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जिले ने लिंगानुपात सुधार में लगाई लंबी छलांग
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लिंगानुपात सुधार में जिले ने लगाई लंबी छलांग
बिजनौर। जिले ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत लिंग सुधार में लंबी छलांग लगाई है। जिला बालिका लिंगानुपात सुधार में प्रदेश में 14वें स्थान पर पहुंच गया है। प्रशासन ने अब लिंगानुपात समान करने के लिए कमर कस ली है। इसके लिए लोगों को रेडियो के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से जागरुक किया जाएगा।
मार्च से कोरोना संक्रमण का प्रकोप है। इस कारण बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान प्रभावित हुआ है। जिले में वर्ष 2015-16 में अभियान शुरु हुआ था। उस समय जिले में लिंगानुपात 883 प्रति हजार था अर्थात प्रति एक हजार बालक पर बालिका जन्म दर 883 था। जिला प्रदेश में 60वें स्थान पर था। जिले में लिंगानुपात सुधार के लिए अभियान चला। लोगों को जागरुक करने के लिए जगह-जगह कैंडल मार्च निकाले गए। शहरों व कस्बों में मानव श्रंखला बनाई गई। मेधावी छात्राओं को सम्मान किया गया। स्वास्थय विभाग ने भ्रूण जांच को रोकने के लिए कदम उठाए। प्रशासन की कोशिश रंग लाई और वर्ष 2019-20 में लिंगानुपात 936 प्रति हजार हो गया।
जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि डीएम रमाकांत पांडेय ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ भियान को गति दी। डीएम ने कार्यक्रमों में जाकर लोगों को प्रेरित किया। लोगों की लिंगानुपात सुधार के लिए शुरु कार्यक्रमों में भागीदारी बढ़ी। नतीजतन दिसंबर तक जिले में लिंगानुपात सुधरकर 945 प्रति हजार हो गया है। बताया कि लिंगानुपात सुधार में जिला प्रथम पंद्रह में आ गया है। जिला सूबे की सुधार सूची में 14वें स्थान पर है। प्रशासन अब लिंगानुपात समान करने का लक्ष्य लेकर प्रचार प्रसार आदि की योजना बनाने मे जुटा है। कोरोना के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी है। बताया कि रेडियो गांव, शहर के गली-मोहल्लों में सर्वसुलभ है। इसलिए रेडियो से लिंगानुपात सुधार को प्रेरित करने वाले परिचर्चा, सांस्कृतिक, नाटक, झलकियां आदि कार्यक्रम प्रसारित कराए जाएंगे। इस बारे में आकाशवाणी नजीबाबाद से संपर्क किया जा रहा है। मेधावी छात्राएं सम्मानित होंगी।
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बिजनौर। जिले ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत लिंग सुधार में लंबी छलांग लगाई है। जिला बालिका लिंगानुपात सुधार में प्रदेश में 14वें स्थान पर पहुंच गया है। प्रशासन ने अब लिंगानुपात समान करने के लिए कमर कस ली है। इसके लिए लोगों को रेडियो के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से जागरुक किया जाएगा।
मार्च से कोरोना संक्रमण का प्रकोप है। इस कारण बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान प्रभावित हुआ है। जिले में वर्ष 2015-16 में अभियान शुरु हुआ था। उस समय जिले में लिंगानुपात 883 प्रति हजार था अर्थात प्रति एक हजार बालक पर बालिका जन्म दर 883 था। जिला प्रदेश में 60वें स्थान पर था। जिले में लिंगानुपात सुधार के लिए अभियान चला। लोगों को जागरुक करने के लिए जगह-जगह कैंडल मार्च निकाले गए। शहरों व कस्बों में मानव श्रंखला बनाई गई। मेधावी छात्राओं को सम्मान किया गया। स्वास्थय विभाग ने भ्रूण जांच को रोकने के लिए कदम उठाए। प्रशासन की कोशिश रंग लाई और वर्ष 2019-20 में लिंगानुपात 936 प्रति हजार हो गया।
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जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि डीएम रमाकांत पांडेय ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ भियान को गति दी। डीएम ने कार्यक्रमों में जाकर लोगों को प्रेरित किया। लोगों की लिंगानुपात सुधार के लिए शुरु कार्यक्रमों में भागीदारी बढ़ी। नतीजतन दिसंबर तक जिले में लिंगानुपात सुधरकर 945 प्रति हजार हो गया है। बताया कि लिंगानुपात सुधार में जिला प्रथम पंद्रह में आ गया है। जिला सूबे की सुधार सूची में 14वें स्थान पर है। प्रशासन अब लिंगानुपात समान करने का लक्ष्य लेकर प्रचार प्रसार आदि की योजना बनाने मे जुटा है। कोरोना के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी है। बताया कि रेडियो गांव, शहर के गली-मोहल्लों में सर्वसुलभ है। इसलिए रेडियो से लिंगानुपात सुधार को प्रेरित करने वाले परिचर्चा, सांस्कृतिक, नाटक, झलकियां आदि कार्यक्रम प्रसारित कराए जाएंगे। इस बारे में आकाशवाणी नजीबाबाद से संपर्क किया जा रहा है। मेधावी छात्राएं सम्मानित होंगी।
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