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छात्र प्रशांत को गुलदार द्वारा निवाला बनाने के बाद से सहमे है शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और रसोईया

Wed, 08 Jan 2020 11:24 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jan 2020 11:24 PM IST
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Students did not reach Bhogpur school
नजीबाबाद के भोगपुर में गुलदार के डर से नहीं पहुंचे स्कूली बच्चें। - फोटो : NAZIBABAD
नजीबाबाद। भोगपुर में स्कूली छात्र को गुलदार द्वारा मारने की घटना से ग्रामीण सहमे हैं। स्कूल में सन्नाटा पसरा है। शिक्षक और आंगनबाड़ी रसोइया ही खौफ के साए में स्कूल पहुंच रहे हैं।
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छह जनवरी को पूर्व माध्यमिक विद्यालय भोगपुर छात्र प्रशांत को स्कूल के बाहर से गुलदार ने उठाकर मौत के घाट उतार दिया था। गुस्साए ग्रामीणों ने गुलदार को गन्ने के खेतों में घेरकर मार डाला था। इसके बावजूद भोगपुर, मलूकवाली और सुरजापुरी के ग्रामीणों में क्षेत्र में और गुलदार होने का खौफ बरकरार है। भोगपुर में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय के साथ इसी परिसर में आंगनबाड़ी केंद्र है। विद्यालय की दीवार मात्र तीन से चार फीट ऊंची है। आसपास गन्ने की खेती होती है। शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और रसोईया घटना के बाद से खौफ के साए में स्कूल आ रहे हैं।
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प्राथमिक स्कूल भोगपुर में 109 और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 44 विद्यार्थी पंजीकृत है। मंगलवार को प्राइमरी स्कूल में सन्नाटा छाया रहा जबकि पूर्व माध्यमिक स्कूल में मात्र 10 बच्चे पहुंचे थे। बुधवार को ग्रामीणों ने किसी भी बच्चे को स्कूल नहीं भेजा। पूर्व माध्यमिक विद्यालय स्कूल भोगपुर के मुख्य अध्यापक अरविंद कुमार, प्राथमिक विद्यालय के मुख्य अध्यापक नादिर हुसैन तथा अन्य शिक्षक क्षेत्र में अन्य गुलदार होने की आशंका से भयभीत है।
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प्रशांत को खोने से सदमे है परिवार
नजीबाबाद। गांव भोगपुर में दिव्यांग जयप्रकाश के परिवार के लाडले प्रशांत को गंवाने से आहत है। जयप्रकाश के तीन पुत्र और दो पुत्रियां है। प्रशांत की मां बेबी के आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे है। वह रोते हुए कहती है कि काश! स्कूल के शिक्षामित्र के खेत पर भंडारा नहीं होता तो शायद प्रशांत स्कूल से बाहर नहीं निकलता और उसकी जान बच जाती। जयप्रकाश के परिवार को अभी तक आर्थिक सहायता के रूप में कुछ भी नहीं मिल पाया है।

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चारा काटने भी नहीं पहुंच रहे किसान-मजदूर
नजीबाबाद। भोगपुर में खेतों में गन्ने की फसल खड़ी है। किसान अन्य गुलदार होने के डर से खेतों में काम करने नहीं जा रहे है। पशुओं के लिए हरे चारे की भी समस्या किसानों के सामने संकट बनती जा रही है। किसान-मजदूर चारा लेने के लिए भी नहीं निकल रहे है। शाम ढलते ही गांव में सन्नाटा छा जाता है।
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