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सीसीएल की राशि भी बैंक ने कर्ज के बकाए में काटी
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सीसीएल की राशि भी बैंक ने कर्ज के बकाए में काटी
बिजनौर। कोरोना की वजह से चीनी नहीं बिकी तो बैंकों ने चीनी मिलों को दिए जा रहे कर्ज से ही अपनी बकाया वसूलनी शुरू कर दी है। इससे चीनी मिलों को ज्यादा पैसा नहीं मिला है। इससे किसानों का भुगतान प्रभावित हो रहा है। इस साल भी बैंक को 35 करोड़ रुपये का सीसीएल मंजूर हुआ है।
बिजनौर चीनी मिल ने पिछले साल किसानों के गन्ना भुगतान के लिए उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक से सीसीएल लिया था। इसमें चीनी बेचकर बैंक से ऋण लिया गया था। ऋण की राशि चीनी बेचकर बैंक को दी जाती है। कोरोना काल में चीनी नहीं बिकी तो बिजनौर चीनी मिल बैंक का कर्ज नहीं उतार पाई। इस साल भी बैंक को 35 करोड़ रुपये का सीसीएल मंजूर हुआ है। लेकिन बैंक ने मिल को केवल पांच करोड़ रुपये ही दिए हैं। 30 करोड़ रुपये अपनी पुरानी किस्त बताकर रोक लिए हैं। मिल के प्रशासनिक अधिकारी एके सिंह ने बताया कि 35 करोड़ का सीसीएल मंजूर होने के बाद भी मिल को केवल पांच करोड़ रुपया ही मिलेगा। जो भी पैसा मिलेगा उससे किसानों का भुगतान किया जाएगा। मिल के पास करीब 62 करोड़ की चीनी बची हुई है।
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बिजनौर। कोरोना की वजह से चीनी नहीं बिकी तो बैंकों ने चीनी मिलों को दिए जा रहे कर्ज से ही अपनी बकाया वसूलनी शुरू कर दी है। इससे चीनी मिलों को ज्यादा पैसा नहीं मिला है। इससे किसानों का भुगतान प्रभावित हो रहा है। इस साल भी बैंक को 35 करोड़ रुपये का सीसीएल मंजूर हुआ है।
बिजनौर चीनी मिल ने पिछले साल किसानों के गन्ना भुगतान के लिए उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक से सीसीएल लिया था। इसमें चीनी बेचकर बैंक से ऋण लिया गया था। ऋण की राशि चीनी बेचकर बैंक को दी जाती है। कोरोना काल में चीनी नहीं बिकी तो बिजनौर चीनी मिल बैंक का कर्ज नहीं उतार पाई। इस साल भी बैंक को 35 करोड़ रुपये का सीसीएल मंजूर हुआ है। लेकिन बैंक ने मिल को केवल पांच करोड़ रुपये ही दिए हैं। 30 करोड़ रुपये अपनी पुरानी किस्त बताकर रोक लिए हैं। मिल के प्रशासनिक अधिकारी एके सिंह ने बताया कि 35 करोड़ का सीसीएल मंजूर होने के बाद भी मिल को केवल पांच करोड़ रुपया ही मिलेगा। जो भी पैसा मिलेगा उससे किसानों का भुगतान किया जाएगा। मिल के पास करीब 62 करोड़ की चीनी बची हुई है।
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