{"_id":"5fe38ead8ebc3e3c82243e8f","slug":"tajpur-s-church-is-a-sign-of-love-bijnor-news-mrt5170814136","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रेम की निशानी है राजा का ताजपुर का चर्च","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रेम की निशानी है राजा का ताजपुर का चर्च
विज्ञापन
राजा का ताजपुर का चर्च।
- फोटो : BIJNOR
प्रेम की निशानी है राजा का ताजपुर का चर्च
नूरपुर/राजा का ताजपुर। अपनी खूबसूरती और बनावट के लिए प्रसिद्ध राजा का ताजपुर स्थित सेक्रेड हार्ट चर्च का इतिहास काफी दिलचस्प है। इस चर्च का निर्माण करीब 107 वर्ष पूर्व राजा श्याम सिंह रिख और उनके भाई शिवनाथ सिंह रिख ने कराया था। शिवनाथ व उनकी पत्नी की मौत के बाद उन्हें चर्च में दफनाया गया था। प्रार्थना कक्ष में दोनों की कब्र आज भी मौजूद हैं। क्रिसमस को लेकर चर्च की साफ सफाई और सजावट का काम जोरों से किया जा रहा है।
राजा का ताजपुर से एक किलोमीटर उत्तर की दिशा में करीब 12 एकड़ में आम के बाग के बीच बने चर्च में प्रवेश द्वार से लेकर मुख्य इमारत तक रास्ते के दोनों ओर ईसाई धर्म का संदेश देती खूबसूरत मूर्तियां लगाई गई हैं। इस चर्च का निर्माण राजा श्याम सिंह व उनके भाई शिवनाथ सिंह रिख ने वर्ष 1913 में अपनी फ्रेंच पत्नी क्रमश: मार्गरेट मेरी ओर विलियम मेरी के लिए कराया था। कहा जाता है कि मार्गरेट मेरी राजा श्याम सिंह रिख से करीब 28 वर्ष छोटी थीं। राजा अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करते थे। उनकी याद में उन्होंने इस चर्च का निर्माण कराया था।
बताया जाता है कि चर्च के निर्माण में काफी पैसा खर्च किया गया था और इसमें ताजमहल की तर्ज पर संगमरमर का प्रयोग हुआ था। छतों पर सोने की परत से नक्काशी की गई थी। हालांकि अब सोना नहीं है। बाद में दोनों भाइयों ने कैथोलिक धर्म स्वीकार कर लिया और अपने नाम बदलकर फ्रांसिस जेवियर रिख और नोरवर्ट रिख रख लिए। कुछ समय बाद राजा श्याम सिंह रिख अपनी पत्नी के साथ बंगलूरू चले गए। वहीं वर्ष 1943 में 84 वर्ष की आयु में उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के दो माह बाद उनकी पत्नी की भी मौत हो गई। उनके भाई शिवनाथ सिंह रिख और उनकी पत्नी की मौत के बाद उनकी इच्छा के अनुसार उन्हें चर्च में ही दफनाया गया। प्रार्थना सभा कक्ष के एक कोने में उनकी कब्र स्थापित है। चर्च के शताब्दी वर्ष पर राजा श्याम सिंह रिख की अस्थियों का कुछ भाग उनके परिजनों द्वारा चर्च में लाया गया था।
विज्ञापन
इस चर्च को राजा रानी के प्रेम की निशानी के रूप में जाना जाता है। क्रिसमस पर यहां प्रति वर्ष मेले का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में प्रेमी युगल पहुंचकर अपने प्यार को मंजिल तक पहुंचने की दुआ मांगते हैं। हालांकि इस वर्ष कोरोना के चलते चर्च पर लगने वाले मेले को स्थगित कर दिया गया है। चर्च के फादर टाइटस ने बताया कि इस वर्ष बाहर के लोगों को चर्च में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
चर्च में चलता है अस्पताल और स्कूल
सेक्रेड हार्ट चर्च में एक अस्पताल बना हुआ है। यह अस्पताल पहले सांप के काटे व्यक्तियों का इलाज करने के लिए दूर दूर तक प्रसिद्ध था। कहा जाता है कि पहले इस अस्पताल में एक चमत्कारी पत्थर (मनका) था। जिसे सांप के काटे स्थान पर लगाने से जहर का असर दूर हो जाता था, लेकिन पिछले कई वर्षों से वह पत्थर यहां नहीं है। हालांकि अब भी सांप के काटने का इलाज अस्पताल में किया जाता है। इसके अलावा यहां कृपाओं की माता नाम से एक स्कूल संचालित है। स्कूल को हाईस्कूल की मान्यता प्राप्त है। चर्च परिसर में करीब 50 से अधिक ईसाई परिवार रहते हैं।
विज्ञापन
नूरपुर/राजा का ताजपुर। अपनी खूबसूरती और बनावट के लिए प्रसिद्ध राजा का ताजपुर स्थित सेक्रेड हार्ट चर्च का इतिहास काफी दिलचस्प है। इस चर्च का निर्माण करीब 107 वर्ष पूर्व राजा श्याम सिंह रिख और उनके भाई शिवनाथ सिंह रिख ने कराया था। शिवनाथ व उनकी पत्नी की मौत के बाद उन्हें चर्च में दफनाया गया था। प्रार्थना कक्ष में दोनों की कब्र आज भी मौजूद हैं। क्रिसमस को लेकर चर्च की साफ सफाई और सजावट का काम जोरों से किया जा रहा है।
राजा का ताजपुर से एक किलोमीटर उत्तर की दिशा में करीब 12 एकड़ में आम के बाग के बीच बने चर्च में प्रवेश द्वार से लेकर मुख्य इमारत तक रास्ते के दोनों ओर ईसाई धर्म का संदेश देती खूबसूरत मूर्तियां लगाई गई हैं। इस चर्च का निर्माण राजा श्याम सिंह व उनके भाई शिवनाथ सिंह रिख ने वर्ष 1913 में अपनी फ्रेंच पत्नी क्रमश: मार्गरेट मेरी ओर विलियम मेरी के लिए कराया था। कहा जाता है कि मार्गरेट मेरी राजा श्याम सिंह रिख से करीब 28 वर्ष छोटी थीं। राजा अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करते थे। उनकी याद में उन्होंने इस चर्च का निर्माण कराया था।
विज्ञापन
बताया जाता है कि चर्च के निर्माण में काफी पैसा खर्च किया गया था और इसमें ताजमहल की तर्ज पर संगमरमर का प्रयोग हुआ था। छतों पर सोने की परत से नक्काशी की गई थी। हालांकि अब सोना नहीं है। बाद में दोनों भाइयों ने कैथोलिक धर्म स्वीकार कर लिया और अपने नाम बदलकर फ्रांसिस जेवियर रिख और नोरवर्ट रिख रख लिए। कुछ समय बाद राजा श्याम सिंह रिख अपनी पत्नी के साथ बंगलूरू चले गए। वहीं वर्ष 1943 में 84 वर्ष की आयु में उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के दो माह बाद उनकी पत्नी की भी मौत हो गई। उनके भाई शिवनाथ सिंह रिख और उनकी पत्नी की मौत के बाद उनकी इच्छा के अनुसार उन्हें चर्च में ही दफनाया गया। प्रार्थना सभा कक्ष के एक कोने में उनकी कब्र स्थापित है। चर्च के शताब्दी वर्ष पर राजा श्याम सिंह रिख की अस्थियों का कुछ भाग उनके परिजनों द्वारा चर्च में लाया गया था।
विज्ञापन
इस चर्च को राजा रानी के प्रेम की निशानी के रूप में जाना जाता है। क्रिसमस पर यहां प्रति वर्ष मेले का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में प्रेमी युगल पहुंचकर अपने प्यार को मंजिल तक पहुंचने की दुआ मांगते हैं। हालांकि इस वर्ष कोरोना के चलते चर्च पर लगने वाले मेले को स्थगित कर दिया गया है। चर्च के फादर टाइटस ने बताया कि इस वर्ष बाहर के लोगों को चर्च में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
चर्च में चलता है अस्पताल और स्कूल
सेक्रेड हार्ट चर्च में एक अस्पताल बना हुआ है। यह अस्पताल पहले सांप के काटे व्यक्तियों का इलाज करने के लिए दूर दूर तक प्रसिद्ध था। कहा जाता है कि पहले इस अस्पताल में एक चमत्कारी पत्थर (मनका) था। जिसे सांप के काटे स्थान पर लगाने से जहर का असर दूर हो जाता था, लेकिन पिछले कई वर्षों से वह पत्थर यहां नहीं है। हालांकि अब भी सांप के काटने का इलाज अस्पताल में किया जाता है। इसके अलावा यहां कृपाओं की माता नाम से एक स्कूल संचालित है। स्कूल को हाईस्कूल की मान्यता प्राप्त है। चर्च परिसर में करीब 50 से अधिक ईसाई परिवार रहते हैं।