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गन्ना विभाग बढ़ा रहा जैविक खेती की ओर कदम
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गन्ना विभाग बढ़ा रहा जैविक खेती की ओर कदम
बिजनौर। अधिक उत्पादन की लालच में किसान रासायनिक कीटनाशकों का ज्यादा प्रयोग कर रहे हैं। इससे मनुष्य ही नहीं, खेती का स्वास्थ्य भी बिगड़ रहा है। गन्ना विभाग किसानों को रासायनिक की जगह जैविक कीटनाशक का प्रयोग करने को प्रेरित कर रहा है। इससे जहां किसानों का गन्ना उत्पादन में खर्च काम होगा, वहीं खेती का स्वास्थ्य भी सही रहेगा और किसानों को अच्छा उत्पादन भी प्राप्त होगा।
गन्ना बिजनौर जनपद की मुख्य फसल है। यहां गन्ना के खेती करीब सवा दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में होती है। ग्रामीण अर्थ व्यवस्था गन्ने पर ही आधारित है। वर्तमान में गन्ना विभाग चीनी मिलों के सहयोग से गन्ना सर्वे करा रहा है। गन्ना विभाग किसानों की आय दोगुनी करने में लगा हुआ है। इसी क्रम में विभाग किसानों को रासायनिक की जगह जैविक उत्पाद का गन्ना फसल में प्रयोग करने को प्रेरित कर रहा है। गन्ना सर्वे में लगे कर्मचारी खेत पर ही किसानों को जैविक उर्वरक, कीटनाशक का गन्ना फसल में प्रयोग करने के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।
इनका करें प्रयोग
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह ने बताया कि जैव उत्पाद एक तरफ जमीन को रसायनों के दुष्प्रभाव से बचाएगा। वहीं इनके प्रयोग से खेती की लागत में भी कमी आ जाएगी। किसान गन्ना खेती में रसायनों की जगह जैव उत्पाद जैसे ट्राइकोडर्मा, वाबेरिया बैसियाना तथा ट्राइकोकार्ड आदि जैव पेस्टीसाइड्स का प्रयोग करें।
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गन्ना आयुक्त ने भी जारी किए निर्देश
अपर मुख्य सचिव, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग संजय आर. भूसरेड्डी ने भी शोध परिषद के वैज्ञानिकों व जिलों के अफसरों को निर्देशित किया है कि जैव उत्पादों को बढ़ाए। वैज्ञानिक परिषद के केन्द्रों पर पर्याप्त मात्रा में जैव उत्पादों का उत्पादन कर स्वयं के फार्मों पर उपयोग करने के साथ-साथ स्थानीय किसानों को भी उपलब्ध कराएं।
रासायनिक की जगह किसानों को जैव उर्वरकों, कीटनाशकों का प्रयोग करना चाहिए। गन्ना सर्वे में लगे कर्मचारी किसानों को जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करने को प्रेरित कर रहे है। गोष्ठियों के माध्यम से किसानों तक यह जानकारी दी जा रही है। किसानों को जैविक कीटनाशक के प्रयोग के लाभ भी बताएं जा रहे हैं।
-यशपाल सिंह, जिला गन्ना अधिकारी।
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बिजनौर। अधिक उत्पादन की लालच में किसान रासायनिक कीटनाशकों का ज्यादा प्रयोग कर रहे हैं। इससे मनुष्य ही नहीं, खेती का स्वास्थ्य भी बिगड़ रहा है। गन्ना विभाग किसानों को रासायनिक की जगह जैविक कीटनाशक का प्रयोग करने को प्रेरित कर रहा है। इससे जहां किसानों का गन्ना उत्पादन में खर्च काम होगा, वहीं खेती का स्वास्थ्य भी सही रहेगा और किसानों को अच्छा उत्पादन भी प्राप्त होगा।
गन्ना बिजनौर जनपद की मुख्य फसल है। यहां गन्ना के खेती करीब सवा दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में होती है। ग्रामीण अर्थ व्यवस्था गन्ने पर ही आधारित है। वर्तमान में गन्ना विभाग चीनी मिलों के सहयोग से गन्ना सर्वे करा रहा है। गन्ना विभाग किसानों की आय दोगुनी करने में लगा हुआ है। इसी क्रम में विभाग किसानों को रासायनिक की जगह जैविक उत्पाद का गन्ना फसल में प्रयोग करने को प्रेरित कर रहा है। गन्ना सर्वे में लगे कर्मचारी खेत पर ही किसानों को जैविक उर्वरक, कीटनाशक का गन्ना फसल में प्रयोग करने के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।
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इनका करें प्रयोग
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह ने बताया कि जैव उत्पाद एक तरफ जमीन को रसायनों के दुष्प्रभाव से बचाएगा। वहीं इनके प्रयोग से खेती की लागत में भी कमी आ जाएगी। किसान गन्ना खेती में रसायनों की जगह जैव उत्पाद जैसे ट्राइकोडर्मा, वाबेरिया बैसियाना तथा ट्राइकोकार्ड आदि जैव पेस्टीसाइड्स का प्रयोग करें।
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गन्ना आयुक्त ने भी जारी किए निर्देश
अपर मुख्य सचिव, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग संजय आर. भूसरेड्डी ने भी शोध परिषद के वैज्ञानिकों व जिलों के अफसरों को निर्देशित किया है कि जैव उत्पादों को बढ़ाए। वैज्ञानिक परिषद के केन्द्रों पर पर्याप्त मात्रा में जैव उत्पादों का उत्पादन कर स्वयं के फार्मों पर उपयोग करने के साथ-साथ स्थानीय किसानों को भी उपलब्ध कराएं।
रासायनिक की जगह किसानों को जैव उर्वरकों, कीटनाशकों का प्रयोग करना चाहिए। गन्ना सर्वे में लगे कर्मचारी किसानों को जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करने को प्रेरित कर रहे है। गोष्ठियों के माध्यम से किसानों तक यह जानकारी दी जा रही है। किसानों को जैविक कीटनाशक के प्रयोग के लाभ भी बताएं जा रहे हैं।
-यशपाल सिंह, जिला गन्ना अधिकारी।