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Bijnor News: अदालती निर्णय पर हस्ताक्षर करते हुए कांप गए शूटर सुमित के हाथ
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- चेहरे पर साफ नजर आया तनाव, रहा खामोश और बंद कर लीं थीं आंखें
- कोर्ट का आदेश जानने के लिए भी नहीं पहुंचा शूटर का कोई परिजन
अचल चौधरी
बिजनौर। बिजनौर कोर्ट में ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर मुख्तार अंसारी के करीबी शाहनवाज की हत्या कर दी थी। मगर अब अदालती निर्णय पर हस्ताक्षर करते हुए शूटर सुमित के हाथ कांप उठे। उसने फैसला सुनाए जाते वक्त आंखें बंद कर लीं थीं, चेहरे पर तनाव भी साफ नजर आया।
बृहस्पतिवार की दोपहर करीब ढाई बजे शाहनवाज हत्याकांड में कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया। निर्णय से पहले कोर्ट रूम को खाली करा लिया गया। निर्णय सुनाए जाने के वक्त कोर्ट में सिर्फ अभियुक्त सुमित, उसके वकील और शासकीय अधिवक्ता मुकेश चौहान और योगेंद्र सिंह के अलावा सुरक्षा में तैनात रही पुलिस मौजूद रही।
पुलिस सूत्रों के अनुसार जिस वक्त फैसला पढ़कर सुनाया जा रहा था तो कटघरे में खड़े अभियुक्त सुमित ने आंखें बंद कर लीं। पूरी तरह से खामोश भी रहा। फैसला सुनाए जाने के बाद निर्णय की कॉपी पर अभियुक्त के हस्ताक्षर कराए गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि हस्ताक्षर करते हुए उसके हाथ कांप उठे, थोड़ा संभलकर उसने हस्ताक्षर किए।
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बता दें कि शूटर सुमित ने 17 दिसंबर 2019 को बिजनौर कोर्ट में गोलियां बरसाकर पेशी पर आए शाहनवाज की हत्या कर दी थी, उस वक्त उसके हाथ बिलकुल भी नहीं कांपे थे। मगर अब पांच साल बाद जब निर्णय आया तो उसके चेहरे पर तनाव था और हाथ कांप गए थे। उधर, शूटर के परिवार से भी कोई व्यक्ति कोर्ट तक नहीं पहुंचा। सूत्रों का दावा है कि उसके परिवार वालों ने उसे बेदखल कर दिया था।
- जेल में अलग रखा गया था सुमित
कोर्ट के निर्णय को लेकर शूटर सुमित को बहराइच जेल से बिजनौर लाया गया। बुधवार को उसे दोषी ठहराया गया जबकि बृहस्पतिवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। ऐसे में एक रात के लिए उसे बिजनौर जेल में रखा गया। मामले की गंभीरता और सुरक्षा कारणों को देखते हुए उसे बाकी सभी बंदियों से अलग रखा गया।
-- लंबा है सुमित का आपराधिक इतिहास
- सुमित के खिलाफ साल 2008 में शामली में पहला मुकदमा धारदार हथियार से वार करने का दर्ज हुआ था।
- साल 2009 में शामली में ही हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। जिसमें बहावड़ी के ग्राम की हत्या करने का आरोप था।
- साल 2009 फिर से शामली में ही जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज हुआ।
- इसके बाद साल 2019 में कोर्ट में शाहनबाज की हत्या करने का मामला बिजनौर की शहर कोतवाली में दर्ज हुआ था।
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- कोर्ट का आदेश जानने के लिए भी नहीं पहुंचा शूटर का कोई परिजन
अचल चौधरी
बिजनौर। बिजनौर कोर्ट में ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर मुख्तार अंसारी के करीबी शाहनवाज की हत्या कर दी थी। मगर अब अदालती निर्णय पर हस्ताक्षर करते हुए शूटर सुमित के हाथ कांप उठे। उसने फैसला सुनाए जाते वक्त आंखें बंद कर लीं थीं, चेहरे पर तनाव भी साफ नजर आया।
बृहस्पतिवार की दोपहर करीब ढाई बजे शाहनवाज हत्याकांड में कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया। निर्णय से पहले कोर्ट रूम को खाली करा लिया गया। निर्णय सुनाए जाने के वक्त कोर्ट में सिर्फ अभियुक्त सुमित, उसके वकील और शासकीय अधिवक्ता मुकेश चौहान और योगेंद्र सिंह के अलावा सुरक्षा में तैनात रही पुलिस मौजूद रही।
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पुलिस सूत्रों के अनुसार जिस वक्त फैसला पढ़कर सुनाया जा रहा था तो कटघरे में खड़े अभियुक्त सुमित ने आंखें बंद कर लीं। पूरी तरह से खामोश भी रहा। फैसला सुनाए जाने के बाद निर्णय की कॉपी पर अभियुक्त के हस्ताक्षर कराए गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि हस्ताक्षर करते हुए उसके हाथ कांप उठे, थोड़ा संभलकर उसने हस्ताक्षर किए।
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बता दें कि शूटर सुमित ने 17 दिसंबर 2019 को बिजनौर कोर्ट में गोलियां बरसाकर पेशी पर आए शाहनवाज की हत्या कर दी थी, उस वक्त उसके हाथ बिलकुल भी नहीं कांपे थे। मगर अब पांच साल बाद जब निर्णय आया तो उसके चेहरे पर तनाव था और हाथ कांप गए थे। उधर, शूटर के परिवार से भी कोई व्यक्ति कोर्ट तक नहीं पहुंचा। सूत्रों का दावा है कि उसके परिवार वालों ने उसे बेदखल कर दिया था।
- जेल में अलग रखा गया था सुमित
कोर्ट के निर्णय को लेकर शूटर सुमित को बहराइच जेल से बिजनौर लाया गया। बुधवार को उसे दोषी ठहराया गया जबकि बृहस्पतिवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। ऐसे में एक रात के लिए उसे बिजनौर जेल में रखा गया। मामले की गंभीरता और सुरक्षा कारणों को देखते हुए उसे बाकी सभी बंदियों से अलग रखा गया।
- सुमित के खिलाफ साल 2008 में शामली में पहला मुकदमा धारदार हथियार से वार करने का दर्ज हुआ था।
- साल 2009 में शामली में ही हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। जिसमें बहावड़ी के ग्राम की हत्या करने का आरोप था।
- साल 2009 फिर से शामली में ही जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज हुआ।
- इसके बाद साल 2019 में कोर्ट में शाहनबाज की हत्या करने का मामला बिजनौर की शहर कोतवाली में दर्ज हुआ था।