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विद्यार्थियों ने भारतीय बुल मेंढक का संरक्षण किया
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किरतपुर के रामा इंस्टिट्यूट आफ हायर एजुकेशन में भारतीय बुल मेढक का संरक्षण के बारे में जानकारी ल?
- फोटो : BIJNOR
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विद्यार्थियों ने भारतीय बुल मेंढक का संरक्षण किया
किरतपुर। बुधवार को रामा इंस्टीट्यूट आफ हायर एजूकेशन में जैव विविधता संरक्षण में एक पहल की गई, जिसके अंतर्गत भारतीय बुल मेंढक का संरक्षण किया गया। इसे राना टिग्रीना के नाम से जाना जाता है।
कालेज के प्रांगण में स्थित पानी के सीमेंटेड टैंक में मेंढकों का प्रजनन कराया गया। यह कार्य डीन साइंस डा. सीडी शर्मा के नेतृत्व में जंतु विज्ञान के विद्यार्थियों द्वारा किया जा रहा है। डा. सीडी शर्मा ने बताया कि जंतुओं की अनेकों प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं। कुछ प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। जिसमें भारतीय मेंढक मूल रूप से इस संकट से जूझ रहा है। यह मेंढक मनुष्यों के द्वारा किए जा रहे अत्यधिक रसायनों के प्रयोग के कारण इस अवस्था में आ चुका है। मेंढक हमारे पर्यावरण की खाद्य श्रृंखला में अहम भूमिका निभाता है। पर्यावरण संतुलन के लिए अति आवश्यक है। प्रजनन के पश्चात जन्मे टैडपोल के व्यस्क होने पर इन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।
निदेशक रोहित चौधरी, प्राचार्य डा. डबलेश कुमार, उप प्राचार्य व चीफ प्राक्टर डा. रवीश कुमार ने डीन साइंस डा. सीडी शर्मा एवं जंतु विज्ञान के विद्यार्थियों को नई पहल के लिये उत्साहवर्धन किया। भविष्य में जीवों के संरक्षण हेतु इस प्रकार के कार्यों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
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किरतपुर। बुधवार को रामा इंस्टीट्यूट आफ हायर एजूकेशन में जैव विविधता संरक्षण में एक पहल की गई, जिसके अंतर्गत भारतीय बुल मेंढक का संरक्षण किया गया। इसे राना टिग्रीना के नाम से जाना जाता है।
कालेज के प्रांगण में स्थित पानी के सीमेंटेड टैंक में मेंढकों का प्रजनन कराया गया। यह कार्य डीन साइंस डा. सीडी शर्मा के नेतृत्व में जंतु विज्ञान के विद्यार्थियों द्वारा किया जा रहा है। डा. सीडी शर्मा ने बताया कि जंतुओं की अनेकों प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं। कुछ प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। जिसमें भारतीय मेंढक मूल रूप से इस संकट से जूझ रहा है। यह मेंढक मनुष्यों के द्वारा किए जा रहे अत्यधिक रसायनों के प्रयोग के कारण इस अवस्था में आ चुका है। मेंढक हमारे पर्यावरण की खाद्य श्रृंखला में अहम भूमिका निभाता है। पर्यावरण संतुलन के लिए अति आवश्यक है। प्रजनन के पश्चात जन्मे टैडपोल के व्यस्क होने पर इन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।
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निदेशक रोहित चौधरी, प्राचार्य डा. डबलेश कुमार, उप प्राचार्य व चीफ प्राक्टर डा. रवीश कुमार ने डीन साइंस डा. सीडी शर्मा एवं जंतु विज्ञान के विद्यार्थियों को नई पहल के लिये उत्साहवर्धन किया। भविष्य में जीवों के संरक्षण हेतु इस प्रकार के कार्यों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
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