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Bijnor News: बॉलीवुड की चकाचौंध से गुमनाम तन्हाई तक आ गए सलीम बिजनौरी

Sun, 28 Dec 2025 11:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 28 Dec 2025 11:48 PM IST
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Salim Bijnori went from the glitz of Bollywood to the unknown loneliness
स्योहारा। कभी जिन शब्दों पर बॉलीवुड के सितारे परदे पर जज्बात बिखेरते थे, आज उन्हीं शब्दों के रचनाकार गुमनामी, बीमारी और संघर्ष के साए में जिंदगी बिता रहे हैं। सहसपुर निवासी मशहूर गीतकार सलीम बिजनौरी की कहानी शोहरत, सफलता और फिर अकेलेपन की ऐसी दास्तान है, जो दिल को छू जाती है।
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कस्बा सहसपुर के निवासी सलीम बिजनौरी ने बेहद कम उम्र में हिंदी फिल्म उद्योग में अपनी पहचान बना ली थी। फिल्म सूर्या में अभिनेता राजकुमार द्वारा बोले गए प्रभावशाली संवाद उनकी लेखनी का ही कमाल थे। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक फिल्मों में गीत लिखकर बॉलीवुड में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
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ये जिंदगी का सफर, दीवानगी, तुमको न भूल पाएंगे, मैंने दिल तुझको दिया, रक्त, खेल, किस्मत, पहचान, शादी करके फंस गया यार, रफू चक्कर, कुछ करिए, किसान सहित दर्जनों फिल्मों में लिखे उनके गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं। अक्षय कुमार, सनी देओल, अजय देवगन, सलमान खान, सुहेल खान और विनोद खन्ना जैसे नामचीन कलाकारों के साथ काम करना उनकी प्रतिभा का प्रमाण है। 1995 में फिल्म कलाकार बॉबी से उनका विवाह हुआ। जिंदगी पटरी पर थी, कॅरिअर ऊंचाइयों पर था, लेकिन 2010 में अचानक हुए पैरालाइसिस ने सब कुछ बदल दिया। बीमारी ने शरीर को जकड़ लिया और हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते चले गए। सबसे बड़ा दर्द तब मिला, जब जीवन भर साथ निभाने का वादा करने वाली पत्नी ने भी उनका साथ छोड़ दिया।
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बीमारी और अकेलेपन के बीच सलीम बिजनौरी मुंबई की चकाचौंध छोड़कर अपने पैतृक कस्बे सहसपुर लौट आए। आज उनकी जिंदगी उनके ही लिखे गीतों से मिलने वाली रॉयल्टी के सहारे चल रही है। इंडियन परफॉर्मिंग राइट सोसायटी (आईपीआरएस) से हर एक-दो महीने में मिलने वाली रॉयल्टी ही उनकी आमदनी का मुख्य जरिया है। कम लोग जानते हैं कि 2001 में तत्कालीन वित्त मंत्री मंत्री प्रणब मुखर्जी ने उन्हें फिल्म राजगुरु के अवसर पर सम्मानित किया था। यह सम्मान उनके सुनहरे दौर की याद दिलाता है, जो अब सिर्फ तस्वीरों और यादों में सिमट कर रह गया है। पड़ोस में रहने वाले उनके मित्र अमजद अली अंसारी और शाहिद अहमद बताते हैं कि सलीम बिजनौरी हमेशा से नेकदिल और मिलनसार रहे हैं। शोहरत के शिखर पर पहुंचने के बाद भी उन्होंने कभी अपने गांव और पुराने दोस्तों से दूरी नहीं बनाई।
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