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मृदुता का भाव ही उत्तम मार्दव का सार है

Mon, 24 Aug 2020 11:58 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 24 Aug 2020 11:58 PM IST
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The essence of softness is the feeling of softness
नजीबाबाद में दशलक्षण पर्व पर पूजा-अर्चना करते जैन समाज के श्रद्धालु। - फोटो : NAZIBABAD
मृदुता का भाव ही उत्तम मार्दव का सार
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नजीबाबाद। जैन धर्म के दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन श्री दिगंबर जैन पंचायती और सरजायती मंदिर में जैन श्रद्धालुओं ने सोशल डिस्टेंसिंग के बीच श्रद्धा और आस्था से वेदी पूजन किया।
श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में जिनेश्वर प्रसाद जैन, दीपक जैन, अजय जैन, अनुभव जैन, नमन जैन ने दशलक्षण पर्व पर अभिषेक और प्रक्षाल किया गया। जैन धर्म के विद्वानों ने विधिवत शांति धारा के पश्चात जैन मंदिर की समस्त वेदियों पर पूजा प्रक्षाल कर धर्म लाभ उठाया। जिनेश्वर प्रसाद जैन, अजय जैन और दीपक जैन ने कहा कि आत्मा में मान कषाय का अभाव रखना तथा मृदुता का भाव रखना उत्तम मार्दव धर्म कहलाता है।
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श्री दिगंबर जैन सरजायती जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व पर विभिन्न पूजा-अर्चना और वेदी अभिषेक में जितेंद्र जैन, राजीव जैन सहित जैन समाज के अनेक लोगों ने भाग लिया। जितेंद्र जैन ने दशलक्षण पर्व के व्रत के महत्व पर चर्चा की। पंचायती और सरजायती मंदिरों में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन पूजा-अर्चना में सामला जैन, सुषमा जैन, अलका जैन, सुनीता जैन, रमा जैन सहित समाज की अनेक महिलाओं ने भाग लिया।
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