{"_id":"62659a08d3c032033330e865","slug":"technical-faults-of-roads-are-also-taking-lives-bijnor-news-mrt585892956","type":"story","status":"publish","title_hn":"सड़कों की तकनीकी खामी भी ले रही जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सड़कों की तकनीकी खामी भी ले रही जान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सड़कों की तकनीकी खामी भी ले रही जान
बिजनौर। सिर्फ तेज रफ्तार ही नहीं बल्कि सड़क की तकनीकी खामियां भी जान ले लेती हैं। कहीं तीव्र मोड़, कहीं सड़क की दबक से वाहनों का नियंत्रण संभाले नहीं संभालता। हादसा होने के बाद वजह तमाक बता दी जाती है। लेकिन कहीं भी सड़क की खामी का जिक्र नहीं हो पाता।
जिले में फिलहाल दो हाईवे को फोरलेन किया जा रहा है। खैर हाइवे पर तो हादसा होने की जिम्मेदार खामियां नहीं छोड़ी जाती लेकिन बाकी जो सड़कें हैं, वे पुराने ढर्रे पर बनी हुई है। जिले की तमाम सड़कों में तीव्र मोड़ देखने को मिल जाएंग। कुछ जगहों पर मोड़ में सड़क का एक तरफा ढलान भी नहीं रहता है। जिससे तेजी गति में वाहन नहीं मुड़ सकता। तेजी गति में वाहन मोड़ा तो हादसा होना तय है। इसके अलावा ग्रामीण संपर्क मार्ग और लिंक मार्ग में तकनीकी खामियां रह जाती है। गड्ढों में भी हादसे होते हैं। उधर सड़क की दबक में भी वाहन उछल जाने से हादसा होता है।
15 महीनों में चली गई 416 लोगों की जान
जिले में पंद्रह महीनों के अंतराल में 634 सड़क हादसे हुए हैं। जिनमें 416 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। वहीं 481 लोग घायल हुए हैं। बता दें कि पिछले साल 313 लोगों की जान हादसों में चली गई थी। जबकि इस साल 113 लोगों की मौत हुई है।
विज्ञापन
सड़क में गड्ढों और तीव्र मोड़ आदि की वजह से होने हादसे की जगहों को समय समय पर चिन्हित कर संबंधित विभाग को अवगत कराया जाता है। सड़क सुरक्षा सप्ताह में भी इसकी समीक्षा होती है।
-डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी
विज्ञापन
बिजनौर। सिर्फ तेज रफ्तार ही नहीं बल्कि सड़क की तकनीकी खामियां भी जान ले लेती हैं। कहीं तीव्र मोड़, कहीं सड़क की दबक से वाहनों का नियंत्रण संभाले नहीं संभालता। हादसा होने के बाद वजह तमाक बता दी जाती है। लेकिन कहीं भी सड़क की खामी का जिक्र नहीं हो पाता।
जिले में फिलहाल दो हाईवे को फोरलेन किया जा रहा है। खैर हाइवे पर तो हादसा होने की जिम्मेदार खामियां नहीं छोड़ी जाती लेकिन बाकी जो सड़कें हैं, वे पुराने ढर्रे पर बनी हुई है। जिले की तमाम सड़कों में तीव्र मोड़ देखने को मिल जाएंग। कुछ जगहों पर मोड़ में सड़क का एक तरफा ढलान भी नहीं रहता है। जिससे तेजी गति में वाहन नहीं मुड़ सकता। तेजी गति में वाहन मोड़ा तो हादसा होना तय है। इसके अलावा ग्रामीण संपर्क मार्ग और लिंक मार्ग में तकनीकी खामियां रह जाती है। गड्ढों में भी हादसे होते हैं। उधर सड़क की दबक में भी वाहन उछल जाने से हादसा होता है।
विज्ञापन
15 महीनों में चली गई 416 लोगों की जान
जिले में पंद्रह महीनों के अंतराल में 634 सड़क हादसे हुए हैं। जिनमें 416 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। वहीं 481 लोग घायल हुए हैं। बता दें कि पिछले साल 313 लोगों की जान हादसों में चली गई थी। जबकि इस साल 113 लोगों की मौत हुई है।
विज्ञापन
सड़क में गड्ढों और तीव्र मोड़ आदि की वजह से होने हादसे की जगहों को समय समय पर चिन्हित कर संबंधित विभाग को अवगत कराया जाता है। सड़क सुरक्षा सप्ताह में भी इसकी समीक्षा होती है।
-डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी