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चीनी की लागत 3500 और दाम 3100 रुपये प्रति क्विंटल
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चीनी की लागत 3500 और दाम 3100 रुपये प्रति क्विंटल
बिजनौर। राज्य सरकार की गन्ने का भाव बढ़ाने की संभावना के बीच चीनी मिलों के अफसर चीनी के दाम बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। चीनी के दाम बढ़े हुए करीब दो साल हो गए हैं। मिल अफसर चीनी के दाम कम से कम चार हजार रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं। इससे कम भाव पर मिलों को नुकसान होने की बात कह रहे हैं।
गन्ना पेराई सत्र चलाने की तैयारी शुरू हो चुकी हैं। अगले महीने चीनी मिलें पेराई शुरू कर देंगी। पेराई से पहले ही गन्ने का भाव घोषित होने के प्रयास लगाए जा रहे हैं। पिछले चार सालों से अगेती प्रजाति के गन्ने का दाम 325 और सामान्य प्रजाति के गन्ने का दाम 315 रुपये प्रति क्विंटल है। गन्ने के दाम इस बार चुनावी साल में बढ़ना तय माना जा रहा है। गन्ने के दाम में 20 से 30 रुपये की बढ़ोतरी की उम्मीद है।
फिलहाल चीनी के न्यूनतम दाम 3100 रुपये प्रति क्विंटल हैं। मिल अफसरों का कहना है कि चीनी के दाम बहुत कम हैं। चीनी बनाने में 3500 से 3600 रुपये प्रति क्विंटल की लागत आ रही है जबकि न्यूनतम मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल है। दाम कम होने की वजह से मिलों का संचालन पहले से ही घाटे में हो रहा है। वे चीनी के दाम चार हजार रुपये प्रति क्विंटल और बी हैवी शीरे के दाम 60 रुपये प्रति लीटर से अधिक करने की मांग कर रहे हैं।
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ये बनता है गन्ने से
एक क्विंटल गन्ने से 11 से 12 किलो चीनी, 30 किग्रा खोई और करीब चार लीटर शीरा बनता है। काफी चीनी मिल अब गन्ने से बी हैवी शीरा भी बना रही हैं।
मुश्किल दौर में चीनी उद्योग
बिजनौर चीनी मिल के प्रशासनिक अधिकारी एके सिंह के अनुसार चीनी उद्योग इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहा है। चीनी बनाने की लागत 3450 रुपये प्रति क्विंटल आ रही है। और भी खर्च हैं। सरकार को दाम चार हजार रुपये प्रति क्विंटल करने चाहिए।
बरकरातपुर चीनी मिल के संयुक्त अध्यक्ष नरपत सिंह के अनुसार चीनी के दाम बहुत कम हैं। चीनी के दाम कम से कम 40 रुपये प्रति किग्रा होना चाहिए। बी हैवी शीरा भी 60 रुपये लीटर से अधिक बिकना चाहिए। चीनी के दाम अच्छे होंगे तो किसानों को एकदम समय से भुगतान मिलेगा।
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बिजनौर। राज्य सरकार की गन्ने का भाव बढ़ाने की संभावना के बीच चीनी मिलों के अफसर चीनी के दाम बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। चीनी के दाम बढ़े हुए करीब दो साल हो गए हैं। मिल अफसर चीनी के दाम कम से कम चार हजार रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं। इससे कम भाव पर मिलों को नुकसान होने की बात कह रहे हैं।
गन्ना पेराई सत्र चलाने की तैयारी शुरू हो चुकी हैं। अगले महीने चीनी मिलें पेराई शुरू कर देंगी। पेराई से पहले ही गन्ने का भाव घोषित होने के प्रयास लगाए जा रहे हैं। पिछले चार सालों से अगेती प्रजाति के गन्ने का दाम 325 और सामान्य प्रजाति के गन्ने का दाम 315 रुपये प्रति क्विंटल है। गन्ने के दाम इस बार चुनावी साल में बढ़ना तय माना जा रहा है। गन्ने के दाम में 20 से 30 रुपये की बढ़ोतरी की उम्मीद है।
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फिलहाल चीनी के न्यूनतम दाम 3100 रुपये प्रति क्विंटल हैं। मिल अफसरों का कहना है कि चीनी के दाम बहुत कम हैं। चीनी बनाने में 3500 से 3600 रुपये प्रति क्विंटल की लागत आ रही है जबकि न्यूनतम मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल है। दाम कम होने की वजह से मिलों का संचालन पहले से ही घाटे में हो रहा है। वे चीनी के दाम चार हजार रुपये प्रति क्विंटल और बी हैवी शीरे के दाम 60 रुपये प्रति लीटर से अधिक करने की मांग कर रहे हैं।
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ये बनता है गन्ने से
एक क्विंटल गन्ने से 11 से 12 किलो चीनी, 30 किग्रा खोई और करीब चार लीटर शीरा बनता है। काफी चीनी मिल अब गन्ने से बी हैवी शीरा भी बना रही हैं।
मुश्किल दौर में चीनी उद्योग
बिजनौर चीनी मिल के प्रशासनिक अधिकारी एके सिंह के अनुसार चीनी उद्योग इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहा है। चीनी बनाने की लागत 3450 रुपये प्रति क्विंटल आ रही है। और भी खर्च हैं। सरकार को दाम चार हजार रुपये प्रति क्विंटल करने चाहिए।
बरकरातपुर चीनी मिल के संयुक्त अध्यक्ष नरपत सिंह के अनुसार चीनी के दाम बहुत कम हैं। चीनी के दाम कम से कम 40 रुपये प्रति किग्रा होना चाहिए। बी हैवी शीरा भी 60 रुपये लीटर से अधिक बिकना चाहिए। चीनी के दाम अच्छे होंगे तो किसानों को एकदम समय से भुगतान मिलेगा।