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जिले के एक मात्र संस्कृत विद्यालय के दिन बहुरेंगे
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जिले के एक मात्र संस्कृत विद्यालय के दिन बहुरेंगे
बिजनौर। जिले के एक मात्र संस्कृत विद्यालय के दिन बहुरेंगे। संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों के भरने का रास्ता साफ हो गया है। अब जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति शुरू होगी। इससे संस्कृत विद्यालयों की चरमराई पढ़ाई व्यवस्था में सुधार होगा। संस्कृत विद्यालयों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या बढ़ेगी।
संस्कृत भाषा को सभी भाषाओं की जननी कहा जाता है, लेकिन संस्कृत विषय की पढ़ाई को सार्थक प्रयास नहीं हुए हैं। संस्कृत विद्यालय है, लेकिन विद्यालयों में शिक्षक नहीं हैं। शिक्षक की कमी से पढ़ाई-लिखाई पर असर पड़ा है। अब शासन ने संस्कृत विद्यालयों की सुध ली है। सूबे की सरकार ने संस्कृत विद्यालयों के रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति करने का फैसला किया है। नियुक्ति की प्रक्रिया भी तय हो गई है।
जिले में एक मात्र अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालय चांदपुर में है। बिहारी संस्कृत विद्यालय चांदपुर की स्थापना वर्ष 1920 में हुई थी। विद्यालय दो हिस्सों में संचालित हैं। पहला भाग कक्षा छह से बारह तक तथा दूसरा भाग स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं की पढ़ाई को है। माध्यमिक स्तर पर शिक्षकों की नियुक्ति की घोषणा से शिक्षक खुश हैं। प्रधानाचार्य डा. पाठक ने बताया कि विद्यालय में शासन से प्रधानाचार्य समेत शिक्षकों के पांच पद स्वीकृत हैं। प्रधानाचार्य व एक शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षकों के बढ़ने से पढ़ाई की स्थिति सुधरेगी।
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बिहारी संस्कृत विद्यालय से पढ़कर निकली हैं अनेक प्रतिभाएं
बिहारी संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य डा. पाठक बताते हैं कि विद्यालय स्थापना के 100 सालों में अनेक प्रतिभाएं पढ़कर निकली हैं। बताया कि कस्बा झालू निवासी देवेंद्र कुमार गुप्ता ने यही शिक्षा प्राप्त की है। वह अमेरिका, नाइजीरिया, इथोपिया देशों के विवि में प्रोफेसर रहे हैं। चांदपुर के कैलाश चंद्र मित्तल इसी विद्यालय में पढ़कर बिजनेस से जुड़े। बिजनौर के डा. कपिल कुमार शर्मा व सिकंदरपुर के डा. रामकुमार शर्मा की गिनती अंगुलियों पर गिने जाने वाले डाक्टरों में है। अलावलपुर के राजीव शर्मा सेना में अधिकारी रहे हैं। नजीबाबाद की डा. अर्चना कुंतल व आयुशी राना मेरठ में प्राध्यापक रही है। बताया कि 100 सालों के मेधावी पुरातन छात्रों की लंबी फेहरिस्त है।
मुस्लिम युवाओं की पहली पसंद रहा संस्कृत विद्यालय
प्रधानाचार्य डा. पाठक बताते हैं की बिहारी संस्कृत विद्यालय सामाजिक समभाव का केंद्र रहा है। अनेक मुस्लिम युवाओं ने विद्यालय से पढ़ाई की तथा प्रगति करते हुए ऊंचे पदों पर पहुंचे। जिले के युवक यही पढ़ने आते थे। इनमें प्रमुख रूप से नजीबाबाद के जरीफुद्दीन पंचायतीराज विभाग में अधिकारी रहे जबकि सुजात अली की गिनती प्रसिद्ध वकीलों में है।
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बिजनौर। जिले के एक मात्र संस्कृत विद्यालय के दिन बहुरेंगे। संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों के भरने का रास्ता साफ हो गया है। अब जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति शुरू होगी। इससे संस्कृत विद्यालयों की चरमराई पढ़ाई व्यवस्था में सुधार होगा। संस्कृत विद्यालयों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या बढ़ेगी।
संस्कृत भाषा को सभी भाषाओं की जननी कहा जाता है, लेकिन संस्कृत विषय की पढ़ाई को सार्थक प्रयास नहीं हुए हैं। संस्कृत विद्यालय है, लेकिन विद्यालयों में शिक्षक नहीं हैं। शिक्षक की कमी से पढ़ाई-लिखाई पर असर पड़ा है। अब शासन ने संस्कृत विद्यालयों की सुध ली है। सूबे की सरकार ने संस्कृत विद्यालयों के रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति करने का फैसला किया है। नियुक्ति की प्रक्रिया भी तय हो गई है।
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जिले में एक मात्र अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालय चांदपुर में है। बिहारी संस्कृत विद्यालय चांदपुर की स्थापना वर्ष 1920 में हुई थी। विद्यालय दो हिस्सों में संचालित हैं। पहला भाग कक्षा छह से बारह तक तथा दूसरा भाग स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं की पढ़ाई को है। माध्यमिक स्तर पर शिक्षकों की नियुक्ति की घोषणा से शिक्षक खुश हैं। प्रधानाचार्य डा. पाठक ने बताया कि विद्यालय में शासन से प्रधानाचार्य समेत शिक्षकों के पांच पद स्वीकृत हैं। प्रधानाचार्य व एक शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षकों के बढ़ने से पढ़ाई की स्थिति सुधरेगी।
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बिहारी संस्कृत विद्यालय से पढ़कर निकली हैं अनेक प्रतिभाएं
बिहारी संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य डा. पाठक बताते हैं कि विद्यालय स्थापना के 100 सालों में अनेक प्रतिभाएं पढ़कर निकली हैं। बताया कि कस्बा झालू निवासी देवेंद्र कुमार गुप्ता ने यही शिक्षा प्राप्त की है। वह अमेरिका, नाइजीरिया, इथोपिया देशों के विवि में प्रोफेसर रहे हैं। चांदपुर के कैलाश चंद्र मित्तल इसी विद्यालय में पढ़कर बिजनेस से जुड़े। बिजनौर के डा. कपिल कुमार शर्मा व सिकंदरपुर के डा. रामकुमार शर्मा की गिनती अंगुलियों पर गिने जाने वाले डाक्टरों में है। अलावलपुर के राजीव शर्मा सेना में अधिकारी रहे हैं। नजीबाबाद की डा. अर्चना कुंतल व आयुशी राना मेरठ में प्राध्यापक रही है। बताया कि 100 सालों के मेधावी पुरातन छात्रों की लंबी फेहरिस्त है।
मुस्लिम युवाओं की पहली पसंद रहा संस्कृत विद्यालय
प्रधानाचार्य डा. पाठक बताते हैं की बिहारी संस्कृत विद्यालय सामाजिक समभाव का केंद्र रहा है। अनेक मुस्लिम युवाओं ने विद्यालय से पढ़ाई की तथा प्रगति करते हुए ऊंचे पदों पर पहुंचे। जिले के युवक यही पढ़ने आते थे। इनमें प्रमुख रूप से नजीबाबाद के जरीफुद्दीन पंचायतीराज विभाग में अधिकारी रहे जबकि सुजात अली की गिनती प्रसिद्ध वकीलों में है।