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प्राइवेट अस्पतालों के शाम होते ही बंद होने लगते हैं शटर
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प्राइवेट अस्पतालों के शाम होते ही बंद होने लगते हैं शटर
धामपुर। कोविड-19 के तहत कोरोना पॉजिटिव केस की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए नगर के अधिकांश प्राइवेट डाक्टरों के नखरे बढ़ गए हैं। डाक्टर दिन में ही मरीजों को देखते हैं। रात के लिए भर्ती करना डाक्टरों ने बंद कर दिया है।
डाक्टरों का कहना है कि देश में महामारी भयावह स्थिति में फैली है। ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए अस्पतालों में रात के समय भर्ती किया जाना मरीज और अस्पताल दोनों के लिए उचित नहीं है। इसलिए शाम को छह बजते ही प्राइवेट अस्पतालों के संचालक चैनलों को बंद करने लगते हैं। नाम न छापने की शर्त पर डॉक्टरों का कहना है कि रात्रि में मरीजों को भर्ती करने से कोई लाभ नहीं है। क्योंकि यदि कोई संक्रमित किसी व्यक्ति की मौत हो गई तो बदनामी से अच्छा है कि ऐसे लोगों को भर्ती ही ना किया जाए। अधिकांश मरीज और उनके तीमारदारों का कहना है कि डॉक्टर अब कामर्शियल हो गए हैं। पेशे के साथ धोखा कर रहे हैं। डाक्टरों ने अस्पतालों की बड़ी बड़ी बिल्डिगों के ऊपर आपातकालीन सेवा 24 घंटे उपलब्ध है। मगर आपातकाल के लिए सेवा के नाम पर पूरी तरह से बेमानी कर रखी है। विभाग के अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी सुनवाई नहीं होती। सरकारी अस्पतालों में तो मरीजों का और बुरा हाल है। भारी भीड़ लगी होने के बाद उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। उप जिलाधिकारी धीरेंद्र सिंह का कहना है कि व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किया जाएगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिजनौर से इस बाबत वार्ता कर बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
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धामपुर। कोविड-19 के तहत कोरोना पॉजिटिव केस की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए नगर के अधिकांश प्राइवेट डाक्टरों के नखरे बढ़ गए हैं। डाक्टर दिन में ही मरीजों को देखते हैं। रात के लिए भर्ती करना डाक्टरों ने बंद कर दिया है।
डाक्टरों का कहना है कि देश में महामारी भयावह स्थिति में फैली है। ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए अस्पतालों में रात के समय भर्ती किया जाना मरीज और अस्पताल दोनों के लिए उचित नहीं है। इसलिए शाम को छह बजते ही प्राइवेट अस्पतालों के संचालक चैनलों को बंद करने लगते हैं। नाम न छापने की शर्त पर डॉक्टरों का कहना है कि रात्रि में मरीजों को भर्ती करने से कोई लाभ नहीं है। क्योंकि यदि कोई संक्रमित किसी व्यक्ति की मौत हो गई तो बदनामी से अच्छा है कि ऐसे लोगों को भर्ती ही ना किया जाए। अधिकांश मरीज और उनके तीमारदारों का कहना है कि डॉक्टर अब कामर्शियल हो गए हैं। पेशे के साथ धोखा कर रहे हैं। डाक्टरों ने अस्पतालों की बड़ी बड़ी बिल्डिगों के ऊपर आपातकालीन सेवा 24 घंटे उपलब्ध है। मगर आपातकाल के लिए सेवा के नाम पर पूरी तरह से बेमानी कर रखी है। विभाग के अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी सुनवाई नहीं होती। सरकारी अस्पतालों में तो मरीजों का और बुरा हाल है। भारी भीड़ लगी होने के बाद उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। उप जिलाधिकारी धीरेंद्र सिंह का कहना है कि व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किया जाएगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिजनौर से इस बाबत वार्ता कर बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
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