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बिना पोथी ज्ञान जुटा रहे कल का भविष्य
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बिजनौर। ग्रीष्मावकाश के बाद खुले परिषदीय विद्यालयों को एक माह से ज्यादा समय हो गया, लेकिन विद्यालयों में अभी तक नए शैक्षिक सत्र की किताबें नहीं आई हैं। ऐसे में छात्र-छात्राएं बिना किताबे या पुरानी किताबों के सहारे ही पढ़ाई कर रहे हैं। व्यवस्था बनाने के लिए शिक्षकों ने पुरानी किताबे एकत्र की थी। उन पुरानी किताबों से ही छात्र ज्ञान जुटा रहे हैं।
जनपद में 2119 परिषदीय विद्यालयों में 1354 प्राइमरी विद्यालय, 376 उच्च प्राथमिक विद्यालय और 389 कंपोजिट विद्यालय संचालित है। इनमें करीब सवा दो लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत है। इन विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने को जुलाई तक जोर दिया गया है। नामांकन भी बढ़ाया गया। परंतु विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को शिक्षा के लिए किताबें समय पर नहीं आ रही है। शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से आरंभ हो जाता है। ग्रीष्मावकाश के बाद में परिषदीय विद्यालय 16 जून से ही खुल गए थे। बेसिक शिक्षा विभाग अभी तक बच्चों के हाथों में नई किताबें नहीं थमा पाया है। बच्चों को बिना किताबों के या कुछ बच्चों को पुरानी किताबों से पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अफसरों के निर्देश पर छात्र-छात्राओं की पढ़ाई नियमित कक्षाओं में संचालित करने को पुराने किताबों को एकत्र की गई थी। उसी व्यवस्था के तहत छात्र अभी पुरानी किताबों से ही ज्ञान ले रहे हैं।
किताब आने में देरी हुई है, लेकिन अब आनी आरंभ हो गई है। कुछ किताबें एक दिन पहले आई है और भी जल्द आ जाएंगी। किताबों का सत्यापन के बाद जल्द उन्हें वितरण कराना आरंभ कर दिया जाएगा।- जयकरन यादव, बीएसए
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जनपद में 2119 परिषदीय विद्यालयों में 1354 प्राइमरी विद्यालय, 376 उच्च प्राथमिक विद्यालय और 389 कंपोजिट विद्यालय संचालित है। इनमें करीब सवा दो लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत है। इन विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने को जुलाई तक जोर दिया गया है। नामांकन भी बढ़ाया गया। परंतु विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को शिक्षा के लिए किताबें समय पर नहीं आ रही है। शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से आरंभ हो जाता है। ग्रीष्मावकाश के बाद में परिषदीय विद्यालय 16 जून से ही खुल गए थे। बेसिक शिक्षा विभाग अभी तक बच्चों के हाथों में नई किताबें नहीं थमा पाया है। बच्चों को बिना किताबों के या कुछ बच्चों को पुरानी किताबों से पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अफसरों के निर्देश पर छात्र-छात्राओं की पढ़ाई नियमित कक्षाओं में संचालित करने को पुराने किताबों को एकत्र की गई थी। उसी व्यवस्था के तहत छात्र अभी पुरानी किताबों से ही ज्ञान ले रहे हैं।
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किताब आने में देरी हुई है, लेकिन अब आनी आरंभ हो गई है। कुछ किताबें एक दिन पहले आई है और भी जल्द आ जाएंगी। किताबों का सत्यापन के बाद जल्द उन्हें वितरण कराना आरंभ कर दिया जाएगा।- जयकरन यादव, बीएसए
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