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दम तोड़ रहा राष्ट्रपति पुरस्कार दिलाने वाला मिट्टी बर्तन कारोबार

Sat, 05 Sep 2020 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2020 12:03 AM IST
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The clay pot business is dying
नजीबाबाद - माटी कलाकार सौराज प्रजापति। - फोटो : NAZIBABAD
दम तोड़ रहा मिट्टी बर्तन कारोबार
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नजीबाबाद। नगर को राष्ट्रपति पुरस्कार का सम्मान दिलाने वाला सुराही उद्योग दम तोड़ रहा है। सरकारी उपेक्षा का शिकार प्रजापति समाज के कारीगरों का मिट्टी से मोह भंग हो चुका है। समाज के लोग रोजी-रोटी के लिए अब दूसरे कारोबार से जुड़ रहे हैं।
नवाब नजीबुद्दौला के बसाए नजीबाबाद का मिट्टी के बर्तन का कारोबार विश्व प्रसिद्ध रहा है। सुराही उद्योग के चलते एक बाजार का नाम आज भी सुराही बाजार है। वर्ष 1956 में मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की हस्त एवं शिल्प कला प्रदर्शनी में नजीबाबाद के कारीगर रामचंद्र ने तली से पानी भरने वाली अद्वितीय सुराही प्रदर्शित कर राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद के हाथों राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त किया।
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मिट्टी के बर्तनों की कारीगरी के लिए दूर-दूर तक पहचान रखने वाले प्रजापति समाज के भगवान दास, बुद्ध सिंह, शंभू सिंह, स्वामी, जेठमल, रोशनलाल, हरि सिंह, प्यारे लाल ने अंतिम सांसों तक अपनी बेहतरीन कलाकारी द्वारा मिट्टी कला उद्योग को पहचान दिलाई।
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मिट्टी बर्तन कारीगर स्व.भगवान दास से विरासत में मिली मिट्टी के बर्तन बनाने की कला को सौराज सिंह ने बखूबी निभाया। स्नातक शिक्षित 70 वर्षीय सौराज बताते हैं कि 70 के दशक में नजीबाबाद में दो लीटर से आठ लीटर तक निर्मित लगभग 100 सुराहियों की प्रतिदिन ब्रिकी होती थी। कारीगर शेर, गाय, मोर, तोता, बत्तख मुखी और चकईया सुराहियां बनाते थे। करीब दो दशक से सुराही उद्योग दम तोड़ चुका है।
चिकनी मिट्टी, कोयला, मृगान, ईंधन मिट्टी के बर्तन बनाने के कच्चे माल पर मंहगाई की मार सहित कई चुनौतियों के चलते प्रजापति समाज को मिट्टी के बर्तन बनाने के पुश्तैनी काम को छोड़ना पड़ा है। चंद कारीगर ही नजीबाबाद के विश्व विख्यात माटी कला को जीवित रख पा रहे हैं।

इतिहास बन चुके मिट्टी के बर्तन
नजीबाबाद। नजीबाबाद में माटीकला से जुड़े कारीगरों ने मिट्टी के एक से एक बर्तन तैयार कर नगर को देश-विदेश में पहचान दिलाई। सुराही निर्माण के साथ मिट्टी के लैंप, घड़ी शोकेेस, हुक्के की चिलम, घड़ा, कुल्हड़, दीये, दही हांडी, खिलौने सहित कई प्रकार के बर्तनों का निर्माण होता था। इनमें से चंद मिट्टी के बर्तनों को छोड़कर बाकी इतिहास बन चुके हैं। दम तोड़ती माटी कला अब देहातों तक सीमित रह गई है।

नजीबाबाद में संजोकर रखी गई सुराही और मिट्टी के बर्तन।

नजीबाबाद में संजोकर रखी गई सुराही और मिट्टी के बर्तन।- फोटो : NAZIBABAD

नजीबाबाद में संजोकर रखी गई डबल गले की आकर्षित सुराही।

नजीबाबाद में संजोकर रखी गई डबल गले की आकर्षित सुराही।- फोटो : NAZIBABAD

नजीबाबाद - प्रसिद्घ माटी कलाकार स्व.भगवान दास प्रजापति।

नजीबाबाद - प्रसिद्घ माटी कलाकार स्व.भगवान दास प्रजापति।- फोटो : NAZIBABAD

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