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बुखार से युवक की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sat, 29 Oct 2016 12:10 AM IST
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कासमपुरगढ़ी में बुखार से मरने वालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कासमपुरगढ़ी में बुखार से एक युवक की मौत हो गई।
आए दिन हो रही मौतों में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भी जमकर उजागर हो रही हैं, बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग हरकत में नहीं आ रहा है। युवक की मौत से परिवार में कोहराम मचा है। अफजलगढ़ क्षेत्र में बुखार से अब तक आधा दर्जन से ज्यादा मरीजों की मौत हो चुकी है। कासमपुरगढ़ी निवासी शाजिद पुत्र अतीक (25) की शुक्रवार को मौत हो गई। वह पिछले एक सप्ताह से बुखार से ग्रसित था। सरकारी से निजी अस्पतालों में उपचार के बाद भी परिजन उसकी जान नहीं बचा सके। हल्द्वानी (उत्तराखंड) के एक अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। युवक की विवाह एक साल पहले हुआ था। मृतक अपने पीछे एक बच्चा छोड़ गया है। आए दिन हो रही मौत में स्वास्थ्य विभाग की अकर्मण्यता उजागर हो रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पतालों से निकलकर गांवों में कैंप लगाने में फ्लाप साबित हो रही है। अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। अस्पतालों में मरीजों को सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा है। स्थिति यह है कि मरीजों को भर्ती तक नहीं किया जा रहा है। दवाइयां देकर छुट्टी कर दी जाती है। उधर, पीएचसी प्रभारी रजनीश सिंह का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है।
गांव में टीम भेजकर परीक्षण कराया जाएगा ताकि कुछ राहत दिलाई जा सके।
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आए दिन हो रही मौतों में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भी जमकर उजागर हो रही हैं, बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग हरकत में नहीं आ रहा है। युवक की मौत से परिवार में कोहराम मचा है। अफजलगढ़ क्षेत्र में बुखार से अब तक आधा दर्जन से ज्यादा मरीजों की मौत हो चुकी है। कासमपुरगढ़ी निवासी शाजिद पुत्र अतीक (25) की शुक्रवार को मौत हो गई। वह पिछले एक सप्ताह से बुखार से ग्रसित था। सरकारी से निजी अस्पतालों में उपचार के बाद भी परिजन उसकी जान नहीं बचा सके। हल्द्वानी (उत्तराखंड) के एक अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। युवक की विवाह एक साल पहले हुआ था। मृतक अपने पीछे एक बच्चा छोड़ गया है। आए दिन हो रही मौत में स्वास्थ्य विभाग की अकर्मण्यता उजागर हो रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पतालों से निकलकर गांवों में कैंप लगाने में फ्लाप साबित हो रही है। अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। अस्पतालों में मरीजों को सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा है। स्थिति यह है कि मरीजों को भर्ती तक नहीं किया जा रहा है। दवाइयां देकर छुट्टी कर दी जाती है। उधर, पीएचसी प्रभारी रजनीश सिंह का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है।
गांव में टीम भेजकर परीक्षण कराया जाएगा ताकि कुछ राहत दिलाई जा सके।