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कमाई में दूसरे पायदान पर पहुंचीं जिले की समूह महिलाएं
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कमाई में दूसरे पायदान पर पहुंचीं जिले की समूह महिलाएं
बिजनौर। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने सालाना कमाई में लंबी छलांग लगाई। महिलाओं को अपनी कार्य कौशल का परिचय देने के लिए अन्य राज्यों में भेजा जा रहा है। जिला समूह गठन में सूबे में दूसरे पायदान पर आ गया है। अब जिले की समूह महिलाओं की वार्षिक आय 48 हजार रुपये से बढ़कर 55 हजार रुपये वार्षिक तक पहुंच गई है।
राष्ट्रीय आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह गठित होते हैं। जिले के 11 ब्लॉक में 13500 समूह गठित हैं। समूहों से महिलाओं को जोड़ा जाता है। एक लाख 40 हजार से अधिक महिलाएं समूहों से जुड़ी है। शासन समूहों को निजी काम धंधा शुरू करने के लिए फंड उपलब्ध कराता है। महिला समूहों के माध्यम से अच्छी कमाई कर रही हैं। मिशन के जिला उपायुक्त ज्ञान सिंह ने बताया कि शासन से गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली ग्रामीण महिलाओं का सालाना आय का मानक 48040 रुपये हैं।
समूह से बीपीएल की महिलाओं को जोड़ा गया। रोजगार के अवसर प्रदान किए। जिससे ग्रामीण बीपीएल महिलाओं की वार्षिक आय बढ़कर 55 हजार हो गई है। नजीबाबाद ब्लॉक की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने केरल में आयोजित राष्ट्रीय प्रदर्शनी में प्रतिभाग किया। महिलाओं ने उत्तर भारत खास तौर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खाद्य व्यंजनों की कैंटीन लगाई। महिलाओं ने 15 दिन में पौने चार लाख कमाए। दिल्ली समेत दक्षिणी राज्यों के मेलों में प्रतिभाग किया।
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महिलाएं कर रहीं हैं ये काम
बताया कि समूह की महिला बिजली के बिल वितरण व वसूलने, गांवों में राशन की दुकानों का संचालन, दोने पत्तल तैयार करना, मुर्गी पालन, प्रसाधन सामग्री की बिक्री, सामुदायिक शौचालय में केयर टेकर, आदि एक दर्जन कामों में लगी है।
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बिजनौर। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने सालाना कमाई में लंबी छलांग लगाई। महिलाओं को अपनी कार्य कौशल का परिचय देने के लिए अन्य राज्यों में भेजा जा रहा है। जिला समूह गठन में सूबे में दूसरे पायदान पर आ गया है। अब जिले की समूह महिलाओं की वार्षिक आय 48 हजार रुपये से बढ़कर 55 हजार रुपये वार्षिक तक पहुंच गई है।
राष्ट्रीय आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह गठित होते हैं। जिले के 11 ब्लॉक में 13500 समूह गठित हैं। समूहों से महिलाओं को जोड़ा जाता है। एक लाख 40 हजार से अधिक महिलाएं समूहों से जुड़ी है। शासन समूहों को निजी काम धंधा शुरू करने के लिए फंड उपलब्ध कराता है। महिला समूहों के माध्यम से अच्छी कमाई कर रही हैं। मिशन के जिला उपायुक्त ज्ञान सिंह ने बताया कि शासन से गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली ग्रामीण महिलाओं का सालाना आय का मानक 48040 रुपये हैं।
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समूह से बीपीएल की महिलाओं को जोड़ा गया। रोजगार के अवसर प्रदान किए। जिससे ग्रामीण बीपीएल महिलाओं की वार्षिक आय बढ़कर 55 हजार हो गई है। नजीबाबाद ब्लॉक की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने केरल में आयोजित राष्ट्रीय प्रदर्शनी में प्रतिभाग किया। महिलाओं ने उत्तर भारत खास तौर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खाद्य व्यंजनों की कैंटीन लगाई। महिलाओं ने 15 दिन में पौने चार लाख कमाए। दिल्ली समेत दक्षिणी राज्यों के मेलों में प्रतिभाग किया।
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महिलाएं कर रहीं हैं ये काम
बताया कि समूह की महिला बिजली के बिल वितरण व वसूलने, गांवों में राशन की दुकानों का संचालन, दोने पत्तल तैयार करना, मुर्गी पालन, प्रसाधन सामग्री की बिक्री, सामुदायिक शौचालय में केयर टेकर, आदि एक दर्जन कामों में लगी है।