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सुल्ताना डाकू के किले के नाम से पहचाना जाता है पत्थरगढ़ का किला

Sat, 09 Jan 2021 11:11 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 09 Jan 2021 11:11 PM IST
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Stone fort is in bad condition due to governmental neglect
नजीबाबाद के पत्थरगढ़ किले की कमलनुमा खस्ताहाल आकृति और सुरक्षा के लिए बनाए गए छिद्र। - फोटो : NAZIBABAD
सरकारी उपेक्षा के कारण बदहाल है पत्थरगढ़ का किला
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नजीबाबाद। नवाब नजीबुद्दौला की कलात्मक इमारतों में से एक पत्थरगढ़ का किला पुरातत्व विभाग की उपेक्षा का शिकार है। नवाब नजीबुद्दौला ने नजीबाबाद बसाया था। नवाबी इमारतों की कलात्मक कारीगरी उनके वास्तुकला प्रेम का प्रतीक मानी जाती है। नवाबी इमारतों में बारादरी, चार मीनार, महल सराय, नवाब नजीबुद्दौला का मकबरा और पत्थरगढ़ का किला प्रमुख इमारतें हैं। बारादरी भूमाफियाओं की भेंट चढ़कर इतिहास बन चुकीं हैं।
नजीबाबाद नगर से मात्र दो किमी की दूरी पर गांव महावतपुर क्षेत्र में नवाब नजीबुद्दौला का किला है। किले को सुल्ताना डाकू के किले के नाम से ज्यादा जाना जाता है। बिजनौर गजेटियर के अनुसार 1755 ईसवी में नवाब नजीबुद्दौला ने किला बनवाया था। निर्माण में लखौरी और मोरध्वज किले से लाए गए बड़े-बड़े पत्थरों का इस्तेमाल हुआ। किले को पत्थरगढ़ के किले के नाम से भी जाना जाता है।
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करीब 40 एकड़ भूमि में बने किले के चारों ओर चौड़ी दीवारें वक्त की मार के साथ क्षतिग्रस्त हो रही हैं। मरम्मत के नाम पर पुरातत्व विभाग खानापूर्ति करता है। किले के भीतर एक तालाब है, इसकी गहराई कितनी है, कह पाना मुश्किल है। जानकार बताते हैं कि सात दशक पूर्व तालाब के जलाशय से पेयजल आपूर्ति योजना बनी थी। पर्यटन की दृष्टि से किला उपयोगी साबित हो सकता है। आकर्षक स्टेडियम निर्माण और कृषि विकास योजना भी किला परिसर में लागू की जा सकती है।
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सुरक्षा और कलात्मक कारीगरी बनी आकर्षण
माना जाता है कि नवाब नजीबुद्दौला ने अपने सुरक्षाकर्मियों के लिए किला बनवाया था। किले के बाहर सुरक्षा चौकियां बनी थीं, जो ध्वस्त हो चुकीं हैं। किले के विशाल मुख्यद्वार के ऊपर अष्टभुजा कार कमल की पंखुड़ीनुमा आकृति आज भी आकर्षण का केंद्र है। किले के ऊपरी भाग से दुश्मन पर नजर रखने, जरूरत पड़ने पर उससे मोर्चा लेने के लिए दीवारों में जगह-जगह आयताकार नुमा ऐसे छेद हैं, जिनसे एक ही स्थान से किले के मुख्यद्वार के नीचे से दूरदराज तक निगाह रखने के साथ हमला किया जा सके।
दीवारों पर दौड़ाई जा सकती है कार
नजीबाबाद। किले की दीवारों की चौड़ाई लगभग नौ फुट है, जिस पर कार भी दौड़ाई जा सकती है। मुख्यद्वार और उसके आसपास की दीवारों की भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा हाल ही के वर्षों में मरम्मत कराई है। किले का दूसरा द्वार गांव महावतपुर दिशा में है। किला भवन और चारों ओर की दीवारें खस्ताहाल हैं।

किले में सुल्ताना डाकू ने ली थी पनाह
नजीबाबाद। नवाबी इमारत पत्थरगढ़ के किले को सुल्ताना डाकू के नाम से पहचान मिली। बुजुर्गों का कहना है कि सुल्ताना डाकू ने किले में पनाह ली थी। खूंखार होने के बावजूद दरियादिली के लिए सुल्ताना डाकू को जाना चाहता था। मुंबई में कारोबार करने वाले स्थानीय कारोबारी बताते हैं कि जब वे स्वयं के नजीबाबाद निवासी होने की बात कहते हैं तो मुंबई वासियों की जुबां पर यही अल्फाज आते हैं कि वह नजीबाबाद जहां सुल्ताना डाकू का किला है।

नजीबाबाद के पत्थरगढ़ किले की चौड़ी दीवार जिस पर कार दौड़ाई जा सकती है।

नजीबाबाद के पत्थरगढ़ किले की चौड़ी दीवार जिस पर कार दौड़ाई जा सकती है।- फोटो : NAZIBABAD

नजीबाबाद में नवाब नजीबुद्दौला का बनाया पत्थरगढ़ का किला।

नजीबाबाद में नवाब नजीबुद्दौला का बनाया पत्थरगढ़ का किला।- फोटो : NAZIBABAD

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