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Bijnor News: बीएड संकाय की स्थिति बदहाल, 50 में मात्र 10 छात्र-छात्राएं पढ़ते मिले
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- आठ शिक्षकों में केवल पांच शिक्षक तैनात, तीन के पद खाली
- बीएड संकाय के विभाग अध्यक्ष ने छोड़ी नौकरी
संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर। आरएसएम डिग्री कॉलेज में वित्तविहीन स्तर पर संचालित बीएड संकाय और कक्षाओं स्थिति बहुत दयनीय है। बीएड प्रथम सेमेस्टर में 50 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। लेकिन शुक्रवार को केवल दस छात्र-छात्राएं ही कक्षा में मौजूद मिले। बाकी छात्र नदारद रहे।
महाविद्यालय प्रबंधन तंत्र की ओर से आरएसएम डिग्री कॉलेज में वित्त विहीन स्तर पर साल 2011 में बीएड पाठ्यक्रम को लागू किया गया था। शुरुआत में बहुत अच्छे ढंग से बीएड पाठ्यक्रम संचालित रहा। लेकिन पिछले कुछ समय से दिक्कत आ रही हैं। 2025 से पहले छात्र-छात्राओं के पंजीकरण में भारी गिरावट आई थी। लेकिन वर्तमान सत्र में छात्र-छात्राओं के पंजीकरण की संख्या 50 है।
महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बताया कि महाविद्यालय प्रबंध तंत्र की ओर से बीएड संकाय की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जब छात्र संख्या घट गई थी तब महाविद्यालय प्रबंधन ने शिक्षकों के निर्धारित वेतन वेतन में 15 से 20 प्रतिशत कटौती कर दी थी। जिससे शिक्षकों ने भी रुचि से काम करना बंद कर दिया। जब प्रयास किए जाने पर महाविद्यालय प्रबंध तंत्र ने नहीं सुनी तो पिछले दिनों बीएड संकाय में नियुक्त विभागाध्यक्ष यहां से इस्तीफा देकर अन्यत्र कॉलेज में चले गए। बताया गया कि बीएड संकाय में कुल आठ शिक्षक होने चाहिए। इनमें केवल पांच शिक्षक ही कार्यरत हैं। तीन शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं।
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वेतन बढ़ोतरी के लिए किया जा रहा प्रयास
महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर डॉक्टर रश्मि शर्मा रावल का कहना है कि 2025 के बाद बीएड संकाय की स्थिति में बेहतर सुधार हुआ है। पहले बच्चों की संख्या कम थी। इस बार लक्ष्य के अनुसार 50 है। बच्चों की संख्या घट जाने की वजह से शिक्षकों की वेतन में कटौती कर दी गई थी। अब उनके स्तर से इस कटौती को पूरा कर और वेतन में बढ़ोतरी कराने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है।
समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण के कारण घटी संख्या
बीएड संकाय के प्रभारी रामगोपाल सिंह व गोविंद कुमार ने बताया कि जंभेश्वर विश्वविद्यालय मुरादाबाद की ओर से बीएड छात्र-छात्राओं के समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण का कार्यक्रम 8 अक्तूबर से शुरू हुआ है। जो 12 अक्तूबर तक चलेगा। उन्होंने बताया कि पंजीकरण कराने के चक्कर में छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। अन्य दिनों में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति शत प्रतिशत रहती है।
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- बीएड संकाय के विभाग अध्यक्ष ने छोड़ी नौकरी
संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर। आरएसएम डिग्री कॉलेज में वित्तविहीन स्तर पर संचालित बीएड संकाय और कक्षाओं स्थिति बहुत दयनीय है। बीएड प्रथम सेमेस्टर में 50 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। लेकिन शुक्रवार को केवल दस छात्र-छात्राएं ही कक्षा में मौजूद मिले। बाकी छात्र नदारद रहे।
महाविद्यालय प्रबंधन तंत्र की ओर से आरएसएम डिग्री कॉलेज में वित्त विहीन स्तर पर साल 2011 में बीएड पाठ्यक्रम को लागू किया गया था। शुरुआत में बहुत अच्छे ढंग से बीएड पाठ्यक्रम संचालित रहा। लेकिन पिछले कुछ समय से दिक्कत आ रही हैं। 2025 से पहले छात्र-छात्राओं के पंजीकरण में भारी गिरावट आई थी। लेकिन वर्तमान सत्र में छात्र-छात्राओं के पंजीकरण की संख्या 50 है।
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महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बताया कि महाविद्यालय प्रबंध तंत्र की ओर से बीएड संकाय की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जब छात्र संख्या घट गई थी तब महाविद्यालय प्रबंधन ने शिक्षकों के निर्धारित वेतन वेतन में 15 से 20 प्रतिशत कटौती कर दी थी। जिससे शिक्षकों ने भी रुचि से काम करना बंद कर दिया। जब प्रयास किए जाने पर महाविद्यालय प्रबंध तंत्र ने नहीं सुनी तो पिछले दिनों बीएड संकाय में नियुक्त विभागाध्यक्ष यहां से इस्तीफा देकर अन्यत्र कॉलेज में चले गए। बताया गया कि बीएड संकाय में कुल आठ शिक्षक होने चाहिए। इनमें केवल पांच शिक्षक ही कार्यरत हैं। तीन शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं।
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वेतन बढ़ोतरी के लिए किया जा रहा प्रयास
महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर डॉक्टर रश्मि शर्मा रावल का कहना है कि 2025 के बाद बीएड संकाय की स्थिति में बेहतर सुधार हुआ है। पहले बच्चों की संख्या कम थी। इस बार लक्ष्य के अनुसार 50 है। बच्चों की संख्या घट जाने की वजह से शिक्षकों की वेतन में कटौती कर दी गई थी। अब उनके स्तर से इस कटौती को पूरा कर और वेतन में बढ़ोतरी कराने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है।
समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण के कारण घटी संख्या
बीएड संकाय के प्रभारी रामगोपाल सिंह व गोविंद कुमार ने बताया कि जंभेश्वर विश्वविद्यालय मुरादाबाद की ओर से बीएड छात्र-छात्राओं के समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण का कार्यक्रम 8 अक्तूबर से शुरू हुआ है। जो 12 अक्तूबर तक चलेगा। उन्होंने बताया कि पंजीकरण कराने के चक्कर में छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। अन्य दिनों में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति शत प्रतिशत रहती है।