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दोहरे हत्याकांड ने ताजा कर दी गांव में हुई दस हत्याओं की वारदातें
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दोहरे हत्याकांड ने कुरेदे पुराने जख्म तो सिहर उठे लोग
गजरौला शिव। सपा नेता और उनकी पत्नी की हत्या से हमीदपुर गांव में हुई हत्याओं की अप्रिय वारदातों को ताजा कर दिया। दरअसल इस गांव में 23 सालों तक मामूली बातों पर हत्या किए जाने का सिलसिला चलता रहा, लेकिन अब पिछले 16 सालों से गांव में शांति बनी हुई थी।
बिजनौर से 8 किमी दूर बिजनौर-मंडावर रोड पर स्थित है गांव हमीदपुर। इस गांव में सन 1983 में अपराध की दुनिया में कुछ लोगों ने कदम रखा। उस वक्त 1983 में गांव में हर 3 महीने बाद 3 मर्डर हुए। सन 2006 तक गांव में 10 हत्याएं हो चुकी थीं। हमीदपुर में साल 1983 में कृपाल सिंह पुत्र डूंगर सिंह की हत्या की गई थी, उसके 3 महीने बाद भोपाल सिंह की हत्या हुई थी, जबकि तीन से चार महीने बाद गांव के ही परम सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी । इन तीनों हत्याकांड में गांव के ही पीतम सिंह व उसके पुत्र मुन्नू का नाम आया था। पुलिस ने सन 1990 में मुन्नू का एक मुठभेड़ में एनकाउंटर कर दिया था। पीतम सिंह के 6 लड़के हैं। जिनमें मुन्नू सबसे बड़ा था। मुठभेड़ होने के बाद पीतम सिंह अपने पांचों लड़कों के साथ हरिद्वार चला गया था। पीतम सिंह की भी मौत हो चुकी है। प्रीतम सिंह फौजी था वह नौकरी छोड़कर घर आ गया था। गांव के ही कैलाश की हत्या 1993 में हुई, जिसका गजरौला के खेड़ा गांव के जंगल में गोली लगा शव बरामद किया गया था। जिसमें गांव के ही ऋषि पाल का नाम आया था। हमीदपुर के भूतपूर्व प्रधान कलवा सिंह ने जमीन के विवाद को लेकर 2002 में गांव के ही जोगिंदर सिंह पुत्र कृपाल सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
सन 1999 में गांव के ही विनोद कुमार व डब्लू का गन्ना सेंटर पर जाते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह दोनों हत्याएं जोगिंदर सिंह की हत्या का बदला लेने के लिए की गई थी। सन 2003 में कलवा सिंह ने अपने चचेरे भाई रूपल पुत्र रघुनाथ सिंह का उनकी ही बैठक पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। गांव के ही रोशन पुत्र तेजपाल सिंह का शव बिजनौर-मंडावर रोड पर घनुवाला के क्रेशर के पास गोली लगा शव बरामद हुआ था। इस मर्डर केस में रुपेश पुत्र हरपाल सिंह का नाम आया था, जबकि 2006 में भी हमीदपुर के तेजपाल सिंह की हत्या की गई थी। इसमें भी रूपेश का नाम आया था। रूपेश तेजपाल मर्डर केस में जेल में उम्र कैद की सजा काट रहा है।
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सन 2006 से गांव में कोई हत्या नहीं हुई है। 15 साल बाद गांव से दो शव बरामद हुए हैं। गांव वाले बताते हैं कि पीतम सिंह फौजी था, वह नौकरी छोड़ कर अपने गांव हमीदपुर आ गया था। उनका लड़का मुन्नू शुरुआत से ही शरारती था स्कूल समय में भी वह आए दिन झगड़ा करना शराब के लिए पैसे मांगना न देने पर लड़ाई झगड़ा करना आम बात हो गई थी। पिता पीतम सिंह एक सामाजिक व्यक्ति था। वह लड़के के साथ अपराध की दुनिया में कैसे आया गांव वाले बताने के लिए तैयार नहीं है। 15 साल से गांव में कोई हत्या नहीं हुई थी। गांव में शनिवार को सपा नेता और उनकी पत्नी का शव बरामद होने से लोग आश्चर्यचकित हैं। गांव वालों का कहना है कि दशकों के बाद गांव में कोई ऐसी वारदात हुई है।
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गजरौला शिव। सपा नेता और उनकी पत्नी की हत्या से हमीदपुर गांव में हुई हत्याओं की अप्रिय वारदातों को ताजा कर दिया। दरअसल इस गांव में 23 सालों तक मामूली बातों पर हत्या किए जाने का सिलसिला चलता रहा, लेकिन अब पिछले 16 सालों से गांव में शांति बनी हुई थी।
बिजनौर से 8 किमी दूर बिजनौर-मंडावर रोड पर स्थित है गांव हमीदपुर। इस गांव में सन 1983 में अपराध की दुनिया में कुछ लोगों ने कदम रखा। उस वक्त 1983 में गांव में हर 3 महीने बाद 3 मर्डर हुए। सन 2006 तक गांव में 10 हत्याएं हो चुकी थीं। हमीदपुर में साल 1983 में कृपाल सिंह पुत्र डूंगर सिंह की हत्या की गई थी, उसके 3 महीने बाद भोपाल सिंह की हत्या हुई थी, जबकि तीन से चार महीने बाद गांव के ही परम सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी । इन तीनों हत्याकांड में गांव के ही पीतम सिंह व उसके पुत्र मुन्नू का नाम आया था। पुलिस ने सन 1990 में मुन्नू का एक मुठभेड़ में एनकाउंटर कर दिया था। पीतम सिंह के 6 लड़के हैं। जिनमें मुन्नू सबसे बड़ा था। मुठभेड़ होने के बाद पीतम सिंह अपने पांचों लड़कों के साथ हरिद्वार चला गया था। पीतम सिंह की भी मौत हो चुकी है। प्रीतम सिंह फौजी था वह नौकरी छोड़कर घर आ गया था। गांव के ही कैलाश की हत्या 1993 में हुई, जिसका गजरौला के खेड़ा गांव के जंगल में गोली लगा शव बरामद किया गया था। जिसमें गांव के ही ऋषि पाल का नाम आया था। हमीदपुर के भूतपूर्व प्रधान कलवा सिंह ने जमीन के विवाद को लेकर 2002 में गांव के ही जोगिंदर सिंह पुत्र कृपाल सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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सन 1999 में गांव के ही विनोद कुमार व डब्लू का गन्ना सेंटर पर जाते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह दोनों हत्याएं जोगिंदर सिंह की हत्या का बदला लेने के लिए की गई थी। सन 2003 में कलवा सिंह ने अपने चचेरे भाई रूपल पुत्र रघुनाथ सिंह का उनकी ही बैठक पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। गांव के ही रोशन पुत्र तेजपाल सिंह का शव बिजनौर-मंडावर रोड पर घनुवाला के क्रेशर के पास गोली लगा शव बरामद हुआ था। इस मर्डर केस में रुपेश पुत्र हरपाल सिंह का नाम आया था, जबकि 2006 में भी हमीदपुर के तेजपाल सिंह की हत्या की गई थी। इसमें भी रूपेश का नाम आया था। रूपेश तेजपाल मर्डर केस में जेल में उम्र कैद की सजा काट रहा है।
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सन 2006 से गांव में कोई हत्या नहीं हुई है। 15 साल बाद गांव से दो शव बरामद हुए हैं। गांव वाले बताते हैं कि पीतम सिंह फौजी था, वह नौकरी छोड़ कर अपने गांव हमीदपुर आ गया था। उनका लड़का मुन्नू शुरुआत से ही शरारती था स्कूल समय में भी वह आए दिन झगड़ा करना शराब के लिए पैसे मांगना न देने पर लड़ाई झगड़ा करना आम बात हो गई थी। पिता पीतम सिंह एक सामाजिक व्यक्ति था। वह लड़के के साथ अपराध की दुनिया में कैसे आया गांव वाले बताने के लिए तैयार नहीं है। 15 साल से गांव में कोई हत्या नहीं हुई थी। गांव में शनिवार को सपा नेता और उनकी पत्नी का शव बरामद होने से लोग आश्चर्यचकित हैं। गांव वालों का कहना है कि दशकों के बाद गांव में कोई ऐसी वारदात हुई है।