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आरटीआई के माध्यम से बने गणतंत्र के प्रहरी
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आरटीआई कार्यकर्ता मेहराजुद्दीन
- फोटो : BIJNOR
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आरटीआई के माध्यम से बने गणतंत्र के प्रहरी
बिजनौर। जनपद में अनेकों आरटीआई कार्यकर्ता जनता की आवाज को बुलंद कर रहे हैं साथ ही भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं और पीड़ितों को न्याय दिला रहे हैं।
ग्राम करौंदा चौधरी निवासी रियासत अली अंसारी ने जन सूचना अधिकार कानून का प्रयोग कर भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाई। उनके द्वारा कई सूचनाएं मांगी गई तथा इसकी शिकायतें प्रशासन स्तर पर की गई। रियासत अली की शिकायत पर मुख्य विकास अधिकारी, सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा एडीओ पंचायत पर जुर्माना भी लग चुका है।
ग्राम करौंदा चौधर निवासी ऋषि त्यागी एक आरटीआई एक्टिविस्ट है। उन्होंने कई मामलों में सूचना के अधिकार कानून का प्रयोग किया और पीड़ितों को न्याय दिलाया। उन्होंने विकासखंड कोतवाली देहात की ग्राम पंचायत त्रिलोकावाला में प्रधानाचार्य रहे व्यक्ति की मृत्यु के बाद जन सूचना के अंतर्गत सूचनाएं मांगी। तब पता चला कि खुद को मृत घोषित कर चुके शिक्षक ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र दिया है। मामले की जांच चल रही है। इसके अतिरिक्त वह कई अन्य मामलों में भी सूचनाएं मांग कर पीड़ितों को इंसाफ दिला चुके हैं।
ग्राम शादीपुर निवासी प्रशांत मौर्य आरटीआई कार्यकर्ता है। उन्होंने कई बार भ्रष्टाचार से संबंधित मुद्दे उठाए तथा जन सूचनाएं एकत्र की। उनके द्वारा सूचनाएं मांगने के बाद कई बार प्रशासन हरकत में आया तथा उनकी शिकायतों पर कार्यवाही की गई। ग्राम इस्लामपुर लालू उर्फ मालीवाला निवासी मेहराजुद्दीन निरंतर जनहित में सूचनाएं मांगते रहते हैं। गन्ना विभाग द्वारा किसानों को सुलभता से पर्चियां न उपलब्ध कराने पर उन्होंने किसानों की लड़ाई लड़ी और जन सूचना अधिकार कानून को अपना हथियार बनाया। एक बार तो उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि गन्ना विभाग आरटीआई से मुक्त है, लेकिन बाद में किसानों को पर्चियां उपलब्ध कराई गई। मेहराजुद्दीन कई विभागों के विरुद्ध आरटीआई मांग कर पीड़ितों को इंसाफ दिला चुके हैं।
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बिजनौर। जनपद में अनेकों आरटीआई कार्यकर्ता जनता की आवाज को बुलंद कर रहे हैं साथ ही भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं और पीड़ितों को न्याय दिला रहे हैं।
ग्राम करौंदा चौधरी निवासी रियासत अली अंसारी ने जन सूचना अधिकार कानून का प्रयोग कर भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाई। उनके द्वारा कई सूचनाएं मांगी गई तथा इसकी शिकायतें प्रशासन स्तर पर की गई। रियासत अली की शिकायत पर मुख्य विकास अधिकारी, सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा एडीओ पंचायत पर जुर्माना भी लग चुका है।
ग्राम करौंदा चौधर निवासी ऋषि त्यागी एक आरटीआई एक्टिविस्ट है। उन्होंने कई मामलों में सूचना के अधिकार कानून का प्रयोग किया और पीड़ितों को न्याय दिलाया। उन्होंने विकासखंड कोतवाली देहात की ग्राम पंचायत त्रिलोकावाला में प्रधानाचार्य रहे व्यक्ति की मृत्यु के बाद जन सूचना के अंतर्गत सूचनाएं मांगी। तब पता चला कि खुद को मृत घोषित कर चुके शिक्षक ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र दिया है। मामले की जांच चल रही है। इसके अतिरिक्त वह कई अन्य मामलों में भी सूचनाएं मांग कर पीड़ितों को इंसाफ दिला चुके हैं।
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ग्राम शादीपुर निवासी प्रशांत मौर्य आरटीआई कार्यकर्ता है। उन्होंने कई बार भ्रष्टाचार से संबंधित मुद्दे उठाए तथा जन सूचनाएं एकत्र की। उनके द्वारा सूचनाएं मांगने के बाद कई बार प्रशासन हरकत में आया तथा उनकी शिकायतों पर कार्यवाही की गई। ग्राम इस्लामपुर लालू उर्फ मालीवाला निवासी मेहराजुद्दीन निरंतर जनहित में सूचनाएं मांगते रहते हैं। गन्ना विभाग द्वारा किसानों को सुलभता से पर्चियां न उपलब्ध कराने पर उन्होंने किसानों की लड़ाई लड़ी और जन सूचना अधिकार कानून को अपना हथियार बनाया। एक बार तो उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि गन्ना विभाग आरटीआई से मुक्त है, लेकिन बाद में किसानों को पर्चियां उपलब्ध कराई गई। मेहराजुद्दीन कई विभागों के विरुद्ध आरटीआई मांग कर पीड़ितों को इंसाफ दिला चुके हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता रियासत अली अंसारी- फोटो : BIJNOR

आरटीआई कार्यकर्ता ऋषि त्यागी- फोटो : BIJNOR
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