{"_id":"57d1a8dc4f1c1ba83031a98a","slug":"the-death-toll-reached-20-fever","type":"story","status":"publish","title_hn":"20 पहुंचा बुखार से मौत का आंकड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
20 पहुंचा बुखार से मौत का आंकड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Thu, 08 Sep 2016 11:37 PM IST
विज्ञापन
स्योहारा क्षेत्र के ग्राम रवाना शिकारपुर में अस्पताल में एक बेड पर पड़े हैं बुखार के दो-दो मरीज।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजनौर में जनपद में बुखार का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। रवाना शिकारपुर के काफी संख्या में बुखार के मरीज के स्योहारा सीएचसी पर पहुंचने के कारण अस्पताल में विस्तर कम पड़ गए। जलीलपुर के गंधोर गांव में बुखार के प्रकोप से एक सप्ताह में तीन व्यक्तियों की मौत हो गई। मंडावर क्षेत्र में भी बुखार से अब तक तीन मौत हुई हैं। उधर, राजा का ताजपुर में अब तक नौ मौतें बुखार से हो चुकी हैं। वहीं नूरपुरगांव चेहला में भी बुखार से पांच मौत होने का मामला सामने आया है।
राजा का ताजपुर में गांव रवाना शिकारपुर में बुखार का प्रकोप जारी है। रोजाना बुखार के नए मरीज सामने आ रहे हैं। बृहस्पतिवार को गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम न पहुंचने पर भारी संख्या में मरीज सीएचसी पहुंचे। जिससे अस्पताल में बेड की कमी पड़ गई। चिकित्सकों ने एक-एक बेड पर दो-दो मरीजों को लेटाकर उपचार किया। उधर गांव में बुखार से नौ मौत होने के बावजूद भी जिला स्तरीय चिकित्सकों की टीम न पहुंचने से ग्रामीणों में रोष है।
उधर बृहस्पतिवार को गांव में स्वास्थ्य कर्मियों के न पहुंचने पर कमरजहां, उजमा, आसिफ, नासिर, नसीमा, नजराना, अरसद आदि बुखार से पीड़ित 40 मरीज सीएचसी पहुंचे। इतनी संख्या में एक साथ मरीजों के आने से अस्पताल में बेड कम पड़ गए और एक बेड पर दो-तीन मरीजों को लेटाकर उपचार किया गया।
विज्ञापन
सीएचसी प्रभारी डा. विशाल दिवाकर का कहना है कि जांच में गांव में डेंगू अथवा मलेरिया का कोई मरीज नहीं मिला है। बुखार से पीड़ित मरीजों का अस्पताल बुलाकर इलाज किया जा रहा है और अब बुखार पर कंट्रोल है। निजी चिकित्सकों द्वारा दी गई तेज एंटीबायोटिक दवाइयों से कई मरीजों के पेट खराब हो गए हैं। ऐसे मरीजों पर विशेष निगाह रखी जार ही है। जलीलपुर, विकास खंड जलीलपुर के गांव गंधौर को वायरल फीवर , मलेरिया, टाइफाइड, तेज बुखार जैसी बीमारियों ने जकड़ रखा है। इन्हीं के चलते सात सितंबर को गंधौर निवासी दीप पुत्र संदीप पांच वर्ष की मौत हो गई । उसको तेज बुखार था । प्राइवेट चिकित्सक के यहां इलाज चल रहा था । पांच सितंबर को छोटी पुत्री कैलाश चार वर्ष और चार सितंबर को छोटे पुत्र बबलू 21वर्ष कि मौत हो चुकी है। एक सप्ताह में हुई तीन मौतों को लेकर गांव में दहशत है। इस समय गांव में दर्जनों लोग बुखार की चपेट में है। मनोज शर्मा, संदीप कुमार, कैलाश, बबलू आदि ने स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में भेजे जाने की मांग प्रशासन से की है।
वहीं मंडावर क्षेत्र में एक सप्ताह में बुखार से एक बच्चे समेत तीन लोगों की मौत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग अभी इन मौत से अनभिज्ञ है। ग्रामवासियों ने तीनों को डेंगू होने का आकांक्षा जताई है तथा स्वास्थ्य विभाग से कैंप लगाकर ग्रामीणों की जांच करने की मांग की है। गांवों में तीन मौतें होने से ग्रामीण भयभीत है। मंडावर के गांव खिरनी निवासी हनीफ तथा महानंद का पुत्र मिथि तथा गांव मानवाला निवासी करन पाल की पत्नी रीना कई दिनों से बुखार से पीड़ित थी। तीनों का उपचार पास के गांव गोपालपुर में एक निजी चिकित्सक के यहां चल रहा था। मिथि के परिजनों का कहना है कि तेज बुखार में ही चिकित्सक ने उनके बेटे को इंजेक्शन लगा दिया, हालत बिगड़ती देख चिकित्सक ने परिजनों कहीं ओर दिखाने को कहा। परिजन मिथि को बिजनौर के एक निजी अस्पताल में उपचार के लिए लाए, जहां उसकी मौत हो गई। परिजनों ने गोपालपुर के चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि तेज बुखार में चिकित्सक उनके पुत्र को इंजेक्शन नहीं लगाता तो वह बच सकता था। वहीं हनीफ की बुधवार व रीना की शुक्रवार को बुखार से मौत हो गई। ग्रामीणों ने तीनों को डेंगू की आशंका जताई है। स्वास्थ्य विभाग से गांवों में फॉगिंग, छिड़काव तथा कैंप लगवाने की मांग की है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में अभी कोई डेंगू का मरीज नहीं है। उधर नूरपुर में गांव रवाना शिकारपुर में बुखार से हुई नौ मौत के बाद अब गांव चेहला में भी बुखार से पांच मौत होने का मामला सामने आया है। सभी मौत पिछले 15 दिन में हुई हैं। बुखार से कई ग्रामीण पीड़ित हैं। गंभीर रूप से बीमारों का निजी चिकित्सकों से उपचार कराया जा रहा है।
गांव चेहला में पिछले 15 दिन में सुल्लड़, मुन्ने सिंह, फकीरा, मंगती देवी व छोटू की बुखार की चपेट में आकर मौत हो चुकी है। बल्ली सिंह, सीमा, बुध सिंह, लोकेंद्र, हरवंशा, पूनम देवी सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण बुखार से पीड़ित हैं। गंभीर रूप से बीमार कई लोगों का मुरादाबाद व मेरठ में उपचार चल रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक उन्होंने गांव में हुई मौतों व बीमारी के संबंध में सीएमओं को अवगत कराया था, जिसके बाद गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची, लेकिन औपचारिकता निभाकर वापस लौट गई। ग्रामवासियों ने गांव में टीम भेजकर मरीजों का इलाज कराने की मांग की है। नूरपुर के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. कुनाल कुमार का कहना है कि गांव में कैंप लगाकर 100 रक्त पट्टिकाएं बनाई गई हैं। जांच के बाद प्रभावी उपचार किया जाएगा। गांव में छिड़काव करने के लिए दवा भी दी गई है।
सिर चढ़कर बोल रहा वायरल फीवर
स्योहारा में गांव रवाना शिकारपुर में इन दिनों वायरल फीवर अपने चरम पर है। अफसाना 50 वर्ष, इकरा 16 वर्ष, उजमा 28 वर्ष, सदफ 16 वर्ष, सचिन 21 वर्ष, सोफिया 15 वर्ष, कमरजहां 45 वर्ष, मौहम्मद आमिर 19 वर्ष, रहमिया 23 वर्ष, नाहहिद परवीन 15 वर्ष, खतिजा खातून 50 वर्श, बिलकीस परवीन 50 वर्ष, अहुजर 15 वर्ष, नईमा, नाजिर, नजराना, असद, तब्बसुम, नासिर, नाजमा, फैमिदा, रहनुमा, जैफ, शहवाज, जिशान, कहकशां, शकीला को वायरल फीवर के चलते सीएचसी में भर्ती कराया गया है। सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. विशाल दिवाकर का कहना है कि इनके अतिरिक्त भी कई रोगी थे जिनको इलाज के बाद घर भेजा जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग की दो टीमों ने घर घर जाकर रोगियों की जांच की है। डा. दिवाकर ने बताया कि किसी की भी मौत डेंगू से नहीं हुई है। डा. दिवाकर का कहना है गांव में गंदगी बहुत है। इसके लिए गांव में लारवा मारने के लिए दवा गांव के प्रधान को दी गई लेकिन उसका छिड़काव नहीं हुआ, न ही गांव में फॉकिंग कराई गई है।
विज्ञापन
राजा का ताजपुर में गांव रवाना शिकारपुर में बुखार का प्रकोप जारी है। रोजाना बुखार के नए मरीज सामने आ रहे हैं। बृहस्पतिवार को गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम न पहुंचने पर भारी संख्या में मरीज सीएचसी पहुंचे। जिससे अस्पताल में बेड की कमी पड़ गई। चिकित्सकों ने एक-एक बेड पर दो-दो मरीजों को लेटाकर उपचार किया। उधर गांव में बुखार से नौ मौत होने के बावजूद भी जिला स्तरीय चिकित्सकों की टीम न पहुंचने से ग्रामीणों में रोष है।
विज्ञापन
उधर बृहस्पतिवार को गांव में स्वास्थ्य कर्मियों के न पहुंचने पर कमरजहां, उजमा, आसिफ, नासिर, नसीमा, नजराना, अरसद आदि बुखार से पीड़ित 40 मरीज सीएचसी पहुंचे। इतनी संख्या में एक साथ मरीजों के आने से अस्पताल में बेड कम पड़ गए और एक बेड पर दो-तीन मरीजों को लेटाकर उपचार किया गया।
विज्ञापन
सीएचसी प्रभारी डा. विशाल दिवाकर का कहना है कि जांच में गांव में डेंगू अथवा मलेरिया का कोई मरीज नहीं मिला है। बुखार से पीड़ित मरीजों का अस्पताल बुलाकर इलाज किया जा रहा है और अब बुखार पर कंट्रोल है। निजी चिकित्सकों द्वारा दी गई तेज एंटीबायोटिक दवाइयों से कई मरीजों के पेट खराब हो गए हैं। ऐसे मरीजों पर विशेष निगाह रखी जार ही है। जलीलपुर, विकास खंड जलीलपुर के गांव गंधौर को वायरल फीवर , मलेरिया, टाइफाइड, तेज बुखार जैसी बीमारियों ने जकड़ रखा है। इन्हीं के चलते सात सितंबर को गंधौर निवासी दीप पुत्र संदीप पांच वर्ष की मौत हो गई । उसको तेज बुखार था । प्राइवेट चिकित्सक के यहां इलाज चल रहा था । पांच सितंबर को छोटी पुत्री कैलाश चार वर्ष और चार सितंबर को छोटे पुत्र बबलू 21वर्ष कि मौत हो चुकी है। एक सप्ताह में हुई तीन मौतों को लेकर गांव में दहशत है। इस समय गांव में दर्जनों लोग बुखार की चपेट में है। मनोज शर्मा, संदीप कुमार, कैलाश, बबलू आदि ने स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में भेजे जाने की मांग प्रशासन से की है।
वहीं मंडावर क्षेत्र में एक सप्ताह में बुखार से एक बच्चे समेत तीन लोगों की मौत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग अभी इन मौत से अनभिज्ञ है। ग्रामवासियों ने तीनों को डेंगू होने का आकांक्षा जताई है तथा स्वास्थ्य विभाग से कैंप लगाकर ग्रामीणों की जांच करने की मांग की है। गांवों में तीन मौतें होने से ग्रामीण भयभीत है। मंडावर के गांव खिरनी निवासी हनीफ तथा महानंद का पुत्र मिथि तथा गांव मानवाला निवासी करन पाल की पत्नी रीना कई दिनों से बुखार से पीड़ित थी। तीनों का उपचार पास के गांव गोपालपुर में एक निजी चिकित्सक के यहां चल रहा था। मिथि के परिजनों का कहना है कि तेज बुखार में ही चिकित्सक ने उनके बेटे को इंजेक्शन लगा दिया, हालत बिगड़ती देख चिकित्सक ने परिजनों कहीं ओर दिखाने को कहा। परिजन मिथि को बिजनौर के एक निजी अस्पताल में उपचार के लिए लाए, जहां उसकी मौत हो गई। परिजनों ने गोपालपुर के चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि तेज बुखार में चिकित्सक उनके पुत्र को इंजेक्शन नहीं लगाता तो वह बच सकता था। वहीं हनीफ की बुधवार व रीना की शुक्रवार को बुखार से मौत हो गई। ग्रामीणों ने तीनों को डेंगू की आशंका जताई है। स्वास्थ्य विभाग से गांवों में फॉगिंग, छिड़काव तथा कैंप लगवाने की मांग की है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में अभी कोई डेंगू का मरीज नहीं है। उधर नूरपुर में गांव रवाना शिकारपुर में बुखार से हुई नौ मौत के बाद अब गांव चेहला में भी बुखार से पांच मौत होने का मामला सामने आया है। सभी मौत पिछले 15 दिन में हुई हैं। बुखार से कई ग्रामीण पीड़ित हैं। गंभीर रूप से बीमारों का निजी चिकित्सकों से उपचार कराया जा रहा है।
गांव चेहला में पिछले 15 दिन में सुल्लड़, मुन्ने सिंह, फकीरा, मंगती देवी व छोटू की बुखार की चपेट में आकर मौत हो चुकी है। बल्ली सिंह, सीमा, बुध सिंह, लोकेंद्र, हरवंशा, पूनम देवी सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण बुखार से पीड़ित हैं। गंभीर रूप से बीमार कई लोगों का मुरादाबाद व मेरठ में उपचार चल रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक उन्होंने गांव में हुई मौतों व बीमारी के संबंध में सीएमओं को अवगत कराया था, जिसके बाद गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची, लेकिन औपचारिकता निभाकर वापस लौट गई। ग्रामवासियों ने गांव में टीम भेजकर मरीजों का इलाज कराने की मांग की है। नूरपुर के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. कुनाल कुमार का कहना है कि गांव में कैंप लगाकर 100 रक्त पट्टिकाएं बनाई गई हैं। जांच के बाद प्रभावी उपचार किया जाएगा। गांव में छिड़काव करने के लिए दवा भी दी गई है।
सिर चढ़कर बोल रहा वायरल फीवर
स्योहारा में गांव रवाना शिकारपुर में इन दिनों वायरल फीवर अपने चरम पर है। अफसाना 50 वर्ष, इकरा 16 वर्ष, उजमा 28 वर्ष, सदफ 16 वर्ष, सचिन 21 वर्ष, सोफिया 15 वर्ष, कमरजहां 45 वर्ष, मौहम्मद आमिर 19 वर्ष, रहमिया 23 वर्ष, नाहहिद परवीन 15 वर्ष, खतिजा खातून 50 वर्श, बिलकीस परवीन 50 वर्ष, अहुजर 15 वर्ष, नईमा, नाजिर, नजराना, असद, तब्बसुम, नासिर, नाजमा, फैमिदा, रहनुमा, जैफ, शहवाज, जिशान, कहकशां, शकीला को वायरल फीवर के चलते सीएचसी में भर्ती कराया गया है। सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. विशाल दिवाकर का कहना है कि इनके अतिरिक्त भी कई रोगी थे जिनको इलाज के बाद घर भेजा जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग की दो टीमों ने घर घर जाकर रोगियों की जांच की है। डा. दिवाकर ने बताया कि किसी की भी मौत डेंगू से नहीं हुई है। डा. दिवाकर का कहना है गांव में गंदगी बहुत है। इसके लिए गांव में लारवा मारने के लिए दवा गांव के प्रधान को दी गई लेकिन उसका छिड़काव नहीं हुआ, न ही गांव में फॉकिंग कराई गई है।