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स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का प्रशिक्षण शुरू
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स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का प्रशिक्षण शुरू
बिजनौर। शासन महिलाओं को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने में लगा है। इसलिए स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मनरेगा मेट की कमान संभालेंगी। इसके लिए जिले में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का प्रशिक्षण शुरू हो गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं को हर क्षेत्र में रोजगार देने की पहल की है। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं गांव में बिजली के बिल वसूली रही हैं। सरकारी राशन की दुकान चला रही हैं। बाल पुष्टाहार तैयार करके बांट रही हैं। अब शासन ने स्वयं सहायता समूह की महिलाएं को मनरेगा में मेट बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला उपायुक्त मनरेगा ज्ञान सिंह ने बताया कि कोरोना कर्फ्यू में सुस्त पड़े मनरेगा के काम अब गति पकड़ गए हैं। जिले में दो लाख 53728 श्रमिक मनरेगा में पंजीकृत हैं। इनमें एक लाख 83688 श्रमिक एक्टिव हैं। जिले की 1123 पंचायतों में रोजाना करीब 40000 श्रमिकों को मनरेगा के कार्यों में लगे हैं। हर 20 श्रमिकों पर एक मेट नियुक्त होगी। इस प्रकार रोजाना 200 महिलाओं को मेट बनाया जाएगा। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ही मेट बनाया जाएगा। कार्य स्थल बढ़ने पर मेट की संख्या बढ़ेगी। कार्य स्थल पर आवंटित काम को पूरा कराना, श्रमिकों की हाजिरी लगाना, प्रति श्रमिक 100 दिन कार्य आवंटन का हिसाब रखना आदि ड्यूटी में शामिल हैं। हर ब्लाक में प्रशिक्षण शिविर लगेंगे।
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बिजनौर। शासन महिलाओं को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने में लगा है। इसलिए स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मनरेगा मेट की कमान संभालेंगी। इसके लिए जिले में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का प्रशिक्षण शुरू हो गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं को हर क्षेत्र में रोजगार देने की पहल की है। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं गांव में बिजली के बिल वसूली रही हैं। सरकारी राशन की दुकान चला रही हैं। बाल पुष्टाहार तैयार करके बांट रही हैं। अब शासन ने स्वयं सहायता समूह की महिलाएं को मनरेगा में मेट बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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जिला उपायुक्त मनरेगा ज्ञान सिंह ने बताया कि कोरोना कर्फ्यू में सुस्त पड़े मनरेगा के काम अब गति पकड़ गए हैं। जिले में दो लाख 53728 श्रमिक मनरेगा में पंजीकृत हैं। इनमें एक लाख 83688 श्रमिक एक्टिव हैं। जिले की 1123 पंचायतों में रोजाना करीब 40000 श्रमिकों को मनरेगा के कार्यों में लगे हैं। हर 20 श्रमिकों पर एक मेट नियुक्त होगी। इस प्रकार रोजाना 200 महिलाओं को मेट बनाया जाएगा। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ही मेट बनाया जाएगा। कार्य स्थल बढ़ने पर मेट की संख्या बढ़ेगी। कार्य स्थल पर आवंटित काम को पूरा कराना, श्रमिकों की हाजिरी लगाना, प्रति श्रमिक 100 दिन कार्य आवंटन का हिसाब रखना आदि ड्यूटी में शामिल हैं। हर ब्लाक में प्रशिक्षण शिविर लगेंगे।
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