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सरकारी पत्राचार तक सीमित हो गई डाक

Sat, 08 Oct 2022 11:45 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 08 Oct 2022 11:45 PM IST
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Special on World Post Day: Posts limited to official correspondence
विश्व डाक दिवस पर विशेष : सरकारी पत्राचार तक सीमित हो गई डाक
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कोतवाली देहात/बिजनौर। सोशल मीडिया के जमाने में अब डाकिया बीते समय की बात हो चुके हैं। संचार के तमाम साधन आने के कारण अब डाकिये कम ही दिखाई देते हैं। नौ अक्टूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है। पुराने जमाने में डाक संचार का एकमात्र साधन था। आज ईमेल, व्हाट्सएप, मैसेंजर जैसे तमाम साधन आने के बाद चिट्ठियों को बीते समय की बात माना जाने लगा है। डाक के माध्यम से अब या तो सरकारी चिट्ठियां आती हैं या संस्थाओं द्वारा पत्र व्यवहार किया जाता है।
ग्राम सिसौना निवासी सुशील त्यागी आज भी पुरानी चिट्ठियों का खजाना समेटे हुए हैं। साहित्यकार सुशील त्यागी ने सुभाष शतक नाम की पुस्तक लिखी है। जिसे उन्होंने 1998 में तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन को डाक द्वारा भेजा था। जिसका उत्तर राष्ट्रपति केआर नारायणन के विशेष कार्याधिकारी प्रेम प्रकाश कौशिक द्वारा दिया गया था। सुशील त्यागी बताते हैं कि उनका अनेकों साहित्यकारों से पत्र व्यवहार रहा, जिनमें पद्मश्री कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर, पद्मश्री क्षेमचंद्र सुमन, पद्मश्री डॉ कपिल देव द्विवेदी, विष्णु प्रभाकर, आध्यात्मिक लेख लिखने वाले शिव कुमार गोयल, आर्य समाज लेखक भवानी लाल भारतीय, प्रसिद्ध कहानीकार रमाकांत, प्रसिद्ध साहित्यकार विद्यानिवास मिश्र, सारस्वत मोहन मनीषी, राज्यसभा सांसद शांति त्यागी शामिल हैं।
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इन सभी के पत्र सुशील त्यागी के पास आज भी संरक्षित हैं। सुशील त्यागी बताते हैं कि उस समय पत्र आने का आनंद ही कुछ और होता था। राष्ट्रपति द्वारा पत्र प्राप्त होने पर उन्हें ऐसा लगा था जैसे उन्हें कोई बहुत बड़ा पुरस्कार मिल गया हो। सुशील त्यागी बताते हैं कि आज की पीढ़ी पत्र व्यवहार वाले उस आनंद से वंचित रह गई है। ग्राम शादीपुर निवासी नवनीत गुप्ता के पास 1959 तक के पत्र सुरक्षित हैं। नवनीत गुप्ता बताते हैं कि 1959 में उनके पिता अमरोहा रहकर पढ़ते थे और वहां से पत्र भेजते थे। वह पत्र उनके पास अभी भी संरक्षित हैं। इसके अतिरिक्त उनके पास मनी ऑर्डर की रसीद और छह पैसे वाला पोस्टकार्ड भी संरक्षित है।
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