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ये लो खर्चा-गाड़ी, बिगाड़ दो दूसरे का समीकरण
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ये लो खर्चा-गाड़ी, बिगाड़ दो दूसरे का समीकरण
बिजनौर। खर्च भी लो, घूमने के लिए गाड़ी भी लो और बिगाड़ दो मजबूत उम्मीदवार का खेल। जी हां, जिले की एक विधानसभा में ऐसा दांव भी खेला जा रहा है। एक उम्मीदवार अपनी जीत की राह कमजोर दल का सियासी कद बढ़ाकर बनाने में लगे हैं, जिससे दूसरे के मजबूत वोटरों में सेंधमारी कराई जा सके।
सियासी दांव पेंच भी बड़े अजीब होते हैं, इसमें खुद को मजबूत बनाने के लिए दूसरे को कमजोर भी कर दिया जाता है। एक विधानसभा सीट में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। बताया जा रहा है कि तमाम प्रयासों के बाद भी जब खुद की लाइन बड़ी होती दिखाई नहीं दी तो फिर दूसरे की लाइन छोटी करने की चाल चली गई। अभी तक सूबे में बेहद कमजोर पार्टी के उम्मीदवार के चुनाव में तेजी लाने के लिए जतन किए गए हैं। चुनावी आंकड़ेबाजी में उलझे रहने वाले जानकार बताते हैं कि एक उम्मीदवार को सिर्फ इसलिए सपोर्ट किया जा रहा है कि जिससे वह अभी तक मजबूत बने हुए प्रत्याशी के वोटों में सेंध लगा सके। खर्च और गाड़ी लेने वाला उम्मीदवार अगर दस हजार वोटों पाने में भी सफल हो गया तो मजबूत प्रत्याशी के इतने ही कम हो जाएंगे, जिससे दूसरे नंबर पर रहने वाली पार्टी के उम्मीदवार की जीत की राह आसान होगी। इस विधानसभा सीट पर दूसरे नंबर की पार्टी जिले की दूसरी विधानसभाओं में तो बेहतर प्रदर्शन करती है लेकिन, यहीं पर आकर चुनाव नहीं जीत पाती। दो दशक का सूखा खत्म करने के लिए जुगत लगाई जा रही है। बताया जा रहा है कि खर्च और गाड़ी लेने वाले उम्मीदवार ने अपना चुनाव प्रचार भी तेज कर दिया है।
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बिजनौर। खर्च भी लो, घूमने के लिए गाड़ी भी लो और बिगाड़ दो मजबूत उम्मीदवार का खेल। जी हां, जिले की एक विधानसभा में ऐसा दांव भी खेला जा रहा है। एक उम्मीदवार अपनी जीत की राह कमजोर दल का सियासी कद बढ़ाकर बनाने में लगे हैं, जिससे दूसरे के मजबूत वोटरों में सेंधमारी कराई जा सके।
सियासी दांव पेंच भी बड़े अजीब होते हैं, इसमें खुद को मजबूत बनाने के लिए दूसरे को कमजोर भी कर दिया जाता है। एक विधानसभा सीट में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। बताया जा रहा है कि तमाम प्रयासों के बाद भी जब खुद की लाइन बड़ी होती दिखाई नहीं दी तो फिर दूसरे की लाइन छोटी करने की चाल चली गई। अभी तक सूबे में बेहद कमजोर पार्टी के उम्मीदवार के चुनाव में तेजी लाने के लिए जतन किए गए हैं। चुनावी आंकड़ेबाजी में उलझे रहने वाले जानकार बताते हैं कि एक उम्मीदवार को सिर्फ इसलिए सपोर्ट किया जा रहा है कि जिससे वह अभी तक मजबूत बने हुए प्रत्याशी के वोटों में सेंध लगा सके। खर्च और गाड़ी लेने वाला उम्मीदवार अगर दस हजार वोटों पाने में भी सफल हो गया तो मजबूत प्रत्याशी के इतने ही कम हो जाएंगे, जिससे दूसरे नंबर पर रहने वाली पार्टी के उम्मीदवार की जीत की राह आसान होगी। इस विधानसभा सीट पर दूसरे नंबर की पार्टी जिले की दूसरी विधानसभाओं में तो बेहतर प्रदर्शन करती है लेकिन, यहीं पर आकर चुनाव नहीं जीत पाती। दो दशक का सूखा खत्म करने के लिए जुगत लगाई जा रही है। बताया जा रहा है कि खर्च और गाड़ी लेने वाले उम्मीदवार ने अपना चुनाव प्रचार भी तेज कर दिया है।
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