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राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर विशेष : नेत्रदान कर रोशन कर रहे दूसरों की दुनिया
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राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर विशेष : नेत्रदान कर रोशन कर रहे दूसरों की दुनिया
बिजनौर। जीते जी रक्तदान और मृत्यु के बाद नेत्रदान। जिलेवासी इस कहावत को सत्य कर रहे हैं। जिले में रक्तदान करने के साथ ही नेत्रदान करने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। जिले में अब तक तीन हजार से अधिक लोग नेत्रदान करने का संकल्प ले चुके हैं। दो दर्जन से अधिक लोगों के परिजनों ने मरणोपरांत उनका नेत्रदान भी किया है।
रक्तदान करने के लिए पहले जिले में गिनती के लोग ही आगे आते थे, लेकिन अब रक्तदाताओं की संख्या तीन हजार के पार पहुंच रही है। बहुत से लोग समय-समय पर रक्तदान करते हैं। यहां तक कि किसी को जरूरत होने पर लोगों ने कोरोना के समय लॉकडाउन में भी रक्तदान किया था। रक्तदान करने के साथ-साथ नेत्रदान करने के लिए भी लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। सराफा व्यापारी विकास अग्रवाल लंबे समय से इस अभियान से जुड़े हैं। वे लोगों को नेत्रदान करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जिले में अब तक तीन हजार से अधिक लोगों को नेत्रदान का संकल्प दिला चुके हैं।
सपा विधायक रुचि वीरा सहित कई लोगों का नेत्रदान करने के लिए वे फार्म भरवा चुके हैं। दो दर्जन से अधिक लोगों का नेत्रदान भी विकास अग्रवाल करा चुके हैं। उन्होंने अपनी माता का निधन होने पर उनका नेत्रदान भी करा दिया था। विकास अग्रवाल बताते हैं कि नेत्रदान सबसे बड़ा दान है। जिले में नेत्रदान करने के लिए संकल्प लेने वालों की संख्या बढ़ रही है। अपने प्रतिष्ठान पर आने वाले ग्राहकों को भी वे नेत्रदान को प्रेरित करते हैं। एसीएमओ डॉ. एसके निगम के अनुसार नेत्रदान करना सामाजिक दृष्टि से बहुत अच्छा कार्य है। मरने के बाद किसी की आंखें दो अंधेरी दुनिया को रोशन कर सकती हैं।
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बिजनौर। जीते जी रक्तदान और मृत्यु के बाद नेत्रदान। जिलेवासी इस कहावत को सत्य कर रहे हैं। जिले में रक्तदान करने के साथ ही नेत्रदान करने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। जिले में अब तक तीन हजार से अधिक लोग नेत्रदान करने का संकल्प ले चुके हैं। दो दर्जन से अधिक लोगों के परिजनों ने मरणोपरांत उनका नेत्रदान भी किया है।
रक्तदान करने के लिए पहले जिले में गिनती के लोग ही आगे आते थे, लेकिन अब रक्तदाताओं की संख्या तीन हजार के पार पहुंच रही है। बहुत से लोग समय-समय पर रक्तदान करते हैं। यहां तक कि किसी को जरूरत होने पर लोगों ने कोरोना के समय लॉकडाउन में भी रक्तदान किया था। रक्तदान करने के साथ-साथ नेत्रदान करने के लिए भी लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। सराफा व्यापारी विकास अग्रवाल लंबे समय से इस अभियान से जुड़े हैं। वे लोगों को नेत्रदान करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जिले में अब तक तीन हजार से अधिक लोगों को नेत्रदान का संकल्प दिला चुके हैं।
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सपा विधायक रुचि वीरा सहित कई लोगों का नेत्रदान करने के लिए वे फार्म भरवा चुके हैं। दो दर्जन से अधिक लोगों का नेत्रदान भी विकास अग्रवाल करा चुके हैं। उन्होंने अपनी माता का निधन होने पर उनका नेत्रदान भी करा दिया था। विकास अग्रवाल बताते हैं कि नेत्रदान सबसे बड़ा दान है। जिले में नेत्रदान करने के लिए संकल्प लेने वालों की संख्या बढ़ रही है। अपने प्रतिष्ठान पर आने वाले ग्राहकों को भी वे नेत्रदान को प्रेरित करते हैं। एसीएमओ डॉ. एसके निगम के अनुसार नेत्रदान करना सामाजिक दृष्टि से बहुत अच्छा कार्य है। मरने के बाद किसी की आंखें दो अंधेरी दुनिया को रोशन कर सकती हैं।
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