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बुखार से छह की जान गई
अमर उजाला/ब्यूरो
Updated Sun, 16 Oct 2016 11:46 PM IST
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बिजनौर जिले में बुखार से रविवार को तीन महिलाओं समेत छह की मौत हो गई है। जिले में बुखार से लगातार हो रही मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग गांव जाकर जांच करने को तैयार नहीं। गांव में स्वास्थ्य कैंप न लगने से लोगों में रोष है और बुखार से दहशत है।
गांव फरीदपुर भोगन व दारानगर में चिकनगुनिया से रविवार को तीन की मौत हो गई। दारानगर निवासी शफीक के पुत्र सलीम एक सप्ताह से चिकनगुनिया से पीड़ित था। परिजनों ने बताया कि पहले का उसका इलाज गांव के ही एक चिकित्सक से चल रहा था, लेकिन हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसको उपचार के लिए दिल्ली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। गांव फरीदपुर भोगन में भी फुरकान की आठ वर्षीय पुत्री तमन्ना और अकरम का 16 वर्षीय पुत्र अनस की भी चिकनगुनिया से मौत हो गई है। ग्रामवासियों ने बताया कि गांव में अब तक पांच मौत हो गई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकारी सुध लेने को तैयार नहीं है। वहीं गांव ताजपुर में बुखार से तीन महिलाओं की मौत हो गई है। गांव निवासी नूर हसन की पत्नी नफीसा व अनवरी (57) को भी एस सप्ताह से बुखार से पीड़ित थी। दोनों का इलाज गांव में ही एक निजी चिकित्सक के यहां चल रहा था। रविवार को दोनों की मौत हो गई है।
वहीं राजा का ताजपुर के गांव मुजाहिदपुर निवासी सुधा रानी (25) पत्नी रविंद्र सिंह की बुखार के कारण मौत हो गई। परिजनों के अनुसार सुधा को दो दिन पहले बुखार आया था। उसे उपचार के लिए राजा का ताजपुर में पेट्रोल पंप के पास स्थित एक निजी चिकित्सक के यहां भर्ती कराया गया था, यहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। सूचना पर पहुंचे महिला के मायके वालों ने चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा किया।
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उन्होंने आरोप लगाया कि चिकित्सक हालत खराब होने के बाद भी उन्हें आश्वासन देता रहा और महिला को बाहर के लिए रेफर नहीं किया। हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस चिकित्सक को थाने ले गई, जहां दोनों के बीच समझौता हो गया। जिले में लगातार मौत का सिलसिला जारी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को कोई अधिकारी गांवों का दौरा करने को तैयार नहीं है।
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गांव फरीदपुर भोगन व दारानगर में चिकनगुनिया से रविवार को तीन की मौत हो गई। दारानगर निवासी शफीक के पुत्र सलीम एक सप्ताह से चिकनगुनिया से पीड़ित था। परिजनों ने बताया कि पहले का उसका इलाज गांव के ही एक चिकित्सक से चल रहा था, लेकिन हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसको उपचार के लिए दिल्ली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। गांव फरीदपुर भोगन में भी फुरकान की आठ वर्षीय पुत्री तमन्ना और अकरम का 16 वर्षीय पुत्र अनस की भी चिकनगुनिया से मौत हो गई है। ग्रामवासियों ने बताया कि गांव में अब तक पांच मौत हो गई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकारी सुध लेने को तैयार नहीं है। वहीं गांव ताजपुर में बुखार से तीन महिलाओं की मौत हो गई है। गांव निवासी नूर हसन की पत्नी नफीसा व अनवरी (57) को भी एस सप्ताह से बुखार से पीड़ित थी। दोनों का इलाज गांव में ही एक निजी चिकित्सक के यहां चल रहा था। रविवार को दोनों की मौत हो गई है।
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वहीं राजा का ताजपुर के गांव मुजाहिदपुर निवासी सुधा रानी (25) पत्नी रविंद्र सिंह की बुखार के कारण मौत हो गई। परिजनों के अनुसार सुधा को दो दिन पहले बुखार आया था। उसे उपचार के लिए राजा का ताजपुर में पेट्रोल पंप के पास स्थित एक निजी चिकित्सक के यहां भर्ती कराया गया था, यहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। सूचना पर पहुंचे महिला के मायके वालों ने चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा किया।
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उन्होंने आरोप लगाया कि चिकित्सक हालत खराब होने के बाद भी उन्हें आश्वासन देता रहा और महिला को बाहर के लिए रेफर नहीं किया। हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस चिकित्सक को थाने ले गई, जहां दोनों के बीच समझौता हो गया। जिले में लगातार मौत का सिलसिला जारी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को कोई अधिकारी गांवों का दौरा करने को तैयार नहीं है।