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नहीं हो सका संस्कृत विद्यालयों की कायाकल्प
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नहीं हो सका संस्कृत विद्यालयों की कायाकल्प
बिजनौर। संस्कृत विद्यालयों के कायाकल्प के लिए प्रोजेक्ट अलंकार योजना परवान नहीं चढ़ सकी। योजना में शिक्षकों की नियुक्ति तो हो गई, लेकिन उनको सात माह से वेतन नहीं मिला है। जिसके चलते शिक्षकों के परिवारों के समक्ष आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
शासन ने संस्कृत विद्यालयों का कायाकल्प करने का निर्णय लिया। इसके लिए प्रोजेक्ट अलंकार योजना शुरू की। योजना के अंतर्गत पढ़ाई लिखाई का स्तर सुधारना, खेलकूद, भवनों का जीर्णोद्धार आदि शामिल हैं। योजना में केवल संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति हुई। इसके अलावा योजना आगे नहीं बढ़ी। जिले में एक मात्र बिहारी संस्कृत माध्यमिक विद्यालय चांदपुर में हैं। विद्यालय करीब 102 वर्ष पुराना है। विद्यालय के शिक्षकों को सात माह से वेतन नहीं मिला है। नाम नहीं छापाने की शर्त पर बताया गया कि शिक्षक खाने पीने का सामान उधार ले रहे हैं। बच्चों के पढ़ाई की समस्या है।
शासन से हाईस्कूल व इंटर कॉलेज के शिक्षकों को मानदेय देने की अलग-अलग व्यवस्था है। जो संस्कृत विद्यालय हाईस्कूल तक मान्यता प्राप्त है, वहां के शिक्षकों को 12000 रुपये प्रति माह तथा जो संस्कृत विद्यालय इंटर तक मान्यता प्राप्त है उन्हें 15000 रुपये प्रति माह मानदेय मिलता है। जानकारी के अनुसार बिहारी संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक नवंबर 2021 में मानदेय पर रखे गए थे। शिक्षकों को मात्र 15000 रुपये मानदेय मिलता है। सात माह से वेतन नहीं मिला है। डीआईओएस राजेश कुमार ने बताया कि शिक्षकों के मानदेय के लिए शासन से बजट नहीं आया है। स्मरण पत्र भेजे गए हैं।
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बिजनौर। संस्कृत विद्यालयों के कायाकल्प के लिए प्रोजेक्ट अलंकार योजना परवान नहीं चढ़ सकी। योजना में शिक्षकों की नियुक्ति तो हो गई, लेकिन उनको सात माह से वेतन नहीं मिला है। जिसके चलते शिक्षकों के परिवारों के समक्ष आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
शासन ने संस्कृत विद्यालयों का कायाकल्प करने का निर्णय लिया। इसके लिए प्रोजेक्ट अलंकार योजना शुरू की। योजना के अंतर्गत पढ़ाई लिखाई का स्तर सुधारना, खेलकूद, भवनों का जीर्णोद्धार आदि शामिल हैं। योजना में केवल संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति हुई। इसके अलावा योजना आगे नहीं बढ़ी। जिले में एक मात्र बिहारी संस्कृत माध्यमिक विद्यालय चांदपुर में हैं। विद्यालय करीब 102 वर्ष पुराना है। विद्यालय के शिक्षकों को सात माह से वेतन नहीं मिला है। नाम नहीं छापाने की शर्त पर बताया गया कि शिक्षक खाने पीने का सामान उधार ले रहे हैं। बच्चों के पढ़ाई की समस्या है।
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शासन से हाईस्कूल व इंटर कॉलेज के शिक्षकों को मानदेय देने की अलग-अलग व्यवस्था है। जो संस्कृत विद्यालय हाईस्कूल तक मान्यता प्राप्त है, वहां के शिक्षकों को 12000 रुपये प्रति माह तथा जो संस्कृत विद्यालय इंटर तक मान्यता प्राप्त है उन्हें 15000 रुपये प्रति माह मानदेय मिलता है। जानकारी के अनुसार बिहारी संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक नवंबर 2021 में मानदेय पर रखे गए थे। शिक्षकों को मात्र 15000 रुपये मानदेय मिलता है। सात माह से वेतन नहीं मिला है। डीआईओएस राजेश कुमार ने बताया कि शिक्षकों के मानदेय के लिए शासन से बजट नहीं आया है। स्मरण पत्र भेजे गए हैं।
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