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जुलाई में नहीं हुई सामान्य से आधी भी बारिश
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सावन खत्म होने को आया, अभी बारिश का इंतजार
बिजनौर। सावन का महीना खत्म होने को है, लेकिन अभी भी लोगों को बारिश का इंतजार है। जिले में अभी तक सामान्य से आधी भी बारिश नहीं हुई है। एक, दो अच्छी बारिश हो छोड़ दें तो बादलों ने सिर्फ बूंदाबांदी ही की है। धान की फसल को भी बारिश का इंतजार है। लोग सावन में भी गर्मी से बेहाल हो रहे हैं।
सावन को बारिश का महीना माना जाता है। हर बार बारिश क्षेत्र को तर कर जाती थी। यहां तक कि नदियां भी उफान तक पहुंच जातीं थीं। लेकिन सावन समाप्त होने में मात्र एक सप्ताह ही बचा है। एक दो बारिश को छोड़ दें तो पूरे महीने निराशा ही हाथ लगी है। लोग गर्मी से बेहाल हैं और अभी भी बारिश का इंतजार है।
सामान्य तौर पर जिले में 337.5 एमएम बारिश होती है लेकिन अब तक करीब 150 एमएम बारिश ही हुई है। धान की फसल को भी बारिश की दरकार है। जिले में करीब 60 हजार हेक्टेयर में धान की फसल बोई जाती है। जुलाई में बारिश के साथ ही धान की बुवाई शुरू हो जाती है। लेकिन कम बारिश किसानों के लिए मुसीबत बन रही है। सामान्य बारिश भी होती है तो किसानों को सिंचाई के लिए नलकूप, इंजन नहीं चलाने पड़ते। लेकिन सामान्य से आधी बारिश भी अब तक जिले की धरती पर नहीं हुई है। किसान राकेश सैनी का कहना है कि उन्हें धान की सिंचाई इंजन से करनी पड़ रही है। इससे फसल की लागत बढ़ रही है।
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जुलाई में बारिश का आंकड़ा
साल बारिश
2015 435.5
2016 632.6
2017 197.6
2018 379
2019 494.6
2020 150
नोट : बारिश के आंकड़े नगीना स्थित मौसम वेेधशाला से लिए गए हैं।
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बिजनौर। सावन का महीना खत्म होने को है, लेकिन अभी भी लोगों को बारिश का इंतजार है। जिले में अभी तक सामान्य से आधी भी बारिश नहीं हुई है। एक, दो अच्छी बारिश हो छोड़ दें तो बादलों ने सिर्फ बूंदाबांदी ही की है। धान की फसल को भी बारिश का इंतजार है। लोग सावन में भी गर्मी से बेहाल हो रहे हैं।
सावन को बारिश का महीना माना जाता है। हर बार बारिश क्षेत्र को तर कर जाती थी। यहां तक कि नदियां भी उफान तक पहुंच जातीं थीं। लेकिन सावन समाप्त होने में मात्र एक सप्ताह ही बचा है। एक दो बारिश को छोड़ दें तो पूरे महीने निराशा ही हाथ लगी है। लोग गर्मी से बेहाल हैं और अभी भी बारिश का इंतजार है।
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सामान्य तौर पर जिले में 337.5 एमएम बारिश होती है लेकिन अब तक करीब 150 एमएम बारिश ही हुई है। धान की फसल को भी बारिश की दरकार है। जिले में करीब 60 हजार हेक्टेयर में धान की फसल बोई जाती है। जुलाई में बारिश के साथ ही धान की बुवाई शुरू हो जाती है। लेकिन कम बारिश किसानों के लिए मुसीबत बन रही है। सामान्य बारिश भी होती है तो किसानों को सिंचाई के लिए नलकूप, इंजन नहीं चलाने पड़ते। लेकिन सामान्य से आधी बारिश भी अब तक जिले की धरती पर नहीं हुई है। किसान राकेश सैनी का कहना है कि उन्हें धान की सिंचाई इंजन से करनी पड़ रही है। इससे फसल की लागत बढ़ रही है।
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जुलाई में बारिश का आंकड़ा
साल बारिश
2015 435.5
2016 632.6
2017 197.6
2018 379
2019 494.6
2020 150
नोट : बारिश के आंकड़े नगीना स्थित मौसम वेेधशाला से लिए गए हैं।