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क्रांतिकारी बिजनौर की ओर बढ़ते तो कुएं में फेंक दिया था खजाना

Wed, 11 May 2022 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 11 May 2022 12:15 AM IST
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The British had thrown the treasure in the well of the Collectorate
बिजनौर। यूं तो 1857 की क्रांति की ज्वाला मेरठ से भड़की थी, पर बिजनौर पहुंचने में इसे मात्र तीन दिन ही लगे थे। उसी दिन से बिजनौर में भी क्रांतिकारियों की बड़ी टोली ने अंग्रेजी नींव हिलाने की तैयारी शुरू कर दी और बिजनौर जेल पर हमला कर दिया। क्रांतिकारियों के हमले को देख अंग्रेजों ने बिजनौर ट्रेजरी में रखे खजाने को कलक्ट्रेट में ही बने एक गहरे कुएं में डाल दिया। ताकि वह क्रांतिकारियों के हाथ न लगे। क्रांतिकारियों ने बिजनौर जेल पर हमला कर वहां से 314 कैदियों को छुड़ा लिया। हालांकि अंग्रेजों की ओर से की गई फायरिंग में सात कैदियों की मौत हो गई, जबकि 215 गंगा खादर के रास्ते भाग निकले। 126 कैदियों को अंग्रेजों ने पकड़ लिया था। क्रांति से जुड़ी इसकी पूरी कहानी जिला गजेटियर में दर्ज है, जो बिजनौर में क्रांति की गौरवगाथा को अपने में समेटे हुए है।
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जिला गजेटियर में दर्ज है कि 13 मई, 1857 को बिजनौर तक खबर पहुंची कि मेरठ में स्वतंत्रता के लिए एक संगठित संघर्ष शुरू हो गया है, जिसका असर बिजनौर तक पहुंच गया है। जिलेभर में क्रांतिकारी एकत्रित हो रहे हैं। 16 मई को बिजनौर से 8 मील के दायरे में परगना दारानगर के झाल और ओलेंडा गांव में उपद्रव हो गया। उसके बाद शाहबाजपुर खद्दर गांव पर भी हमला हो गया। इसके बाद क्रांति की चिंगारी मात्र दस दिनों में ही ज्वाला बन चुकी थी। क्रांतिकारियों ने 21 मई को नगीना में तहसील के खजाने को लूट लिया। उस समय वहां से करीब दस हजार रुपये क्रांतिकारी अपने साथ ले गए।
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गार्ड राम स्वरूप ने की क्रांतिकारियों की मदद
जिला गजेटियर में लिखा है कि उधर नगीना में क्रांतिकारियों ने तहसील का खजाना लूटा, वहीं इधर बिजनौर में जेल पर क्रांतिकारियों ने हमला कर दिया। गार्ड राम स्वरूप की मदद से क्रांतिकारियों ने दोपहर के समय 341 कैदियों को छुड़ा लिया। इसका पता चलते ही मजिस्ट्रेट एलेग्जेंडर शेक्सपियर, संयुक्त मजिस्ट्रेट के साथ वहां पहुंचे और सीधी फायरिंग शुरू करा दी। इसमें सात कैदियों की मौत हो गई, जबकि अंग्रेजों ने 126 को पकड़ लिया। शेष 215 ने गंगा खादर के रास्ते फरार हो गए।
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डर गए अंग्रेज अफसर, कुएं में फेंक दिया खजाना
जिला गजेटियर में लिखा है कि जेल पर हमला होने के बाद अंग्रेज अफसरों को कलक्ट्रेट में बने ट्रेजरी खजाने के लूटने का खतरा सताने लगा। इस खजाने को बचाने के लिए अंग्रेजों ने नकदी और कीमती सामान को कलक्ट्रेट में ही बने एक गहरे कुएं में फेंक दिया था। हालांकि इसके बाद क्रांतिकारियों की मदद रहे रहे गुर्जरों, बंजारों, मेवातियों पर अंग्रेजों ने खूब जुर्म ढाए। 26 मई को अंग्रेजों ने चांदपुर की ओर कूच किया और रास्ते में पड़ने वाले मेवाती गांव को ही जला दिया। 28 मई को मुरादाबाद से अंग्रेजी सेना की 40 घोड़ों की एक टुकड़ी और काफी संख्या में सिपाही बिजनौर पहुंच गए। इसके बाद अंग्रेजों ने भोजपुर, जहांगीरपुर, शेखूपुरा, हुसैनपुरा, अमीनपुर और नारायणपुर के गांवों में भी आग लगा दी, जिसने क्रांतिकारियों के गुस्से को और भड़का दिया।
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