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नहरों की सिल्ट सफाई पर संकट के बादल
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नहरों की सिल्ट सफाई पर संकट के बादल
कालागढ़। कोविड 19 के चलते नहरों की सिल्ट सफाई के काम पर संकट के बादल छाते नजर आ रहे हैं। कोविड 19 से प्रभावित इंजीनियरों की दशा के चलते कर्मचारी संगठनों ने इस कार्य को खरीफ की फसल के बाद कराने को पत्र लिखा है। संगठनों ने महामारी के दौरान कर्मचारियों व परिवारों की सुरक्षा की गुहार विभाग से की है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के दौरान ड्यूटी कर वापस आए अधिकांश अधिकारी व कर्मी कोरोना से ग्रसित होते जा रहे हैं। अभी मतगणना की ड्यूटी बाकी है। चुनाव के तुरंत बाद ही 15 मई से 15 जून तक खरीफ की फसलों से पहले नहरों की सिल्ट सफाई का काम समयबद्ध तरीके से किया जाता है। जून के बाद ही खरीफ की फसलों धान, मक्का, मूंगफली आदि की फसलें बोई जाती हैं। जिन्हें पानी की आवश्यकता होती है। उधर 15 जून से मानसून का सत्र भी शुरू हो जाता है। ऐसे में नदियों व नहरों की सफाई का महत्व बढ़ जाता है। इस काम को सिंचाई विभाग करता है। इस बार यह काम पिछड़ सकता है। किसानों को फसलों के लिए पानी के अन्य स्रोतों पर निर्भर होना पड़ सकता है। हालांकि नहरों में पानी चल सकेगा।
कालागढ़ के रामगंगा बांध से निकलने वाली फीका दोआब की नहरों की सफाई का कार्य संकट में आने से किसानों की धान की फसल के उत्पादन पर भी असर हो सकता है। सिविल डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के मंडल अध्यक्ष इंजीनियर कविराज ने पूर्वी गंगा के मुख्य अभियंता को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया है। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों के शोध व अनुमान के अनुसार कोरोना की लहर का पीक आना बाकी है। ऐसे में नहरों की सिल्ट सफाई का काम अधिकारियों, कर्मचारियों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए यह कार्य खरीफ की फसल के बाद कराया जाए। संगठन के कालागढ़ अध्यक्ष गगनदीप सिंह का कहना है कि कोरोना से बचाव के लिए विभाग व प्रशासन को इंजीनियर्स व कर्मचारी परिवारों की सुरक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए।
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कालागढ़। कोविड 19 के चलते नहरों की सिल्ट सफाई के काम पर संकट के बादल छाते नजर आ रहे हैं। कोविड 19 से प्रभावित इंजीनियरों की दशा के चलते कर्मचारी संगठनों ने इस कार्य को खरीफ की फसल के बाद कराने को पत्र लिखा है। संगठनों ने महामारी के दौरान कर्मचारियों व परिवारों की सुरक्षा की गुहार विभाग से की है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के दौरान ड्यूटी कर वापस आए अधिकांश अधिकारी व कर्मी कोरोना से ग्रसित होते जा रहे हैं। अभी मतगणना की ड्यूटी बाकी है। चुनाव के तुरंत बाद ही 15 मई से 15 जून तक खरीफ की फसलों से पहले नहरों की सिल्ट सफाई का काम समयबद्ध तरीके से किया जाता है। जून के बाद ही खरीफ की फसलों धान, मक्का, मूंगफली आदि की फसलें बोई जाती हैं। जिन्हें पानी की आवश्यकता होती है। उधर 15 जून से मानसून का सत्र भी शुरू हो जाता है। ऐसे में नदियों व नहरों की सफाई का महत्व बढ़ जाता है। इस काम को सिंचाई विभाग करता है। इस बार यह काम पिछड़ सकता है। किसानों को फसलों के लिए पानी के अन्य स्रोतों पर निर्भर होना पड़ सकता है। हालांकि नहरों में पानी चल सकेगा।
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कालागढ़ के रामगंगा बांध से निकलने वाली फीका दोआब की नहरों की सफाई का कार्य संकट में आने से किसानों की धान की फसल के उत्पादन पर भी असर हो सकता है। सिविल डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के मंडल अध्यक्ष इंजीनियर कविराज ने पूर्वी गंगा के मुख्य अभियंता को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया है। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों के शोध व अनुमान के अनुसार कोरोना की लहर का पीक आना बाकी है। ऐसे में नहरों की सिल्ट सफाई का काम अधिकारियों, कर्मचारियों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए यह कार्य खरीफ की फसल के बाद कराया जाए। संगठन के कालागढ़ अध्यक्ष गगनदीप सिंह का कहना है कि कोरोना से बचाव के लिए विभाग व प्रशासन को इंजीनियर्स व कर्मचारी परिवारों की सुरक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए।
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