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लगातार बढ़ रहा हाथियों का कुनबा
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लगातार बढ़ रहा हाथियों का कुनबा
अहर महमूद सिद्दीकी
कालागढ़। कार्बेट टाइगर रिजर्व/नेशनल पार्क में हाथी संरक्षण परियोजना का रंग नजर आने लगा है। वनों में 30 वर्ष में हाथियों का कुनबा बढ़ा है। कार्बेट में 1210 हाथी गणना में उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं।
वनों में 1991-92 में हाथी संरक्षण परियोजना को शुरू किया गया था। इस परियोजना के तहत वनों में हाथियों को संरक्षण दिया गया। हाथियों को अन्य स्थानों पर प्रवास से रोकने में यहां के प्राकृतिक आवास कामयाब साबित हुए हैं। हाथियों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक व नियोजित प्रबंधन पर ध्यान दिया गया। वनों में हाथियों को रोककर वन विभाग ने प्रवास के दौरान मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकने का प्रयास किया। सहारनपुर के यमुना वन क्षेत्र से राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से होकर लैंसडान के वन व नजीबाबाद के सीमावर्ती वनों से होकर हाथी रामगंगा नदी को पार कर नेपाल राज्य को जाया करते थे। 1990 के दशक में इन हाथियों को यहां रामगंगा के क्षेत्र में रोकने को परियोजना शुरू की गई।
कार्बेट में 1210 और अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में 88 हाथी मौजूद
कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में 2020 जुलाई की गणना के अनुसार 1210 हाथी मौजूद मिले। वहीं अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में 88 हाथी देखे गए हैं। उत्तर प्रदेश पुनर्गठन से पूर्व अमानगढ़ टाइगर रिजर्व का वन भी कार्बेट टाइगर रिजर्व में ही आता था। वर्तमान में यह उत्तर प्रदेश के वन विभाग का इलाका है। पार्क के वार्डन रमाकांत तिवारी ने बताया कि एशियाई हाथी अब इस जंगल में रम गए हैं। यहां के वनों में एशियाई हा थियों का संरक्षण किया जा रहा है।
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एक साथ नजर आ रहा 20 हाथियों का झुंड
कालागढ़ के वनों में इन दिनों एक साथ 20 हाथियों का झुंड देखा जा सकता है। हाथी सूखास्रोत के साथ लगे चौड़ में चरते आसानी से नजर आ जाएंगे। इनमें सबसे अधिक बच्चे देखे जा रहे हैं। कालागढ़ के उप प्रभागीय वनाधिकारी कुंदन सिंह खाती का कहना है कि यहां के वनों के साथ हाथियों के लिए रामगंगा, चौड़ा स्रोत, सूखास्रोत, धारा, कोठीराव आदि मौसमी नदी नाले संजीवनी साबित हुए हैं। इन इलाकों के साथ वनों में पर्याप्त चारा व वाटरहोल उन्हें यहां के प्राकृतावास में रोक पाने में कामयाब है।
अमानगढ़ में हाथियों पर विशेष ध्यान
आमनगढ़ टाइगर रिजर्व के वनक्षेत्राधिकारी राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि 2010 से पूर्व यहां हाथी रिजर्व ही था। उसके लिए काम किया जाता रहा है। यहां के वनों में 88 हाथी गणना में दर्ज हुए हैं। वित्तीय सहायता मिलने पर इनके संरक्षण पर और अधिक काम होगा।
सेल्फी और वीडियो बना रहे राहगीर
कालागढ़ में सुबह व शाम नजर आने वाले हाथियों व उनके झुंड की राहगीर दूर से ही फोटो खींच रहे हैं और वीडियो बना रहे हैं। रामगंगा नदी में नहाते हुए हाथी की वीडियो खूब वायरल हो रही है।
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अहर महमूद सिद्दीकी
कालागढ़। कार्बेट टाइगर रिजर्व/नेशनल पार्क में हाथी संरक्षण परियोजना का रंग नजर आने लगा है। वनों में 30 वर्ष में हाथियों का कुनबा बढ़ा है। कार्बेट में 1210 हाथी गणना में उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं।
वनों में 1991-92 में हाथी संरक्षण परियोजना को शुरू किया गया था। इस परियोजना के तहत वनों में हाथियों को संरक्षण दिया गया। हाथियों को अन्य स्थानों पर प्रवास से रोकने में यहां के प्राकृतिक आवास कामयाब साबित हुए हैं। हाथियों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक व नियोजित प्रबंधन पर ध्यान दिया गया। वनों में हाथियों को रोककर वन विभाग ने प्रवास के दौरान मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकने का प्रयास किया। सहारनपुर के यमुना वन क्षेत्र से राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से होकर लैंसडान के वन व नजीबाबाद के सीमावर्ती वनों से होकर हाथी रामगंगा नदी को पार कर नेपाल राज्य को जाया करते थे। 1990 के दशक में इन हाथियों को यहां रामगंगा के क्षेत्र में रोकने को परियोजना शुरू की गई।
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कार्बेट में 1210 और अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में 88 हाथी मौजूद
कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में 2020 जुलाई की गणना के अनुसार 1210 हाथी मौजूद मिले। वहीं अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में 88 हाथी देखे गए हैं। उत्तर प्रदेश पुनर्गठन से पूर्व अमानगढ़ टाइगर रिजर्व का वन भी कार्बेट टाइगर रिजर्व में ही आता था। वर्तमान में यह उत्तर प्रदेश के वन विभाग का इलाका है। पार्क के वार्डन रमाकांत तिवारी ने बताया कि एशियाई हाथी अब इस जंगल में रम गए हैं। यहां के वनों में एशियाई हा थियों का संरक्षण किया जा रहा है।
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एक साथ नजर आ रहा 20 हाथियों का झुंड
कालागढ़ के वनों में इन दिनों एक साथ 20 हाथियों का झुंड देखा जा सकता है। हाथी सूखास्रोत के साथ लगे चौड़ में चरते आसानी से नजर आ जाएंगे। इनमें सबसे अधिक बच्चे देखे जा रहे हैं। कालागढ़ के उप प्रभागीय वनाधिकारी कुंदन सिंह खाती का कहना है कि यहां के वनों के साथ हाथियों के लिए रामगंगा, चौड़ा स्रोत, सूखास्रोत, धारा, कोठीराव आदि मौसमी नदी नाले संजीवनी साबित हुए हैं। इन इलाकों के साथ वनों में पर्याप्त चारा व वाटरहोल उन्हें यहां के प्राकृतावास में रोक पाने में कामयाब है।
अमानगढ़ में हाथियों पर विशेष ध्यान
आमनगढ़ टाइगर रिजर्व के वनक्षेत्राधिकारी राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि 2010 से पूर्व यहां हाथी रिजर्व ही था। उसके लिए काम किया जाता रहा है। यहां के वनों में 88 हाथी गणना में दर्ज हुए हैं। वित्तीय सहायता मिलने पर इनके संरक्षण पर और अधिक काम होगा।
सेल्फी और वीडियो बना रहे राहगीर
कालागढ़ में सुबह व शाम नजर आने वाले हाथियों व उनके झुंड की राहगीर दूर से ही फोटो खींच रहे हैं और वीडियो बना रहे हैं। रामगंगा नदी में नहाते हुए हाथी की वीडियो खूब वायरल हो रही है।