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शासन की सख्ती बेमानी
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Fri, 14 Jul 2017 12:29 AM IST
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बिजनौर के ग्राम ब्रह्मपुरी में रपटे पर पानी आने से नाव से घर जाते छात्र-छात्राएं और ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में गंगा स्वच्छता अभियान को लेकर शासन भले सख्त हो, पर जिले में इसे कोई सफलता नहीं मिल पा रही है। गंगा में कूड़ा-करकट, टूटी मूर्तियां डालना और आसपास गंदगी से लोग बाज नहीं आ रहे हैं। अब गंगा नदी में गंदगी फैलाने वालों पर नकेल कसने की तैयारी हो गई है। एनजीटी ने गंगा में गंदगी डालने वालों पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का आदेश दिया है।
फिलहाल गंगा की स्वच्छता के प्रति लोग गंभीर नहीं हैं। गंगा घाट पर अंतिम संस्कार के लिए जाने वाले लोग पुराने कपडे़, पालीथीन, जली हुई लकड़ियां आदि सामान गंगा किनारे ही छोड़ आते हैं। अब भी लोग गंगा में टूटी हुई मूर्तियां प्रवाहित कर रहे हैं। इन पर कई तरह के कैमिकल लगे होते हैं, जो गंगा की धारा में घुल जाते हैं। गंगा की धारा के बीच खाली जमीन में खेती कर उसमें कैमिकल डालकर भी प्रदूषण फैलाया जा रहा है।
एनजीटी के आदेश के मुताबिक, गंगा किनारे से 100 मीटर की दूरी तक किसी भी प्रकार का डेवलपमेंट नहीं किया जा सकेगा। ऐसे में गंगा घाट के आसपास सजी दुकानें भी हटाई जाएंगी। साथ ही नदी में कूड़ा डालते पकड़े जाने पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। पर शासन की सख्ती के बाद भी गंगा को दूषित करने वाले कम नहीं हैं। शहर के गंदे पानी का नाला गांव हेमराज कॉलोनी के पास एक बाहे में जाकर गिर रहा है। यह बाहा आगे चलकर गंगा नदी में गिरता है। धार्मिक कार्यक्रम होने पर मूर्ति विसर्जन भी गंगा में ही किया जाता है। गणेश महोत्सव से लेकर दुर्गा पूजा पर मूर्ति विसर्जन गंगा में होता है।
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पहले जिले में गणेश महोत्सव की धूम नहीं होती थी, पर गत तीन वर्षों से जिले में धूमधाम से गणेश महोत्सव मनाया जाता है। बाद में श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों के साथ मूर्ति विर्सजन के लिए गंगा नदी पर ही पहुंचते है। ऐसे में गंगा को स्वच्छ रखना बड़ा मुश्किल काम है।
गंगा बैराज पर शव के साथ उसके कपड़े और दवाई तक लाकर डाले जा रहे है। शव के साथ लाए जा रहे कपड़ों के जगह-जगह ढेर लगे हैं। वर्षाकाल में गंगा में घाट पर हालांकि कूड़ा कम दिखा रहा है, किंतु उससे उसकी दुर्दशा का पता चलता है। गंगा में प्रवाहित मूर्तियां दूर-दूर तक दिखाई पड़ती थी, किंतु उफान के कारण अब वह नहीं दिख रही हैं।
दूसरी ओर, महात्मा विदुर की कुटी पर पहुंचने वाले श्रद्धालु भी गंगा में डुबकी लगाते हैं। वे अपने साथ लाई घरों की पूजा सामग्री, राख , पॉलिथीन आदि यहीं छोड़ जाते हैं। यहां पर भी मृत लोगों का अंतिम संस्कार होा है। लोग मृतकों के कपड़े, दवाइयां, पॉलिथीन आदि गंगा किनारे ही छोड़ जाते हैं।
ब्रह्मपुरी गांव में घुसा गंगा और मालन का पानी, नाव ही सहारा
मंडावर/बेगावाला में पहाड़ों पर हो रही बारिश से गंगा और मालन नदियां उफन गई हैं। गांव ब्रह्मपुरी में दोनों नदियों का पानी भर गया है। गांव की सड़कें पानी में डूब गई हैं और अब आने-जाने के लिए नाव का सहारा लिया जा रहा है। गांव की सड़कों पर बच्चे मछली पकड़ रहे हैं। गांव के प्राथमिक विद्यालय में भी दो-दो फीट तक पानी भरा है। गांववाले बाढ़ के डर से सहमे हुए हैं।
खादर क्षेत्र के लिए पहाड़ों पर हो रही बारिश मुसीबत बनती जा रही है। बुधवार को गंगा में 59 हजार क्यूसेक पानी था, जो बृहस्पतिवार को बढ़कर एक लाख 20 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया। सुबह के समय जब गांव ब्रह्मपुरी के बच्चे स्कूल गए थे, तब तक सब कुछ ठीक था। करीब सात बजे के मालन और गंगा का पानी गांव में घुसने लगा। हजारों बीघा जंगल में भी गंगा का पानी भर गया है। गांव में दोपहर तक दो से तीन फीट तक पानी भर गया। स्कूल गए बच्चों को नाव से घर लाया गया। रावली, शहजादपुर, भोगपुर, इनामपुरा आदि गांवों को जोड़ने वाले मालन नदी के रपटे पर भी तीन से चार फीट पानी बह रहा है। इस रपटे से आवाजाही के लिए नाव ही एक जरिया बच गई है।
नाव न हो तो इन गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट जाएगा। गांव ब्रह्मपुरी के अंदर भरे पानी में नाव चला रहे रोहित ने बताया कि उसके घर मेहमान आए हैं। वह उनके नाश्ते के लिए गांव की दुकान से सामान लेने नाव से जा रहा है। गांववालों ने कई जगह मिट्टी के बोरे भरकर स्टड बना लिए हैं और उन पर बल्ली रखकर भी आ-जा रहे हैं।
गांवों की सड़कों पर जाल डालकर बच्चे मछली पकड़ रहे हैं। ग्रामीण नौबहार सिंह, सुरेंद्र आदि का कहना है कि बरसात में उनके गांव में पानी भरने की कोई सुध नहीं ले रहा है। वे पूरी बरसात खौफ के साए में जीते हैं, गांव को बचाने के लिए अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सिंचाई विभाग के एई पंकज अग्रवाल के अनुसार, हरिद्वार से गंगा में 46 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
मगर जिले तक आते-आते पानी की धारा चारों ओर को फैलने से कोई नुकसान नहीं होगा। इस समय गंगा में एक लाख 20 हजार क्यूसेक पानी बह रहा है। शुक्रवार को पानी आधा हो जाएगा।
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फिलहाल गंगा की स्वच्छता के प्रति लोग गंभीर नहीं हैं। गंगा घाट पर अंतिम संस्कार के लिए जाने वाले लोग पुराने कपडे़, पालीथीन, जली हुई लकड़ियां आदि सामान गंगा किनारे ही छोड़ आते हैं। अब भी लोग गंगा में टूटी हुई मूर्तियां प्रवाहित कर रहे हैं। इन पर कई तरह के कैमिकल लगे होते हैं, जो गंगा की धारा में घुल जाते हैं। गंगा की धारा के बीच खाली जमीन में खेती कर उसमें कैमिकल डालकर भी प्रदूषण फैलाया जा रहा है।
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एनजीटी के आदेश के मुताबिक, गंगा किनारे से 100 मीटर की दूरी तक किसी भी प्रकार का डेवलपमेंट नहीं किया जा सकेगा। ऐसे में गंगा घाट के आसपास सजी दुकानें भी हटाई जाएंगी। साथ ही नदी में कूड़ा डालते पकड़े जाने पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। पर शासन की सख्ती के बाद भी गंगा को दूषित करने वाले कम नहीं हैं। शहर के गंदे पानी का नाला गांव हेमराज कॉलोनी के पास एक बाहे में जाकर गिर रहा है। यह बाहा आगे चलकर गंगा नदी में गिरता है। धार्मिक कार्यक्रम होने पर मूर्ति विसर्जन भी गंगा में ही किया जाता है। गणेश महोत्सव से लेकर दुर्गा पूजा पर मूर्ति विसर्जन गंगा में होता है।
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पहले जिले में गणेश महोत्सव की धूम नहीं होती थी, पर गत तीन वर्षों से जिले में धूमधाम से गणेश महोत्सव मनाया जाता है। बाद में श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों के साथ मूर्ति विर्सजन के लिए गंगा नदी पर ही पहुंचते है। ऐसे में गंगा को स्वच्छ रखना बड़ा मुश्किल काम है।
गंगा बैराज पर शव के साथ उसके कपड़े और दवाई तक लाकर डाले जा रहे है। शव के साथ लाए जा रहे कपड़ों के जगह-जगह ढेर लगे हैं। वर्षाकाल में गंगा में घाट पर हालांकि कूड़ा कम दिखा रहा है, किंतु उससे उसकी दुर्दशा का पता चलता है। गंगा में प्रवाहित मूर्तियां दूर-दूर तक दिखाई पड़ती थी, किंतु उफान के कारण अब वह नहीं दिख रही हैं।
दूसरी ओर, महात्मा विदुर की कुटी पर पहुंचने वाले श्रद्धालु भी गंगा में डुबकी लगाते हैं। वे अपने साथ लाई घरों की पूजा सामग्री, राख , पॉलिथीन आदि यहीं छोड़ जाते हैं। यहां पर भी मृत लोगों का अंतिम संस्कार होा है। लोग मृतकों के कपड़े, दवाइयां, पॉलिथीन आदि गंगा किनारे ही छोड़ जाते हैं।
ब्रह्मपुरी गांव में घुसा गंगा और मालन का पानी, नाव ही सहारा
मंडावर/बेगावाला में पहाड़ों पर हो रही बारिश से गंगा और मालन नदियां उफन गई हैं। गांव ब्रह्मपुरी में दोनों नदियों का पानी भर गया है। गांव की सड़कें पानी में डूब गई हैं और अब आने-जाने के लिए नाव का सहारा लिया जा रहा है। गांव की सड़कों पर बच्चे मछली पकड़ रहे हैं। गांव के प्राथमिक विद्यालय में भी दो-दो फीट तक पानी भरा है। गांववाले बाढ़ के डर से सहमे हुए हैं।
खादर क्षेत्र के लिए पहाड़ों पर हो रही बारिश मुसीबत बनती जा रही है। बुधवार को गंगा में 59 हजार क्यूसेक पानी था, जो बृहस्पतिवार को बढ़कर एक लाख 20 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया। सुबह के समय जब गांव ब्रह्मपुरी के बच्चे स्कूल गए थे, तब तक सब कुछ ठीक था। करीब सात बजे के मालन और गंगा का पानी गांव में घुसने लगा। हजारों बीघा जंगल में भी गंगा का पानी भर गया है। गांव में दोपहर तक दो से तीन फीट तक पानी भर गया। स्कूल गए बच्चों को नाव से घर लाया गया। रावली, शहजादपुर, भोगपुर, इनामपुरा आदि गांवों को जोड़ने वाले मालन नदी के रपटे पर भी तीन से चार फीट पानी बह रहा है। इस रपटे से आवाजाही के लिए नाव ही एक जरिया बच गई है।
नाव न हो तो इन गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट जाएगा। गांव ब्रह्मपुरी के अंदर भरे पानी में नाव चला रहे रोहित ने बताया कि उसके घर मेहमान आए हैं। वह उनके नाश्ते के लिए गांव की दुकान से सामान लेने नाव से जा रहा है। गांववालों ने कई जगह मिट्टी के बोरे भरकर स्टड बना लिए हैं और उन पर बल्ली रखकर भी आ-जा रहे हैं।
गांवों की सड़कों पर जाल डालकर बच्चे मछली पकड़ रहे हैं। ग्रामीण नौबहार सिंह, सुरेंद्र आदि का कहना है कि बरसात में उनके गांव में पानी भरने की कोई सुध नहीं ले रहा है। वे पूरी बरसात खौफ के साए में जीते हैं, गांव को बचाने के लिए अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सिंचाई विभाग के एई पंकज अग्रवाल के अनुसार, हरिद्वार से गंगा में 46 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
मगर जिले तक आते-आते पानी की धारा चारों ओर को फैलने से कोई नुकसान नहीं होगा। इस समय गंगा में एक लाख 20 हजार क्यूसेक पानी बह रहा है। शुक्रवार को पानी आधा हो जाएगा।