाम बदला, पर सपा को इस बार भी नहीं मिली जीत
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सीट का नाम बदला, पर सपा को इस बार भी नहीं मिली जीत
अफजलगढ़। विधान सभा चुनाव में अभिशाप को सपा नहीं तोड़ पाई है। इस बार भी सीट हासिल करने में नाकामयाब रही। जबकि इस बार सपा समर्थकों के अलावा मुस्लिम समाज के वोटरों ने भी एकजुट होकर जमकर सपा प्रत्याशी को लड़ाया था।
समाजवादी पार्टी प्रदेश में जब से वजूद में आई है, तब से आज तक समाज वादी प्रत्याशी बढ़ापुर विधान सभा में अपनी जगह नहीं बना पाई है। ऐसा नहीं है कि समाजवादी पार्टी के यहां समर्थक कम हैं, इस बार मतदान संपन्न होने के बाद सपा व बसपा के प्रत्याशी अपने समर्थकों सहित अपनी अपनी जीत को पक्का मानकर चल रहे थे। खासकर सपा प्रत्याशी को सपा समर्थकों सहित मुस्लिम समुदाय ने एकजुट होकर लड़ाया था। पिछले चार दशकों के दौरान 1993 में सपा ने 109 सीटें हासिल की थीं। इसके बाद 1996 में भी सपा को 110 सीट हासिल हुईं थीं। वर्ष 2007 में 97 सीटें हासिल कीं। वहीं वर्ष 2012 में 224 सीटें लेकर सरकार बनाई थी, किंतु किसी भी बार अफजलगढ़/बढ़ापुर विधान सभा सीट सपा के हिस्से में नहीं आ पाई।
इस बार समाजवादी पार्टी ने कपिल कुमार पर अपना भाग्य आजमाया था, ऐसे में जब मुस्लिम समुदाय कही न कहीं अंदरखाने भाजपा से खिन्न महसूस हो रहा था। एकजुट हुआ और उन्होंने साइकिल की रफ्तार बढ़ा दी। काफी अर्से बाद उन्हें बढ़ापुर विधान सभा सीट समाजवादी पार्टी के कब्जे में आती महसूस हुई। वहीं हाथी की सुस्ती के बाद समाजवादी पार्टी सीधे भाजपा की टक्कर में तो आ गई, किंतु आखिरी समय पर वोटर का रुख भाजपा की ओर होने के कारण सपा इस बार भी सीट गंवा बैठी। अफजलगढ़/बढ़ापुर सीट पर अब तक होने वाले विधान सभा चुनाव में छह बार भाजपा, चार बार कांग्रेस, तीन बार बसपा, एक बार जेएनपी सहित एक बार निर्दलीय प्रत्याशी भी विजय प्राप्त कर सीट पर कब्जा कर चुके हैं।
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अफजलगढ़। विधान सभा चुनाव में अभिशाप को सपा नहीं तोड़ पाई है। इस बार भी सीट हासिल करने में नाकामयाब रही। जबकि इस बार सपा समर्थकों के अलावा मुस्लिम समाज के वोटरों ने भी एकजुट होकर जमकर सपा प्रत्याशी को लड़ाया था।
समाजवादी पार्टी प्रदेश में जब से वजूद में आई है, तब से आज तक समाज वादी प्रत्याशी बढ़ापुर विधान सभा में अपनी जगह नहीं बना पाई है। ऐसा नहीं है कि समाजवादी पार्टी के यहां समर्थक कम हैं, इस बार मतदान संपन्न होने के बाद सपा व बसपा के प्रत्याशी अपने समर्थकों सहित अपनी अपनी जीत को पक्का मानकर चल रहे थे। खासकर सपा प्रत्याशी को सपा समर्थकों सहित मुस्लिम समुदाय ने एकजुट होकर लड़ाया था। पिछले चार दशकों के दौरान 1993 में सपा ने 109 सीटें हासिल की थीं। इसके बाद 1996 में भी सपा को 110 सीट हासिल हुईं थीं। वर्ष 2007 में 97 सीटें हासिल कीं। वहीं वर्ष 2012 में 224 सीटें लेकर सरकार बनाई थी, किंतु किसी भी बार अफजलगढ़/बढ़ापुर विधान सभा सीट सपा के हिस्से में नहीं आ पाई।
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इस बार समाजवादी पार्टी ने कपिल कुमार पर अपना भाग्य आजमाया था, ऐसे में जब मुस्लिम समुदाय कही न कहीं अंदरखाने भाजपा से खिन्न महसूस हो रहा था। एकजुट हुआ और उन्होंने साइकिल की रफ्तार बढ़ा दी। काफी अर्से बाद उन्हें बढ़ापुर विधान सभा सीट समाजवादी पार्टी के कब्जे में आती महसूस हुई। वहीं हाथी की सुस्ती के बाद समाजवादी पार्टी सीधे भाजपा की टक्कर में तो आ गई, किंतु आखिरी समय पर वोटर का रुख भाजपा की ओर होने के कारण सपा इस बार भी सीट गंवा बैठी। अफजलगढ़/बढ़ापुर सीट पर अब तक होने वाले विधान सभा चुनाव में छह बार भाजपा, चार बार कांग्रेस, तीन बार बसपा, एक बार जेएनपी सहित एक बार निर्दलीय प्रत्याशी भी विजय प्राप्त कर सीट पर कब्जा कर चुके हैं।
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